बीना ब्लॉक अंतर्गत एकीकृत शासकीय माध्यमिक स्कूल ढांड में मिड-डे मील बच्चों को थाली में भोजन परोसने के बजाय हाथ में रोटियां थमा दी जाती हैं और सब्जी उनके घर से लाए खाली टिफिन में डाल दी जाती है। स्कूल में करीब 60 छात्र अध्ययनरत हैं, जिन्हें खाना खाने के लिए घर भेजा जाता है। छात्रों ने बताया कि पहले उन्हें स्कूल में ही थाली में भोजन परोसा जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था बदल गई है। उन्हें हाथ में रोटियां देकर कहा जाता है कि खाना ले जाओ। सब्जी टिफिन में डालने के बाद बच्चे घर जाकर भोजन करते हैं और फिर लगभग डेढ़ घंटे बाद स्कूल लौटते हैं। बच्चों को भोजन देकर घर भेजा जा रहा छात्राओं के अनुसार, यह अव्यवस्था पिछले कुछ सालों से चल रही है। मध्यान्ह भोजन का संचालन संगम स्व सहायता समूह करता है, लेकिन इसकी निगरानी व्यवस्था नहीं है। यह सवाल उठता है कि जब योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्कूल में बैठाकर सामूहिक भोजन कराना है, तो उन्हें घर भेजने की यह मजबूरी क्यों है? टीचर्स छुट्टी पर स्कूल के प्रधानाध्यापक शिव मोहन माथुर अपनी शादी के कारण अवकाश पर हैं, जबकि प्रभारी प्रजेश खरे की ड्यूटी बोर्ड परीक्षा में लगी हुई है। स्कूल में एक नियमित शिक्षिका और तीन अतिथि शिक्षक पदस्थ हैं, जिनमें से एक अतिथि शिक्षक भी छुट्टी पर हैं। ऐसे में बच्चों के भोजन और पढ़ाई की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, इस अव्यवस्था की सूचना अब तक वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई है, जिससे सुधार की कोई पहल नहीं हो पा रही है। पंचायत से बंटता है मध्यान्ह भोजन जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने बताया कि मध्यान्ह भोजन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संचालित नहीं किया जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों को करा चुका हूं अवगत इस संबंध में प्रधानाध्यापक शिव मोहन माथुर ने बताया कि थाली में खाना देने के लिए मैंने कई बार समूह को बोला है। लेकिन वह थाली में खाना क्यों नहीं दे रहे हैं, यह मुझे नहीं पता है। इस संबंध में मैंने अपने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत करा चुका हूं।
