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छत्तीसगढ़ प्लांट हादसे में एक और मौत,24 की जान गई:उद्योगपति नवीन जिंदल बोले- अनिल अग्रवाल पर FIR चिंता का विषय, पहले जांच होनी चाहिए

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता प्लांट हादसे में मौत का आंकड़ा बढ़कर 24 तक पहुंच गया है। रविवार सुबह एक और घायल मजदूर ने रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया। हादसे में कुल 36 मजूदर झूलसे थे। 12 घायलों का इलाज अभी जारी है। शुरूआती जांच में मेंटेनेंस को लेकर लापरवाही सामने आई है। वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 10 लोगों के खिलाफ डभरा थाने में FIR दर्ज हुई है। इस कार्रवाई पर उद्योगपति नवीन जिंदल ने सवाल उठाए हैं। नवीन जिंदल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जांच से पहले अनिल अग्रवाल का नाम FIR में शामिल करना गंभीर चिंता का विषय है। पहले घटना की जांच होनी चाहिए, सबूतों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं प्लांट के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संभाल रही NGSL की भूमिका अब जांच के केंद्र में है। NGSL, एनटीपीसी और जीई पावर इंडिया लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है, जिसमें दोनों की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। घटना से जुड़ी ये तस्वीरें देखिए… 24 घंटे में 3 घायल मजदूरों ने तोड़ा दम शनिवार को रायपुर के कालड़ा हॉस्पिटल में 2 घायलों की इलाज के दौरान जान चली गई। इनमें उमेंद्र शाह और मध्यप्रदेश के रहने वाले किस्मत अली शामिल है। वहीं, शुक्रवार को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में एडमिट बंगाल के मजदूर सुब्रोतो जेना (80-90% झुलसे) ने भी दम तोड़ दिया था। गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद हुई FIR 14 अप्रैल को हुए हादसे के बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता और उनकी टीम ने 15 अप्रैल को घटना स्थल की जांच की। एसपी प्रफुल्ल ठाकुर को सौंपी गई शुरूआती जांच रिपोर्ट में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई थी। जिसके बाद FIR की कार्रवाई की गई। नवीन जिंदल बोले- पहले जांच होनी चाहिए उद्योगपति नवीन जिंदल ने अनिल अग्रवाल पर FIR होने पर सवाल उठाए। उन्होंने एक्स पर लिखा कि पहले घटना की जांच होनी चाहिए और सबूतों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। जब सरकारी कंपनियों या रेलवे में घटनाएं होती हैं, तो क्या हम चेयरमैन का नाम लेते हैं? नहीं। यही मानक निजी क्षेत्र पर भी लागू होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने घटना पर दुख जताया। जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में सिंघीतराई प्रोजेक्ट में NGSL की टीम तैनात है, जिसमें प्रोजेक्ट हेड और साइट इंचार्ज के रूप में राजेश सक्सेना कार्यरत हैं। वे वरिष्ठ महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी हैं। वेदांता प्रबंधन और NGSL कॉर्पोरेट ऑफिस के बीच समन्वय की मुख्य कड़ी माने जाते हैं। यूनिट-1 के दैनिक संचालन की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी। इसके अलावा मेंटेनेंस टीम बॉयलर, टरबाइन और अन्य सहायक उपकरणों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार थी। ऐसे में ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़े सभी अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है। सुरक्षा और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी NGSL के पास जानकारी के अनुसार, वेदांता ने पिछले साल एनजीएसएल को संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसमें मशीनों की नियमित निगरानी, तकनीकी खामियों की समय पर