सिंगरौली जिले के जिला अस्पताल स्थित शाह ट्रॉमा सेंटर में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। सोमवार को सामने आए एक वीडियो में करीब 15 वेंटिलेटर और अन्य मेडिकल उपकरण कबाड़ की तरह अव्यवस्थित पड़े दिखाई दिए। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब गंभीर मरीजों को अक्सर इलाज के लिए वाराणसी या अन्य बड़े शहरों में रेफर किया जाता है। सामने आए वीडियो में ट्रॉमा सेंटर के भीतर रखे गए वेंटिलेटर धूल से सने और अस्त-व्यस्त हालत में मिले। इन उपकरणों की दयनीय स्थिति देखकर लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की है। कोरोना के टाइम पर मिले थे जिला अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. कल्पना रवि ने बताया कि वीडियो में दिख रहे वेंटिलेटर और बेड कोविड महामारी के दौरान प्राप्त हुए थे। वर्तमान में उनका उपयोग नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें एक स्थान पर रखा गया था। डॉक्टर ने यह भी स्वीकार किया कि स्टाफ द्वारा इन उपकरणों को व्यवस्थित तरीके से नहीं रखा गया था। उन्होंने इसे लापरवाही की श्रेणी में आने वाली चूक बताया। करीब दो करोड़ का सामान बना कबाड़ स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एक वेंटिलेटर की अनुमानित कीमत 8 से 15 लाख रुपये तक होती है। इस हिसाब से ट्रॉमा सेंटर में पड़े 15 वेंटिलेटरों का कुल मूल्य लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। इतने महंगे और महत्वपूर्ण उपकरणों के उपयोग में न आने और अव्यवस्थित पड़े रहने से सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्टोर रूम की अन्य तस्वीरें…
