विधानसभा के विशेष सत्र में सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन’ अधिनियम के क्रियान्वयन को लेकर लाया गया शासकीय संकल्प भारी हंगामे और लंबी बहस के बाद पारित हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से पेश किए गए इस संकल्प ने सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच युद्ध छेड़ दिया। सीएम ने कहा कि कांग्रेस ने 55 साल पहले परिसीमन को ‘सीज’ कर दिया था, जिसके कारण देश की आधी आबादी आरक्षण से वंचित रही। आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संसद में संशोधन विधेयक का समर्थन न कर महिलाओं से विश्वासघात किया। विपक्ष के हंगामे पर सीएम बोले- जोर-जोर से चिल्लाकर डराना चाहते हो। हम यहां पर भी निपटना जानते हैं और मैदान में भी। सरकार का रिपोर्ट कार्ड: महिला केंद्रित योजनाएं
मुख्यमंत्री ने महिला उत्थान के लिए किए काम का ब्योरा दिया- कांग्रेस- आज ही लागू करें, 2029 का इंतजार क्यों? सदन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए कई गंभीर सवाल उठाए। विपक्ष का मुख्य तर्क यह था कि जब कानून बन चुका है, तो इसे जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों में क्यों उलझाया जा रहा है? उन्होंने मांग की कि वर्तमान की 543 लोकसभा और 230 विधानसभा सीटों पर ही आज से ही 33% आरक्षण लागू किया जाए।
कांग्रेस ने ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण के भीतर कोटा निर्धारित करने की मांग की। विपक्ष ने कहा कि जनगणना और परिसीमन की समय-सीमा तय किए बिना यह संकल्प ‘खोखला आश्वासन’ है। विधायक अजय सिंह और बाला बच्चन जैसा वरिष्ठ नेताओं ने इसे ‘पोस्ट-डेटेड चेक’ करार दिया। विशेष सत्र… साढ़े नौ घंटे सिर्फ महिलाओं पर बहस
विधानसभा में साढ़े नौ घंटे तक गहन चर्चा हुई, जिसमें से 8 घंटे महिला आरक्षण के तकनीकी व राजनीतिक पहलुओं पर केंद्रित रहे। आरक्षण के बाद संभावित तस्वीर
