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अमेरिका 250 साल के लिए टाइम कैप्सूल दफन करेगा:408 किलो वजन, इसमें व्हेल की हड्डी से AI की भविष्यवाणी तक; आखिर इसकी जरूरत क्यों

4 जुलाई को अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर 408 किलो का एक टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा। इसे फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में दफनाया जाएगा और 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा। इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि 250 साल बाद आने वाली पीढ़ियां इसे ढूंढ़ सकें और इसके बारे में जान सकें। इस कैप्सूल में 50 राज्यों और आम लोगों की ओर से चुनी गई यादगार चीजें रखी गई हैं, जिसमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा, AI की भविष्यवाणी और कई ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं। टाइम कैप्सूल बंद पेटी या कंटेनर होता है, जिसमें किसी दौर की चीजें सुरक्षित रखी जाती हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियां उस समय के समाज, तकनीक, संस्कृति और जीवन को समझ सकें। कैप्सुल सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई खास तकनीकें टाइम कैप्सूल बनाना जितना मुश्किल नहीं था, उससे बड़ी चुनौती उसे 250 साल तक सुरक्षित रखना था। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि जमीन के नीचे रखी चीजें ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित कैसे मिले। इस वजह से प्रोजेक्ट से जुड़े कई विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया गया। कई साल की रिसर्च के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जो पानी, नमी, जंग और मौसम के असर से कैप्सूल को बचा सके। यह कैप्सूल चौकोर नहीं, बल्कि बेलन (सिलेंडर) के आकार का है। वैज्ञानिकों के अनुसार चौकोर डिब्बों के कोने समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं और वहीं से पानी अंदर जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। टाइम कैप्सूल को कैसे सील किया गया? कैप्सूल को कार्यक्रम के दिन सील नहीं किया जाएगा। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है। 4 जुलाई को इसे सिर्फ फिलाडेल्फिया में जमीन के नीचे स्थापित किया जाएगा। कैप्सूल को सील करने के लिए खास धातु इंडियम का इस्तेमाल किया गया है। यह नरम धातु ढक्कन बंद करते समय छोटी-से-छोटी दरार भर देती है। इससे कैप्सूल पूरी तरह सील रहता है और अंदर रखा सामान लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। अगर कैप्सूल में बहुत ज्यादा नमी होती तो कागज और दूसरी वस्तुएं खराब हो सकती थीं। वहीं नमी पूरी तरह खत्म करने पर कुछ चीजें सूखकर टूट सकती थीं। इसलिए वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के अंदर 35% नमी रखी है। कैप्सूल को करीब 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा। इस गहराई पर तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है। तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड और सतह पर आने वाले तूफानों का असर भी बहुत कम पड़ता है। 250 साल तक न पानी पहुंचेगा, न जंग लगेगी वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन के नीचे रखे जाने वाले किसी भी टाइम कैप्सूल का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है। इसीलिए कैप्सूल के ऊपर एक और स्टील का सिलेंडर लगाया जाएगा। दोनों के बीच हवा की एक परत रहेगी, जो बाहर से आने वाले पानी को रोकने में मदद करेगी। यह ठीक उसी सिद्धांत पर काम करेगा, जैसे पानी में उल्टी बाल्टी डुबोने पर उसके अंदर हवा फंसी रहती है। अगर भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ जाए या बाढ़ आ जाए, तब भी बेल जार के भीतर मौजूद हवा पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी। इसे बनाने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला ने कहा, अगर इस टाइम कैप्सूल में पानी पहुंचा, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया शहर करीब 6 फीट पानी में डूब चुका है। और अगर ऐसा हुआ तो टाइम कैप्सूल नहीं, बल्कि पूरी दुनिया एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रही होगी। आखिर अमेरिका टाइम कैप्सूल क्यों दफना रहा है? भारत में भी दफनाया गया था टाइम कैप्शूल 1973 में आजादी के 25 साल पूरे होने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली के लाल किले के पास भारत का पहला सरकारी टाइम कैप्सूल दफन कराया था। इसका नाम ‘कालपात्र’ रखा गया। इसे 1000 साल बाद खोलने की योजना थी, ताकि भविष्य की पीढ़ियां जान सकें कि आजादी के बाद भारत ने कैसे सफर तय किया। इसमें संविधान की प्रति, स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद के भारत का विस्तृत इतिहास, सरकारी दस्तावेज और उस दौर की अहम जानकारियां रखी गई थीं। लेकिन यह कैप्सूल कभी भविष्य तक नहीं पहुंच सका। 