आज 19 अप्रैल को ‘वर्ल्ड लिवर डे’ है। इंदौर में आयोजित “जीवन का उत्सव” कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उम्मीद, साहस और मानवता का जीवंत उदाहरण बन गया। ‘लिवर से गुफ्तगू एक कप कॉफी के साथ’ थीम पर आधारित इस विशेष कार्यक्रम में लिवर ट्रांसप्लांट रिसिपिएंट और निस्वार्थ भाव से लिवर डोनेट करने वाले दाताओं को एक मंच पर आमने-सामने लाया गया। यहां साझा हुईं कहानियां सुनकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं। इस वर्ष विश्व लिवर दिवस 2026 की थीम “Solid Habits, Strong Liver” है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट एवं लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अजय के जैन ने कहा कि वर्तमान जीवनशैली, अनियमित खानपान और शराब सेवन के कारण लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि जब लिवर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है, तब ट्रांसप्लांट ही अंतिम और प्रभावी विकल्प बचता है। ऐसे समय में अंगदान ही मरीजों की एकमात्र उम्मीद बनता है। डॉ. सुधांशु यादव ने कहा कि जब लोग सीधे मरीजों और डोनर परिवारों से उनकी कहानी सुनते हैं, तो अंगदान को लेकर विश्वास बढ़ता है और सोच बदलती है। यदि कैडेवर डोनेशन बढ़े, तो हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। मां ने दिया जीवन का सबसे अनमोल उपहार कार्यक्रम में पांच साल का मिहिर भी शामिल हुआ, जिसे उसकी मां पिंकी ने अपने लिवर का हिस्सा दान कर नई जिंदगी दी। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की हालत गंभीर थी और ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। मां ने बिना देर किए लिवर दान का निर्णय लिया। सफल सर्जरी के बाद आज बच्चा सामान्य जीवन जी रहा है। हर साल 50 हजार मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत डॉ. शोहिनी सिरकार और डॉ. सुचिता जैन ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 50 हजार मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन केवल 5 हजार ट्रांसप्लांट ही हो पाते हैं। काउंसलर देबी चटर्जी ने कहा कि जागरूकता की कमी, अंधविश्वास, सीमित सुविधाएं और खर्च इसके प्रमुख कारण हैं। ज्यादातर ट्रांसप्लांट लिविंग डोनर से होते हैं, जबकि कैडेवर डोनेशन की संख्या बहुत कम है। 62 साल की उम्र में मिला नया जीवन एडवोकेट मस्तान सिंह छाबड़ा (62) ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2020 में अचानक खून की उल्टी होने पर जांच कराई तो लिवर कैंसर का पता चला। डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी। आरएफए प्रक्रिया के जरिए कैंसर को नियंत्रित किया गया और उन्होंने कैडेवर ट्रांसप्लांट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। आश्चर्यजनक रूप से केवल तीन दिन में वर्ष 2021 में उनका नंबर आ गया और सफल सर्जरी हो सकी। उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद एक वर्ष तक सख्त परहेज और डॉक्टरों के निर्देशों का पालन किया। आज वे सामान्य जीवन जी रहे हैं और नियमित व्यायाम करते हैं। उन्होंने अपील की कि लोग हेल्दी भोजन, नियमित जांच और एक्सरसाइज को जीवन का हिस्सा बनाएं। अंधविश्वास ने रोकी सांसें, काउंसलिंग से मिली जिंदगी 49 वर्षीय सुनील मेहरा को लिवर सिरोसिस था। डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी। उन्होंने दिल्ली और इंदौर में कैडेवर डोनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। पत्नी मीनाक्षी ने बताया कि उन्होंने दिल्ली और इंदौर में कैडेवर ट्रांसप्लांट के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया। करीब दो साल इंतजार के बाद जब उनका नंबर आया, तब डोनर परिवार की ओर से असमंजस की स्थिति बनी रही। ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की गई और करीब आठ साल पहले उनका सफल ट्रांसप्लांट हुआ। उन्होंने लोगों से अपील की कि अंगदान के लिए आगे आएं, क्योंकि कैडेवर डोनेशन से किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन मिल सकता है और किसी का प्रियजन दूसरे के भीतर जीवित रह सकता है। सुनील स्वयं एक लिवर ट्रांसप्लांट सर्वाइवर हैं और इस विषय पर एक पुस्तक लेखन पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभ साझा करते हुए कहा किअंगदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि अंगदान केवल जीवन बचाता नहीं, बल्कि कई जिंदगियों में उम्मीद जगाता है। हम सभी हमेशा जीवित नहीं रह सकते, लेकिन अंगदान के माध्यम से हम किसी और के भीतर हमेशा धड़क सकते हैं। ये खबर भी पढ़ें… जबलपुर की मुस्कान को चाहिए मदद जबलपुर के सिविल लाइन में रहने वाली 25 वर्षीय मुस्कान बर्मन का लिवर खराब हो गया है। 2021 में जब उसे पता चला कि वह इस बीमारी का शिकार हो गई, तब भी उसने हिम्मत नहीं हारी। एसपी की पाठशाला भी ज्वाइन की और क्लास भी जाती रही। जैसे-जैसे उसकी तकलीफ बढ़ती गई पढ़ाई और नौकरी दोनों से दूर हो गई।पूरी खबर पढ़ें
