भारत की भाषाई विविधता, विलुप्त होती बोलियों और मातृभाषाओं के भविष्य पर देश के प्रसिद्ध भाषा-चिंतक प्रो. जी. एन. देवी 30 जून को भोपाल में व्याख्यान देंगे। ‘हम सब’ और गांधी भवन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “भारत : भाषाओं की भूमिका” रखा गया है। 700 से अधिक भाषाओं का तैयार किया दस्तावेज प्रो. जी. एन. देवी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और दस्तावेजीकरण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखते हैं। उन्होंने पीपुल्स लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया (PLSI) का नेतृत्व किया, जिसके तहत देश की 700 से अधिक जीवित भाषाओं और बोलियों का व्यापक दस्तावेज तैयार किया गया। इसे भारत की भाषाई विरासत को संरक्षित करने की सबसे महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित प्रो. देवी साहित्यकार, सांस्कृतिक चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। वे आदिवासी और घुमंतू समुदायों की भाषाओं के संरक्षण के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। उनके योगदान के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, प्रिंस क्लॉस अवॉर्ड, लिंग्वापैक्स पुरस्कार और पद्मश्री सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। इन मुद्दों पर होगी चर्चा आयोजकों के अनुसार व्याख्यान में भारतीय भाषाओं के सामने मौजूद चुनौतियों, नई शिक्षा नीति, मातृभाषा की भूमिका, भाषाई असमानता और तेजी से विलुप्त होती बोलियों पर विशेष चर्चा होगी। भाषा, शिक्षा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह व्याख्यान सभी नागरिकों के लिए खुला रहेगा। आयोजकों ने भाषा, साहित्य, शिक्षा और संस्कृति से जुड़े लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
