केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देश की प्रमुख ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने 12 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। ग्वालियर में भी ट्रेड यूनियनों से जुड़े नेताओं ने साफ कहा है कि वे श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ आखिरी सांस तक संघर्ष करेंगे। इसी क्रम में भारत बंद से एक दिन पहले बुधवार शाम को ट्रेड यूनियन, सीटू और किसान संगठनों ने ग्वालियर के तीनों शहर लश्कर, मुरार और उपनगर ग्वालियर में मशाल जुलूस निकाले। गुरुवार दोपहर 12 बजे फूलबाग स्थित महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के सामने विभिन्न ट्रेड यूनियनों के सदस्य एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच का दावा है कि इस आंदोलन में करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल होंगे, जिससे यह देश की सबसे बड़ी हड़तालों में शामिल हो सकती है। बुधवार रात निकाले गए मशाल जुलूस भारत बंद से पहले बुधवार को लश्कर, मुरार और उपनगर ग्वालियर में मशाल जुलूस निकाले गए। सीटू के जिला महासचिव भगवानदास सैनी ने बताया कि लश्कर में जुलूस का नेतृत्व किसान नेता जसविंदर सिंह, सीटू नेता मनोज शर्मा, अंगद सिंह और ऐक्टू के मयंक रावत ने किया। उपनगर ग्वालियर में हजीरा से निकाले गए मशाल जुलूस का नेतृत्व सीटू के वरिष्ठ नेता रामविलास गोस्वामी और इंटक नेता राजेंद्र सिंह नाती ने किया। इस दौरान सीटू के कार्यकारी जिला अध्यक्ष किशन बघेल, इंटक के अशोक गोस्वामी, तुलसी आर्य, विनोद कुशवाहा, खेत मजदूर यूनियन के नेता रामबाबू जाटव, सोबरन सिंह और महिला नेता प्रीति सिंह सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। हजीरा चौराहे पर हुई सभा लश्कर और उपनगर के अलावा मुरार में भी मशाल जुलूस निकाला गया। मुरार में जुलूस का नेतृत्व किसान नेता रामकिशन सिंह कुशवाहा, एनडी तिवारी, आरडी चोपड़ा, एटक के अशोक पाठक, हरिशंकर माहौर, कौशल शर्मा, एआईयूटीयूसी के रुपेश जैन और राय सिंह ने किया। मशाल जुलूस के बाद हजीरा चौराहे पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सीटू नेता रामविलास गोस्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां देश की संप्रभुता और श्रमिक हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने आमजन से भारत बंद में सहयोग की अपील की। गुरुवार को फूलबाग में मुख्य सभा ट्रेड यूनियनों ने आम मजदूरों से अपील की है कि वे अपने-अपने काम बंद कर गुरुवार दोपहर 12 बजे फूलबाग पहुंचें। फूलबाग में महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा के सामने हड़ताली कैंप लगाया जाएगा, जहां आंगनबाड़ी, आशा-उषा कार्यकर्ता, निजी कारखानों के मजदूर और विभिन्न शासकीय व आउटसोर्स कर्मचारी शामिल होंगे। सभा को बैंक, बीमा, बीएसएनएल और रेलवे कर्मचारी संगठनों के नेता भी संबोधित करेंगे। विरोध का कारण ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां श्रमिकों और किसानों के हितों के विपरीत हैं और कॉर्पोरेट कंपनियों के पक्ष में बनाई जा रही हैं। नेताओं का कहना है कि रोजगार सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन और श्रम कानूनों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की उदासीनता के कारण संयुक्त आंदोलन जरूरी हो गया है। इन सेवाओं पर पड़ेगा असर भारत बंद के दौरान बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है, जिससे बस, ऑटो और स्थानीय यातायात बाधित हो सकता है। सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज ठप रहने के संकेत हैं। हालांकि स्वास्थ्य, आपातकालीन सेवाएं, बिजली-पानी और सुरक्षा व्यवस्था सामान्य रहने की उम्मीद है।
