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सीएम का ही नाम भूल गए भाजपा कार्यकर्ता:चलती सभा में पिता को फोन, पटवारी ने पूछा आलू का भाव; ‘अन्नदाता’ पर अटके मंत्री

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। कार्यकर्ताओं ने गलती से मिस्टेक कर दी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अक्सर मंच पर अपने विधायक और मंत्रियों के नाम भूल जाते हैं। अब उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हो गया। कार्यकर्ताओं ने उनके लिए ‘मोहन सिंह यादव – जिंदाबाद’ और ‘हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो – मोहन सिंह यादव जैसा हो’ के नारे लगा दिए। जबकि सीएम अपने नाम में ‘सिंह’ नहीं लगाते हैं। लेकिन कार्यकर्ताओं ने उत्साह में गलती से मिस्टेक कर दी। हालांकि फौरन गलती सुधारकर ‘मोहन यादव – जिंदाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। बता दें कि सीएम डॉ. मोहन यादव दतिया जिले के सेवढ़ा पहुंचे थे। जहां उन्होंने सिंध नदी पर बने पुल का लोकार्पण किया। ‘अन्नदाता’ पर अटक गए मंत्री राकेश सिंह
मंत्री राकेश सिंह अन्नदाता का ही नाम भूल गए। मंत्री जी जबलपुर में राज्य सरकार के बजट को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए थे। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस बार GYANII (ज्ञानी) थीम पर बजट बनाया है। मंत्री जी ने पढ़कर बताया कि G से गरीब कल्याण, Y से युवा शक्ति, A से अन्नदाता, N से नारी शक्ति, I से इन्फ्रास्ट्रक्चर और I से इंडस्ट्री। इसके बाद मंत्री राकेश सिंह ने बिना कागज के मीडिया से बात करते हुए जब GYANII का फुल फॉर्म बताया, तो वे A पर अटक गए। मतलब A से अन्नदाता नहीं बोल पाए। हालांकि पास में खड़े लोगों ने बता दिया, जिसके बाद उन्होंने अपनी बात पूरी की। अब लोग कह रहे हैं कि अन्नदाता को नहीं भूलना चाहिए। नाराज हो गए तो गड़बड़ हो जाएगी। कटारे बोले- भाजपा में जाने का सवाल ही नहीं
विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो उनके भाजपा में जाने की खबरें उड़ने लगीं। कांग्रेस कैंप से इसकी आहट मिलते ही भाजपा के कान खड़े हो गए। भाजपा के कुछ नेताओं ने तो उन्हें न्योता तक दे डाला। जब डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल से पूछा गया कि अगर हेमंत कटारे भाजपा में आते हैं, तो क्या आप उनका स्वागत करेंगे, इस पर राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि हम लोग तो दरवाजा खोलकर हमेशा बैठे रहते हैं। हालांकि हेमंत कटारे ने साफ किया कि भाजपा में जाने का उनके मन में विचार भी नहीं आया है। वहीं उन्होंने अपने इस्तीफे की बात भी स्वीकार की है। जब उनसे पूछा गया कि क्या आपने इस्तीफा वापस ले लिया है, तो उन्होंने कहा कि मैं आगे बढ़कर पीछे नहीं हटता हूं। मैंने इस्तीफा वापस नहीं लिया है। कटारे ने कहा कि उन्होंने पार्टी फोरम पर अपनी बात रख दी है। उन्होंने अपने इस्तीफे की भले ही अलग-अलग कई वजहें बताई हों, लेकिन लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी में जरूर कुछ खटपट हुई है। यह इस्तीफा उसी का नतीजा है। जब जीतू पटवारी ने लगा दिया पिता को फोन
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के दौरान अपने पिता को फोन लगा दिया और उनसे खेती का हाल पूछ लिया। जीतू पटवारी ने अपने पिता से पूछा कि आलू का क्या भाव मिल रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि 8–9 रुपये भाव है। खाद-बीज के पैसे भी नहीं निकल पाए। इस बार गेहूं की फसल भी खराब हो गई। फिर पटवारी ने पूछा कि आमदनी कितनी हुई। इस पर उन्होंने कहा कि सब बराबर रहा। जीतू पटवारी ने कहा कि इसके जरिये उन्होंने खेती-किसानी का हाल बताया। उन्होंने कहा कि मेरे पिताजी भी किसान हैं और आज भी वे हर रोज सुबह खेत में जाकर फसलों की देखरेख करते हैं। लेकिन भाजपा की किसान-विरोधी नीतियों से वे भी परेशान हैं। जीतू पटवारी ने एक तीर से दो निशाने लगाए। पहला, यह बताया कि वे किसान पुत्र हैं। दूसरा, किसानों की हालत बयां की। अब लोग कह रहे हैं कि राजनीति यूं ही नहीं होती साहब, सुर्खियों में रहने के लिए ऐसे पब्लिसिटी स्टंट भी करने पड़ते हैं। जब ड्राइवर बन गए पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह
मऊगंज से पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ड्राइवर बन गए। वे खुद बस चलाकर कार्यकर्ताओं को लेकर राहुल गांधी की सभा के लिए भोपाल निकल पड़े। इस दौरान बस में सवार लोगों ने उनके बस चलाने का वीडियो बना लिया। अब लोग कह रहे हैं कि राजनीति है साहब, सुर्खियों में रहने के लिए बस भी चलानी पड़ती है। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), आशीष उरमलिया (जबलपुर) ये भी पढ़ें –
मंत्री के लंबे भाषण पर गुस्सा, लोगों ने की हूटिंग: ‘पाकिस्तान की जय’ कहने वाले ने माफी मांगी मंच, माइक और सामने बैठी पब्लिक मिल जाए, तो नेता भला कहां रुकते हैं। अपना सारा ज्ञान उड़ेल देना जरूरी हो जाता है। सामने बैठे लोग रुचि ले रहे हैं या नहीं, इसकी परवाह किसे है। बस अपनी बात पूरी होनी चाहिए। खजुराहो फिल्म फेस्टिवल में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, लेकिन यहां नेता जी का दांव उल्टा पड़ गया। पूरी खबर पढ़ें

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