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हर नवजात की मौत का होगा ऑडिट:गर्भावस्था से प्रसव तक की पूरी जटिलताओं की फाइल तैयार करने के निर्देश जारी

नवजात शिशुओं की मौत को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग और सख्त हो गया है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कलेक्टर ने साफ निर्देश दिए कि एसएनसीयू में होने वाली हर नवजात मृत्यु का विस्तृत ऑडिट किया जाए। सिर्फ अस्पताल में हुई घटना ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक की सभी जटिलताओं को फाइल में शामिल करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत करने तथा एआई आधारित तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया है। बैठक में स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने ली स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा बैठक 20 फरवरी को कलेक्टर कार्यालय में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा की। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनील सोलंकी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि नवजात मृत्यु दर कम करना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसके लिए हर स्तर पर गंभीरता से काम करना होगा। एसएनसीयू में हर मौत की होगी गहराई से जांच कलेक्टर ने निर्देश दिए कि विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में होने वाली हर शिशु मृत्यु का डेथ ऑडिट किया जाए। ऑडिट में यह देखा जाए कि मृत्यु के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या उन्हें पहले पहचाना जा सकता था। उन्होंने कहा कि डेथ ऑडिट में गर्भावस्था के दौरान आई दिक्कतें, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, समय पर जांच और प्रसव के दौरान आई जटिलताओं को भी शामिल किया जाए। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा। ऑपरेशन थिएटर में एआई आधारित इन्फेक्शन कंट्रोल पर जोर बैठक में अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम में संक्रमण नियंत्रण की चेकलिस्ट का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि संक्रमण रोकने के लिए एआई आधारित तकनीक को शामिल करने पर विचार किया जाए, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हो। उन्होंने कहा कि संक्रमण नियंत्रण बेहतर होगा तो प्रसव और ऑपरेशन के दौरान होने वाली जटिलताओं में कमी आएगी। टीकाकरण, एएनसी पंजीयन और हाई रिस्क गर्भवती पर फोकस कलेक्टर ने टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लाभार्थियों से फीडबैक लेने के निर्देश दिए। साथ ही एएनसी पंजीयन बढ़ाने, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सुरक्षित प्रसव सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया। बुजुर्गों के लिए होप कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई कि होप कार्यक्रम के तहत 902 वृद्धजन चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 560 को नर्सिंग अधिकारियों द्वारा घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा चुकी हैं। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त बुजुर्गों को 7वें, 14वें और 21वें दिन स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा घर पर सेवाएं दी जाती हैं। पोषण सेवाओं में संयुक्त कार्य की जरूरत जिला पोषण समिति की बैठक में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग को मिलकर काम करने के निर्देश दिए, ताकि मातृ और शिशु स्वास्थ्य में समग्र सुधार हो सके।

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