1977 में केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद इसे जमीन से बाहर निकलवा लिया गया। नई सरकार का आरोप था कि इसमें इतिहास को तत्कालीन सरकार और नेहरू-गांधी परिवार के नजरिए से पेश किया गया है। इस वजह से इसे सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया गया। बाद में इसकी कुछ सामग्री संसद में दिखाई गई, लेकिन पूरा रिकॉर्ड कभी सार्वजनिक नहीं हुआ। आज भी इतिहासकारों के बीच इस बात पर बहस होती है कि ‘कालपात्र’ में वास्तव में क्या-क्या रखा गया था और वह अब किस सरकारी आर्काइव में सुरक्षित है। दुनिया में अब तक किन टाइम कैप्सूल को खोला गया, उनमें क्या निकला? 1. अमेरिका का 220 साल पुराना टाइम कैप्सूल यह टाइम कैप्सूल 1795 में अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन के कार्यकाल में मैसाचुसेट्स स्टेट हाउस की जमीन के नीचे रखा गया था। इसे 6 जनवरी 2015 को खोला गया। इसके अंदर चांदी और तांबे के सिक्के, पुराने अखबार, पदक, चांदी की एक पट्टिका और कई ऐतिहासिक दस्तावेज मिले। खास बात यह रही कि इनमें से ज्यादातर चीजें 220 साल बाद भी अच्छी हालत में थीं। 2. नॉर्वे का 100 साल पुराना रहस्यमयी पैकेट नॉर्वे के ओट्टा शहर में 1912 में तत्कालीन मेयर जोहान न्यागार्ड ने एक रहस्यमयी पैकेट सीलबंद कराया था और निर्देश दिया था कि इसे 100 साल बाद खोला जाए। इसे 2012 में खोला गया। लोगों को उम्मीद थी कि इसमें कोई बड़ा ऐतिहासिक रहस्य मिलेगा, लेकिन इसके अंदर पुराने अखबार, आधिकारिक दस्तावेज, पत्र और स्थानीय इतिहास से जुड़े रिकॉर्ड मिले। 3. बोस्टन का ‘गोल्डन लायन’ कैप्सूल साल 1901 में बोस्टन के ओल्ड स्टेट हाउस की छत पर बने एक तांबे के शेर के सिर के अंदर कैप्सूल को दफनाया गया था। इस कैप्सूल के बारे में लोग भूल चुके थे, इसे एक अफवाह माना जाता था। साल 2014 में जब शेर की मूर्ति की मरम्मत हुई, तो उसके सिर से एक डिब्बा निकला। उसमें से 1901 के राजनेताओं की तस्वीरें, तत्कालीन अखबार और खेल से जुड़ी मैग्जीन निकली। 3 चर्चित टाइम कैप्सूल, जो अभी तक नहीं खोले गए 1. क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन: 6,000 साल तक बंद रहेगा अमेरिका की ओगलथॉर्प यूनिवर्सिटी में यह टाइम कैप्सूल 1940 में सील किया गया था। इसे दुनिया का सबसे लंबे समय के लिए बनाया गया टाइम कैप्सूल माना जाता है। इसे सन 8113 में खोला जाएगा, यानी करीब 6,173 साल बाद। इसके अंदर 20वीं सदी की जिंदगी दिखाने वाली किताबें, फिल्में, ऑडियो रिकॉर्डिंग, घरेलू सामान, टाइपराइटर, बीयर की बोतल, टूथब्रश, डेंटल फ्लॉस और ‘गॉन विद द विंड’ फिल्म की मूल स्क्रिप्ट जैसी हजारों चीजें रखी गई हैं। 2. वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल: 5,000 साल बाद खुलेगा यह टाइम कैप्सूल 1938 में न्यूयॉर्क वर्ल्ड्स फेयर के दौरान जमीन में दफनाया गया था। इसके निर्माता जॉर्ज ई. पेंड्रे ने पहली बार ‘टाइम कैप्सूल’ शब्द का इस्तेमाल किया था। करीब 7.5 फीट लंबे इस कैप्सूल को खास तांबे की मिश्रधातु से बनाया गया, ताकि यह हजारों साल तक सुरक्षित रहे। इसमें बीज, कपड़े, कैन ओपनर, सिगरेट, समाचार की माइक्रोफिल्म, किताबें और 1930 के दशक की रोजमर्रा की चीजें रखी गई हैं। 1965 में इसके पास दूसरा कैप्सूल भी दफनाया गया। दोनों को सन 6938 में खोला जाएगा। 3. जापान का एक्सपो-70 टाइम कैप्सूल: हर 100 साल में जांच, लेकिन खुलेगा 6970 में जापान की ओसाका वर्ल्ड एक्सपो-1970 के दौरान पैनासोनिक और मैनिची न्यूजपेपर्स ने दो एक जैसे टाइम कैप्सूल तैयार किए। इन्हें 1971 में ओसाका कैसल के पास दफनाया गया। इनमें जापानी संस्कृति से जुड़ी वस्तुएं, साहित्य, वैज्ञानिक खोजें और उस दौर के आधुनिक आविष्कार रखे गए हैं। इनमें से एक कैप्सूल 6970 तक पूरी तरह बंद रहेगा, जबकि दूसरे को हर 100 साल में केवल उसकी स्थिति जांचने के लिए निकाला जाता है। इसे पहली बार 2000 में खोला गया था, लेकिन अंदर की चीजों को नहीं बदला गया। ————————————- ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 14 जून को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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