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ग्वालियर का शिव मंदिर ‘डॉक्टर महादेव’ नाम से प्रसिद्ध:अभिषेक जल से त्वचा समस्याओं में लाभ की मान्यता, दर्शन करने कलाकार भी पहुंचते हैं

ग्वालियर जिले के बधौली गांव के एक प्राचीन शिव मंदिर को ‘डॉक्टर महादेव’ के नाम से जाना जाता है। यहां श्रद्धालुओं का मानना है कि शिवलिंग पर किए गए अभिषेक का जल त्वचा संबंधी समस्याओं पर लगाने से लाभ मिलता है। इसी आस्था के कारण स्थानीय लोग और अन्य राज्यों से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर ग्वालियर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर बधौली गांव में एक पहाड़ी पर स्थित है। मुख्य मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर अंदर स्थित इस मंदिर तक श्रद्धालु पैदल पहुंचते हैं। 1526 में राजा मानसिंह तोमर ने कराया था निर्माण स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर का निर्माण1526 में ग्वालियर रियासत के राजा मानसिंह तोमर ने करवाया था। उस समय बधौली क्षेत्र में उनकी सैन्य छावनी थी। सैनिकों की आस्था को ध्यान में रखते हुए यहां शिवलिंग की स्थापना की गई थी। यह शिवलिंग आज भी मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है। अभिषेक जल को श्रद्धालु घर भी ले जाते हैं मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार के सदस्य ऋषि शर्मा ने बताया कि श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के बाद उसी जल को प्रभावित स्थान पर लगाते हैं। कुछ श्रद्धालु मंदिर परिसर के पीछे बने कुंड से जल भरकर अपने घर भी ले जाते हैं और उसका उपयोग करते हैं। सोमवार के दिन मंदिर में बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अन्य राज्यों से भी दर्शन करने आते हैं लोग स्थानीय लोगों के अनुसार, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद मंदिर पहुंचकर भगवान का आभार व्यक्त करते हैं। मॉडल और कलाकार भी पहुंचे दर्शन के लिए मॉडल और फैशन डिजाइनर सोनू मनालिया ने बताया कि वे कई वर्षों से मंदिर में दर्शन करने आते हैं। उन्होंने कहा कि वे मंदिर का अभिषेक जल अपने साथ रखते हैं और समय-समय पर यहां आकर दर्शन करते हैं। एक मॉडल ने भी बताया कि उन्होंने मंदिर में दर्शन के बाद भगवान को धन्यवाद देने के लिए यहां आना जारी रखा। वैज्ञानिक परीक्षण की पुष्टि नहीं हुई स्थानीय लोगों का कहना है कि अभिषेक जल से लाभ की मान्यता आस्था से जुड़ी है। कुछ लोगों का मानना है कि जल में प्राकृतिक तत्व हो सकते हैं, लेकिन इस संबंध में कोई वैज्ञानिक परीक्षण या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बधौली का यह मंदिर अपने ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक मान्यता के कारण श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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