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संघ मनाएगा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस:18 भाषाओं के प्रतिनिधि करेंगे अपनी कला का प्रदर्शन, व्यंजनों के स्टॉल भी लगेंगे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 22 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाएगा। इस मौके पर 18 विभिन्न भाषाओं के प्रतिनिधि क्षेत्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे। 18 ही भाषाओं के प्रतिनिधियों द्वारा व्यंजनों एवं साहित्य के स्टॉल लगाए जाएंगे। डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति एवं भारतीय भाषा संवर्द्धन समिति के बैनरतले यह आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के संयोजक रवीन्द्र देशपांडे, सहसंयोजक अभयसिंह राठौड़ और अश्विन खरे ने बताया कि 22 फरवरी को सुबह 10 बजे से चिमनबाग मैदान के पास फुटबॉल ग्राउंड में कार्यक्रम होगा। इसमें करीब 18 भाषाई समाज (जैसे संस्कृत, निमाड़ी, मालवी, भीली, जनजाति, मैथिली, भोजपुरी, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, मारवाड़ी, सिंधी, गुजराती, नेपाली, हिंदी, गढ़वाली) शामिल होंगे। कार्यक्रम में मुख्यवक्ता के रूप में क्षेत्र संपर्क प्रमुख प्रवीण गुप्त, मुख्य अतिथि के रूप में प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) पी. नरहरि एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में रिटायर्ड मेजर जनरल सरबजीत सिंह देऊसी शामिल होंगे। भारतीय भाषा पर्व का यह आयोजन भाषाई विविधता के उत्सव और स्वभाषा के प्रति गौरव जगाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
फिल्म का कांग्रेस ने किया विरोध राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर बनी फिल्म पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने फिल्म में तथ्यों को तोड- मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है और कांग्रेस नेताओं को जिस तरह से फिल्म में दिखाया है, उसका विरोध किया है। कल फिल्म का प्रीमियर शो भी रखा गया था। कांग्रेस की ओर से फिल्म में आपत्तिजनक दृश्यों को काट छांट करने की अपील सेंसर बोर्ड से की गई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फिल्म आरएसएस का महिमामंडन करती है तो देश की युवा पीढ़ी को गुमराह करने के उद्देश्य से मनगढ़ंत और असत्य इतिहास प्रस्तुत कर रही है, जो अत्यंत आपत्तिजनक है। फिल्म में इंदिरा गांधी के नाम का दुरुपयोग कांग्रेस नेताओं का कहना है कि फिल्म में इंदिरा गांधी के नाम का दुरुपयोग किया गया है और यह बताया है कि गांधीजी की हत्या के दिन उन्होंने बयान दिया था कि हत्या में आरएसएस का हाथ है, जबकि ऐसा कोई बयान इतिहास में दर्ज नहीं है, वहीं महात्मा गांधी की हत्या के समय इंदिरा गांधी सरकार में किसी भी पद पर नहीं थीं। फिल्म के निर्माता-निर्देशक ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। कांग्रेस ने मांग की है कि फिल्म से सभी झूठे, मनगढ़ंत और भ्रम फैलाने वाले दृश्य हटाए जाएं। यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो कांग्रेस पार्टी अन्य वैधानिक एवं लोकतांत्रिक विकल्पों पर विचार करने के लिए बाध्य होगी।

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