मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर उज्जैन पहुंचे। यहां उन्होंने ‘सिंहस्थ-2016 का संकल्प, सिंहस्थ-2028 का संकल्प’ विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों, अधोसंरचना विकास और विभिन्न विभागों की कार्ययोजना को लेकर मंथन किया गया। मुख्यमंत्री सुबह करीब 11:25 बजे हेलीपेड पहुंचे, जहां से वे सीधे अंजूश्री होटल पहुंचे। कार्यक्रम में 2016 सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में पदस्थ रहे अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और आगामी सिंहस्थ की तैयारियों व चुनौतियों पर चर्चा की। उज्जैन संभाग के कमिश्नर आशीष सिंह ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर प्रेजेंटेशन दिया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए अधिकारी मौजूद रहे। पिछली बार कई जगह सड़कें जाम हुई थीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 विश्व का सबसे बड़ा मेला होगा। इसमें करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, इसलिए उसी स्तर की व्यवस्थाएं पहले से तैयार करनी होंगी। उन्होंने कहा कि पिछले सिंहस्थ में ट्रैफिक और आवागमन बड़ी चुनौती रहा था। पिछली बार कई जगह सड़कें जाम हुई थीं, इसलिए इस बार आसपास के राज्यों से भी समन्वय करना होगा ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर प्रबंधन हो सकें। सभी मंदिरों के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया सीएम ने कहा कि वर्ष 2016 में फतेहाबाद का रेलवे ट्रैक शुरू नहीं था, लेकिन अब यह सुविधा उपलब्ध है। आज ऐसा कोई मार्ग नहीं है जिसका चौड़ीकरण न हुआ हो। उन्होंने कहा कि उज्जैन देवताओं की नगरी है, श्रद्धालु केवल क्षिप्रा स्नान के लिए नहीं आएंगे, बल्कि पूरे शहर के धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे। इसलिए सभी मंदिरों के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया गया है। लोगों को निजी होटल-भवनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान सभी सरकारी व्यवस्थाएं मजबूत रहेंगी। लोगों को निजी होटल और भवनों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि उज्जैन से 100 किलोमीटर तक के मार्गों पर ढाबों और होटलों में भी व्यवस्थाएं बढ़ाने की तैयारी करनी होगी। सीएम ने कहा कि आसपास के राज्यों के साथ मिलकर योजना बनानी होगी। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से सिंहस्थ-2028 को बेहतर और ऐतिहासिक आयोजन बनाया जाएगा
