मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए प्रशासनिक तबादलों में कई विसंगतियां सामने आई हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग में नियमों की अनदेखी का खुलासा दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में भी हुआ था। स्टिंग में ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगते बाबू कैमरे में कैद हुए थे। भोपाल में 24 पटवारियों ने भी अपने तबादला आदेश निरस्त करवा लिए। नगरीय विकास एवं आवास विभाग में भी ऐसे अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए गए, जो कोर्ट से स्टे लेकर बैठे थे। एक सब-इंजीनियर का दो जगह तबादला कर दिया गया और रिटायरमेंट में दो महीने बचे अधिकारी को भी ट्रांसफर लिस्ट में शामिल किया गया। गड़बड़ियां सामने आने के बाद विभाग बैकफुट पर आया। 15 जून को तबादलों की मियाद एक दिन बढ़ाई गई थी। इसी दौरान विभाग ने 6 नए आदेश जारी कर 94 अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले निरस्त या संशोधित कर दिए। पढ़िए रिपोर्ट… कैसे नियमों को ताक पर रखा गया? 1. कोर्ट का स्टे होने के बावजूद कर दिए तबादले अनूपपुर की बनगवां राजनगर नगर परिषद् और शहडोल की बकहों नगर परिषद् में पदस्थ सहायक राजस्व निरीक्षक सहित 11 अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले कर दिए गए, जिन्होंने फर्जी नियुक्ति मामले में कोर्ट से स्टे ले रखा था। अनूपपुर जिले की नगर परिषदों बनगवां, डोला, बुढ़ार, जैतपुर और डूमलकछार में नियमों के विपरीत 271 अधिकारियों-कर्मचारियों की अवैध नियुक्तियां हुई थीं। इनमें 206 मस्टरकर्मी थे। शिकायत के बाद सभी को सेवा से हटा दिया गया था। इसके खिलाफ कई कर्मचारी कोर्ट पहुंचे, जहां 11 मामलों में नियुक्तियों और चयन सूची पर स्टे मिला था। इसके बावजूद 15 जून को इन 11 कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया। बाद में गड़बड़ी सामने आने और समयसीमा 24 घंटे बढ़ने पर इनके ट्रांसफर ऑर्डर निरस्त करने पड़े। 2. एक सब-इंजीनियर, दो जगह ट्रांसफर खंडवा जिले की छनेरा नगर परिषद में पदस्थ सब-इंजीनियर लोकेश रायकवार का तबादला एक साथ सीहोर और सरदारपुर कर दिया गया। बाद में पता चला कि सीहोर में कोई पद खाली नहीं है। इसके बाद वहां का आदेश निरस्त कर उन्हें सरदारपुर नगर परिषद् में पोस्टिंग दी गई। 3. रिटायरमेंट में बचे सिर्फ दो महीने, फिर भी चमका दी किस्मत भोपाल में पदस्थ कार्यपालन यंत्री प्रमोद मालवीय का रिटायरमेंट अगस्त 2026 में होना तय है। नियमों के मुताबिक, जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के रिटायरमेंट में 6 महीने या उससे कम समय बचा हो, उनका ट्रांसफर नहीं किया जाता। इसके बावजूद मालवीय का प्रतिनियुक्ति पर उज्जैन नगर निगम ट्रांसफर कर दिया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे रणनीति यह थी कि 2028 में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों के लिए अनुभवी अधिकारियों को सेवा विस्तार या संविदा नियुक्ति दी जाती रही है मालवीय को उज्जैन भेजने का मकसद भी रिटायरमेंट के बाद उन्हें एक्सटेंशन दिलाना था। इस फेरबदल में उज्जैन से संतोष गुप्ता की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें भोपाल नगर निगम भेज दिया गया। इंदौर नगर निगम के 14 सब-इंजीनियरों पर गिरी गाज ट्रांसफर लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा इंदौर नगर निगम की रही, जहां से 14 सब-इंजीनियरों को हटाया गया। इनमें से 12 इंजीनियर पिछले साल तबादले के बाद कोर्ट से स्टे लेकर इंदौर में ही बने हुए थे। इस बार विभाग ने सभी के लिए अलग-अलग आदेश जारी किए। आदेशों में उनकी “योग्यता और विशेष कौशल” के आधार पर अन्य नगर निगमों में प्रतिनियुक्ति का तर्क दिया गया। ये इंजीनियर 6 साल या उससे अधिक समय से इंदौर में पदस्थ थे। सब-इंजीनियर विनोद अग्रवाल 31 साल से इंदौर में पदस्थ थे, जिन्हें अब छिंदवाड़ा ट्रांसफर किया गया है। भोपाल में 24 घंटे में ही बदली पटवारी ट्रांसफर लिस्ट राजधानी भोपाल में पटवारियों की तबादला सूची 24 घंटे में बदल गई। कलेक्टर कार्यालय ने 15 जून को 46 पटवारियों के स्थानांतरण का आदेश जारी किया था। इनमें अधिकांश कर्मचारी 5 से 8 वर्षों से हुजूर और कोलार तहसीलों में पदस्थ थे। कुछ पटवारी अपनी गृह तहसील में भी कार्यरत थे। 16 जून को कैबिनेट बैठक के बाद समयसीमा बढ़ने पर नई सूची जारी हुई, जिसमें 46 में से 24 पटवारियों के नाम हटा दिए गए। संशोधित सूची में 30 पटवारी शामिल रहे, जिनमें बड़ी संख्या हुजूर और कोलार क्षेत्र की थी। आरोप हैं कि प्रभावशाली संपर्कों के जरिए कुछ पटवारियों ने अपने नाम हटवा लिए। पढ़ें पूरी खबर… ये खबर भी पढ़ें… मिनिस्टर के बंगले पर ट्रांसफर डील: ऑन कैमरा बाबू बोला- मंत्री, प्रभारी मंत्री सबका हिस्सा तबादलों के दौरान मंत्रियों के स्टाफ से लेकर बाबुओं तक पर रिश्वत की डील करने के आरोप सामने आए। दैनिक भास्कर के स्टिंग में मंत्री के बंगले पर स्टाफ सदस्य, वल्लभ भवन का एक बाबू और ऊर्जा विकास निगम का एक कर्मचारी ट्रांसफर के बदले लाखों रुपए मांगते और सौदेबाजी करते कैमरे में कैद हुए। पढ़ें पूरी खबर…
