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ग्वालियर में 354-नाबालिग मां! सरकार कह रही बाल-विवाह बंद हैं:नाबालिग मांओं से मिली भास्कर रिपोर्टर… 13 से 16 में शादी, 16 से 19 में बनी मां

जिले का ग्रामीण अंचल… यहां सरकारी फाइलों में बाल विवाह ‘शून्य’, लेकिन हकीकत बेहद डरावनी है। प्रशासन की नाक के नीचे एक पूरी पीढ़ी का बचपन गुपचुप बलि चढ़ गया। जिम्मेदार विभाग जीरो बाल विवाह के खोखले पाखंड में डूबे रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग 54 शादियां रोकने का ढिंढोरा पीट रहा है। लेकिन भास्कर की पड़ताल ने इस झूठ की पोल खोल दी। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच जिले के 300 गांवों 354 लड़कियां ऐसी मिलीं, जो नाबालिग उम्र में मां बन चुकी हैं। जिस उम्र में स्कूल की घंटी सुनना थी, वहां बच्चों के रोने की आवाजें हैं। हाथ में बस्ता होना था, पर वहां कच्ची उम्र की जिम्मेदारियां हैं। भास्कर की जिले के 10 गांव की पड़ताल में सामने आए इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग की मिलीभगत बेनकाब कर दी है। हैरानी देखिए। ये नाबालिग लड़कियां प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों तक पहुंचीं। इनका नाम टीकाकरण रजिस्टर में दर्ज हुआ। फिर भी न आंगनबाड़ी की नींद टूटी, न स्वास्थ्य विभाग के मैदानी जासूसों ने इन्हें रोका। 354 नाबालिग माताओं का यह आंकड़ा ग्वालियर के सिस्टम की आपराधिक लापरवाही है। भास्कर की पड़ताल साबित करती है कि कागजों पर कानून की लाज बचा ली गई, पर हकीकत में सैकड़ों मासूमों का बचपन लुटने के लिए छोड़ दिया गया। गांवों में छुपी ‘नाबालिग मां’ की कहानियां… जो दावों की पोल खोल रहीं अनीता (परिवर्तित नाम): उम्र बढ़ाकर करानी पड़ी डिलीवरी… 14 साल की उम्र में शादी और 17 में मां बनने का सफर अनीता के लिए मजबूरी भरा रहा। 5वीं के बाद पढ़ाई छूट गई, क्योंकि चार बहनों और छोटे भाई की जिम्मेदारी उसी पर आ गई। नाबालिग होने के कारण अस्पताल में डिलीवरी में दिक्कत आई, तो आधार कार्ड में उम्र बढ़वानी पड़ी। अब 4 माह के बच्चे को संभालते हुए बोली ‘मैं नहीं पढ़ पाई, पर मेरा बच्चा जो बनना चाहेगा, उसके लिए सब करूंगी।’ राधिका (परिवर्तित नाम): 14 की उम्र में शादी करा दी। 16 की उम्र में मां बन गईं। छोटी उम्र में ससुराल और जिम्मेदारियों से वह घबरा गईं। अब कहती है ‘बेटी जितना पढ़ना चाहेगी, उसे पढ़ाऊंगी’ सकीना (परिवर्तित नाम): गुड्डा-गुड़िया खेलते-खेलते खुद दुल्हन बनी… सकीना (16 उम्र) सहेलियों के साथ गुड्डा-गुड़िया की शादी खेलती थी, लेकिन उस दौर में ही उसकी शादी करा दी गई। गरीबी के कारण पढ़ाई छूटी गई। शादी तय होने पर बहुत रोई। गर्भवती हुई तो मन में डर के बीच 17 की उम्र में वह मां बन गई। कम उम्र में पैदा हुआ बेटा ही अब उसकी दुनिया है। वह कहती है ‘मैं पढ़ना चाहती थी, पर नहीं पढ़ पाई। बेटे को डॉक्टर बनाऊंगी।’ हमने बाल विवाह का कोई केस दर्ज नहीं कराया है। मेरे पास सटीक आंकड़े नहीं हैं। कार्रवाई करना पुलिस का काम है। हम जागरूक करते हैं। दस्तावेजों में उम्र बढ़ाना गंभीर मामला है। आप रिपोर्ट दें, प्रशासन के संज्ञान में रखूंगी।’ -उपासना राय, जिला महिला बाल विकास अधिकारी

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