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जगन्नाथ पुरी के राजा का राष्ट्रपति और पीएम को लेटर:परंपरा की रक्षा करने की अपील; कहा- ISKCON का अलग समय पर रथयात्रा आयोजित करना गलत

पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने ISKCON के विदेशों में अलग समय पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित करने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा है। उन्होंने 8 जुलाई को लेटर लिखकर दोनों से पुरी की प्राचीन परंपरा की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है। दिब्यसिंह देब श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के अध्यक्ष भी हैं। उनका कहना है कि ISKCON यात्रा का आयोजन ऐसी तारीखों पर कर रहा है, जो शास्त्रों के अनुसार नहीं हैं। इससे भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं। ISKCON का कहना है कि भगवान जगन्नाथ पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं के हैं। विदेशों में मौसम, स्थानीय परिस्थितियों और भक्तों की सुविधा को देखते हुए रथयात्रा की तारीख में लचीलापन रखा जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोग उत्सव में शामिल हो सकें और जगन्नाथ संस्कृति का वैश्विक प्रसार हो। इसी वजह से 21 जून को लंदन, 14 जून को न्यूयॉर्क सिटी और 5 जुलाई को सिडनी में रथयात्रा निकाली गई। लेकिन इस साल, स्नान पूर्णिमा 29 जून को थी और मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को होगी। मध्य प्रदेश में प्रस्तावित रथयात्राओं पर भी जताई आपत्ति गजपति महाराज ने उज्जैन स्थित ISKCON मंदिर की ओर से 16 से 25 जुलाई के बीच मध्य प्रदेश के 66 स्थानों पर रथयात्रा आयोजित करने की योजना पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रथ यात्रा केवल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाला 9 दिवसीय उत्सव है। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास रचित स्कंद पुराण में भी भगवान जगन्नाथ ने स्वयं स्नान यात्रा और रथयात्रा की निर्धारित तिथि बताई हैं। ऐसे में मनमानी तिथियों पर आयोजित करना प्राचीन परंपराओं और शास्त्रों के विपरीत है। ISKCON का तर्क- विदेशों में हर जगह एक ही दिन आयोजन संभव नहीं पुरी मंदिर की पिछली आपत्तियों का जवाब देते हुए ISKCON ने कहा था कि हर देश में जलवायु परिस्थितियों, सरकारी नियमों और स्थानीय सांस्कृतिक कारकों बड़ा असर डालते हैं। इसके कारण शास्त्रों में बताई गई तारीख पर रथयात्रा आयोजित करना हमेशा संभव नहीं होता है। इस्कॉन ने पुरी मंदिर को बताया था- “रूस में वहां का मौसम, सरकार और स्थानीय संस्कृति अक्सर शास्त्रों में बताई गई तारीखों पर रथयात्रा निकालने के अनुकूल नहीं होती है।” भास्कर नॉलेज… रथयात्रा को लेकर विवाद नया नहीं है। 2024 और 2025 में भी पुरी के गजपति महाराजा ने ISKCON से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार रथयात्रा आयोजित की जाए। 2026 में यह विवाद इसलिए ज्यादा चर्चा में आया क्योंकि कई देशों में रथयात्रा पुरी की तिथि से कई हफ्ते पहले आयोजित की गई, जिसके बाद औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… पुरी रथयात्रा: 200 से ज्यादा लोग 58 दिनों में तैयार करते हैं रथ, जानिए यात्रा के बाद इन रथों का क्या होता है हर साल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के 45 फीट ऊंचे तीनों रथ 200 से ज्यादा लोग सिर्फ 58 दिनों में तैयार करते हैं। ये रथ 5 तरह की खास लकड़ियों से पूरी तरह हाथों से बनाए जाते हैं। शुरुआत अक्षय तृतीया से हो जाती है और गुंडिचा यात्रा के दो दिन पहले रथ बन कर तैयार हो जाते हैं। यात्रा खत्म होने के बाद रथों को तोड़ दिया जाता है। पढ़ें पूरी खबर…

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