पहचान और सुधार, सुरक्षा मानकों का पालन और कर्मचारियों और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था। औद्योगिक सुरक्षा विभाग के सहायक संचालक अश्विनी पटेल ने बताया कि सिंघीतराई प्लांट में ऑपरेशन और मेंटेनेंस का कार्य NGSL द्वारा किया जा रहा था। वहीं वेदांता कंपनी के PRO दीपक विश्वकर्मा ने भी पुष्टि की है कि बॉयलर यूनिट-1 की जिम्मेदारी NGSL के पास थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उठाए सवाल वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने FIR को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा- वेदांता प्लांट दुर्घटना में FIR की खबर तो है। लेकिन पत्रकारों की ओर से पुलिस से FIR की कॉपी मांगने पर कहा जा रहा है कि ‘ऊपर’ से मना किया गया है, आप लोग ‘रायपुर’ में बात कर लीजिए। यह ‘ऊपर’ कौन है? ‘रायपुर’ में किससे बात करनी है? शुरुआती जांच में क्या लापरवाही सामने आई औद्योगिक सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि बॉयलर फर्नेस के अंदर ज्यादा मात्रा में फ्यूल जमा हो जाने के कारण तेज प्रेशर बना। दबाव के कारण बॉयलर का निचला पाइप अपनी निर्धारित स्थिति से हट गया। जिस वजह से ब्लास्ट हुआ। FSL की रिपोर्ट में भी यही कारण बताया गया है। जांच में यह भी पाया गया कि मशीनों के रखरखाव और संचालन में लापरवाही बरती गई। एसपी के निर्देश पर एएसपी पंकज पटेल के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई है, जो पूरे मामले की जांच कर रही है। दबाव 1 से 2 सेकेंड के अंदर बढ़ा विभाग के अनुसार, हादसा 14 अप्रैल को दोपहर 2:33 बजे हुआ। उस समय 2028 टीपीएच क्षमता वाले विशाल वाटर ट्यूब बॉयलर में फर्नेस प्रेशर (भट्ठी का दबाव) तेजी से बढ़ा। यह दबाव 1 से 2 सेकेंड के अंदर बढ़ा, जिससे सिस्टम को बंद करना या किसी तकनीकी खराबी को रोकना संभव नहीं था। दबाव इतना तेज था कि अंदरूनी विस्फोट हुआ और इसकी चपेट में बाहरी पाइपलाइन भी आ गई। जांच में सामने आया है कि, 1 घंटे में दोगुना उत्पादन करने के लिए बॉयलर का लोड तेजी से बढ़ाया गया। लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया। यह वृद्धि बहुत कम समय में की गई। इसके साथ ही पीए फैन में बार-बार खराबी, अनबर्न फ्यूल से प्रेशर बनना, पाइपिंग सिस्टम का फेल होना और बेकअप का समय पर काम नहीं करने का भी जिक्र है। कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने भी मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। 30 दिन के अंदर इसकी रिपोर्ट भी मांगी गई है। इन बिंदुओं पर होगी मजिस्ट्रियल जांच ग्राफिक से समझें बॉयलर कैसे करता है काम मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा वेदांता प्रबंधन ने मृतक परिजन को 35-35 लाख रुपए सहायता राशि और नौकरी देने का ऐलान किया है। घायलों को 15-15 लाख रुपए दिए जाएंगे। इससे पहले PMO ने मुआवजे की घोषणा की थी। PMNRF से हर मृतकों के परिवार वालों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मृतकों के परिवार वालों को 5-5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। ग्राफिक से समझिए बॉयलर ब्लास्ट क्या होता है- हादसे से जुड़ी और तस्वीरें देखिए… ………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रायगढ़ कार्बन प्लांट हादसा…मासूम बच्ची समेत 4 मौतें: पति-ससुर ने तोड़ा दम, 3 महीने पहले ही एक बेटी खोई थी, युवक की भी गई जान अस्पताल के वार्ड में गूंजती एक महिला की चीखें और पास खड़ी नर्स उसे संभालने की कोशिश करती रहीं, लेकिन उसका दर्द किसी के बस में नहीं था। उसने अपनी 9 महीने की दूधमुंही बच्ची और पति को खो दिया। वहीं बुधवार दोपहर घालय ससुर ने भी दम तोड़ दिया है। पढ़ें पूरी खबर

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