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इंदौर के नवकारसी विवाद ने पकड़ा तूल:सोशल मीडिया पर कोल्ड वार, आचार्य मुक्तिसागर सूरि बोले- कब तक यूं झगड़ते रहेंगे?

महावीर जन्म कल्याणक दिवस पर आयोजित नवकारसी कार्यक्रम में व्यवधान को लेकर शुरू हुआ विवाद थम नहीं रहा है। श्वेतांबर जैन समाज के विभिन्न धड़ों में यह मुद्दा चर्चा में है। महासंघ को भेजे गए मानहानि नोटिस के बाद विवाद और गहरा गया है। विवाद के करीब 29 दिन बाद जारी महासंघ के स्पष्टीकरण ने स्थिति स्पष्ट करने के बजाय नए सवाल खड़े कर दिए हैं। समाज के कई वर्गों का मानना है कि इस वक्तव्य में अपेक्षित संतुलन, संवेदनशीलता और आत्ममंथन का अभाव रहा। स्पष्टीकरण की भाषा और समय को लेकर भी असंतोष सामने आया है, जिससे महासंघ की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं। सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस यह मुद्दा अब सोशल मीडिया के विभिन्न समूहों में भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। समाजजनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप, प्रतिक्रियाएं, अपील और समझाइश का सिलसिला जारी है, जिससे विवाद और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आचार्य मुक्तिसागर सूरि की एंट्री, शांति की अपील विवाद को शांत करने के प्रयास में जैन संत आचार्य मुक्तिसागर सूरि ने समाज के सोशल मीडिया ग्रुप में हस्तक्षेप करते हुए दोनों पक्षों से संयम और संवाद का आग्रह किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि महावीर जन्म कल्याणक जैसे पवित्र अवसर से जुड़ा विवाद एक महीने बाद भी थम नहीं रहा, जो चिंताजनक है। उन्होंने समाज को भगवान महावीर के क्षमा और सहिष्णुता के सिद्धांतों का पालन करने की सलाह दी। क्षमा ही धर्म का आभूषण आचार्य ने अपने संदेश में कहा कि समाज में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन समाधान का मार्ग संघर्ष नहीं, बल्कि क्षमा और संवाद है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे शरीर के अंग आपस में टकराने पर भी हम उन्हें दंडित नहीं करते, उसी तरह समाज के भीतर भी आपसी समझ और सहनशीलता जरूरी है। एकता का आह्वान, भविष्य के लिए सुझाव आचार्य मुक्तिसागर सूरि ने दोनों पक्षों से आपसी मतभेद भुलाकर समाजहित में कार्य करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में सभी जैन संप्रदाय मिलकर एकजुट होकर आयोजन करें, ताकि देश और दुनिया में एकता का संदेश जाए। नेतृत्व और कार्यशैली पर उठे सवाल इस पूरे विवाद ने महासंघ नेतृत्व की कार्यशैली को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। समाज के एक वर्ग का मानना है कि समय पर संवाद और समन्वय के अभाव ने विवाद को बढ़ाया। साथ ही, ‘एकला चलो’ जैसी कार्यशैली और परामर्श की कमी को लेकर भी असंतोष सामने आया है। गुटबाजी और आंतरिक राजनीति की चर्चा श्वेतांबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन की आंतरिक राजनीति और गुटबाजी को भी विवाद का एक कारण माना जा रहा है। समाज में यह धारणा बन रही है कि संगठनात्मक वर्चस्व की होड़ ने सामाजिक समरसता को प्रभावित किया है। यह है मामला महावीर जन्म कल्याणक के दिन नवकारसी आयोजन में ट्रैक्टर खड़े होने से उत्पन्न विवाद वाहन चालक की वजह से हुआ था। इस घटना को लेकर इवेंट कंपनी के संचालक ने लिखित में अपनी गलती स्वीकार करते हुए श्री नाकोड़ा जैन कॉन्फ्रेंस के समक्ष माफी भी मांगी थी। इसके बावजूद 29 दिनों बाद आरोपों का उल्लेख करते हुए पत्र जारी करना दुर्भावनापूर्ण और पूर्वनियोजित बताया गया है। इसी बात को लेकर नाकोड़ा जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अक्षय जैन ने महासंघ को 50 लाख के मानहानि का नोटिस जारी किया है। समाज के वरिष्ठ सुभाष विनायका का कहना है कि यह विवाद पांच मिनट के अंदर समापन हो जाता। कुछ अहंकार से भरे हुए जो लोग हैं, जिनको ऐसा लगता है कि समाज मेरे ही वजह से चल रहा है, उन्होंने इस मुकाम को बहुत लंबाई तक पहुंचा दिया है और यह समाज के हित में नहीं है। एडवोकेट दिलीप सिसोदिया ने अपील की है कि महावीर जन्म कल्याणक के अवसर पर नवकारसी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरे जैन समाज की एकता और सौहार्द के लिए चिंता का विषय बन गया है। दोनों पक्षों से विनम्र निवेदन है कि अहं त्यागकर संवाद और समन्वय के माध्यम से समाधान निकालें।

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