सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने निवाड़ी पहुंचे केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक को ज्ञापन दिया। संघ ने मांग की है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हो चुके अनुभवी शिक्षकों को इस पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से पूरी तरह छूट दी जाए। 25 साल की सेवा के बाद परीक्षा लेना अन्यायपूर्ण राज्य कर्मचारी संघ के निवाड़ी जिला अध्यक्ष महेश बिरथरे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और पुनर्विचार याचिका पर भी राहत न मिलने से प्रदेश सहित देशभर के लाखों शिक्षक अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक पिछले 20 से 25 वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, उन्हें अब इस उम्र में परीक्षा के दायरे में लाना मानसिक और व्यावहारिक रूप से न्यायसंगत नहीं है। प्रभावित शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू सरकारी नियमों के तहत ही हुई थीं। नौकरी जाने के डर से शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ेगा असर ज्ञापन में चेताया गया है कि यदि वर्षों से पढ़ा रहे ये अनुभवी शिक्षक इस परीक्षा में सफल नहीं हो पाते हैं, तो सीधे उनकी नौकरी पर संकट आ जाएगा। इससे न केवल लाखों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होगा, बल्कि स्कूलों की पूरी शैक्षणिक व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा जाएगी। संघ ने दलील दी कि भारत सरकार के साल 2010 के राजपत्र (गैजेट) में भी यह साफ था कि टीईटी (TET) के प्रावधान पहले से काम कर रहे शिक्षकों पर लागू नहीं होंगे। मानसून सत्र में अध्यादेश लाने की मांग “संसद में संशोधन लाकर गुरुजनों का सम्मान बचाए सरकार” राज्य कर्मचारी संघ ने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि संसद के आगामी मानसून सत्र में विशेष अध्यादेश या आवश्यक विधायी संशोधन लाया जाए। इस संशोधन के जरिए साल 2010 से पहले या वर्तमान तक नियुक्त हो चुके सभी शिक्षकों को हमेशा के लिए पात्रता परीक्षा से मुक्त किया जाए। जिला अध्यक्ष महेश बिरथरे के मुताबिक, संगठन को पूरी उम्मीद है कि केंद्र सरकार लाखों गुरुजनों की भावनाओं और उनकी दीर्घकालीन सेवाओं का सम्मान करते हुए जल्द ही कोई सकारात्मक कदम उठाएगी।
