25 करोड़ रुपए के रेती मंडी ब्रिज का काम पांच साल में 15 इंजीनियर्स ने देखा। नक्शा बनने से लेकर तैयार होने के बाद रंग-रोगन तक सभी ने कई बार निरीक्षण किए, फाइलें देखीं, मगर इतनी बड़ी चूक किसी को नजर नहीं आई। टर्न पर सिर्फ एक पिलर बना है, वह कैसे पूरे ब्रिज का लोड उठा पाएगा? भास्कर ने एक्सपर्ट के साथ एनालिसिस किया तो और भी कई खामियां सामने आईं। यहां तक कि निर्माण एजेंसी आरपी गुप्ता के पास भी अपनी डिजाइनर और इंजीनियर की टीम थी, जिसने साइट विजिट के बाद फाइनल ड्राइंग और डिजाइन तैयार की। जंक्शन हिस्से की चौड़ाई बढ़ाने के लिए ऊपरी स्लैब डालने के बाद हुए स्ट्रक्चरल ऑडिट में सामने आया कि नीचे अतिरिक्त पियर की जरूरत पड़ेगी। इनकी गलतियों से अब तीन महीने और परेशानी भुगतेगी जनता नुकसान क्या ? भास्कर एक्सपर्ट – एससी गर्ग, रिटायर्ड चीफ इंजीनियर एवं संदीप नरुलकर, सिविल इंजीनियरिंग प्रोफेसर, एसजीएसआईटीएस ब्रिज बनने के बाद नया पिलर डालना आसान नहीं, दूसरे पिलर को खतरा हो सकता है ब्रिज का काम लगभग पूरा होने के बाद क्यों ऑडिट कराया। ये काम डिजाइन फाइनल होने के समय करना था। स्ट्रक्चर बनने के बाद फाउंडेशन के लिए खुदाई होती है तो दिक्कत आ सकती है। ऊपर स्लैब से पियर कैप जोड़ना मुश्किल नहीं है, लेकिन अन्य पियर को नुकसान न हो इसका ध्यान रखना होगा। 1992-93 में अनूप नगर में एक बिल्डिंग की एक फाउंडेशन नहीं बनी थी। उसे बनाने के लिए जब खुदाई की गई तो पूरी बिल्डिंग गिर गई थी।
