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सरगुजिहा बोलने पर नहीं दिया एडमिशन, स्कूल को नोटिस:DEO बोले- क्यों न स्वरंग किड्स एकेडमी को बंद करें; दूसरे ने फ्री में दिया प्रवेश

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में प्री-प्राइमरी स्कूल स्वरंग किड्स एकेडमी में सरगुजिहा बोली बोलने पर जिस बच्चे को एडमिशन नहीं दिया, उसे बचपन प्ले स्कूल ने फ्री में एडमिशन दिया है। जबकि डीईओ ने स्वरंग किड्स एकेडमी को नोटिस जारी कर कहा कि, क्यों न आपकी संस्था को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाए। एडमिशन नहीं मिलने पर परिजनों ने कलेक्टर अजीत वसंत से शिकायत की थी। जिस पर कलेक्टर ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा था कि, यदि सरगुजिहा बोलने पर स्कूल में एडमिशन नहीं मिला तो ऐसे स्कूल को बंद कर देना चाहिए। NSUI ने भी स्कूल का पंजीयन रद्द करने की मांग की है। पहले देखिए ये तस्वीरें… जानिए क्या है पूरा मामला जानकारी के मुताबिक, राजकुमार यादव अपने बेटे सत्यम (4) का एडमिशन कराने चोपड़ापारा में संचालित प्री प्राइमरी स्कूल स्वरंग किड्स एकेडमी पहुंचे। एडमिशन से पहले स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर्स ने बच्चे से कुछ सवाल पूछे तो उसने सरगुजिहा बोली में जवाब दिया। इसके बाद प्रिंसिपल ने बच्चे को डेमो क्लास में भेजने कहा। पेरेंट्स के अनुसार डेमो क्लास के बाद स्कूल ने यह कहते हुए बच्चे का नर्सरी में एडमिशन लेने से इनकार कर दिया, यहां बड़े घरों के बच्चे पढ़ते हैं। वे आपके बच्चे की भाषा सीख जाएंगे, इसलिए उसे एडमिशन नहीं दे सकते। स्कूल में एडमिशन लेने से इनकार करने पर राजकुमार यादव परेशान हो गए।
राजकुमार यादव ने बताया कि, घर में सभी लोग सरगुजिहा बोली में ही बात करते हैं। इस कारण बेटा सत्यम सिर्फ सरगुजिहा जानता है। उसे उम्मीद थी कि स्कूल में एडमिशन मिलने पर वह हिंदी सीख जाएगा। इसलिए शुक्रवार को उन्होंने इसकी शिकायत कलेक्टर अजीत वसंत से की थी। प्रिसिंपल ने आरोपों को बताया गलत स्वरंग किड्स एकेडमी की प्रिसिंपल नेहा सिंह ने कहा कि, भाषा की वजह से बच्चे को एडमिशन नहीं देने का आरोप बिल्कुल गलत है। यहां प्रक्रिया है कि पहले डेमो क्लास ली जाती है। यह देखा जाता है कि बच्चा एडजस्ट कर पा रहा है या नहीं। भाषा के कारण एडमिशन नहीं देने जैसी कोई बात नहीं है। TS सिंहदेव बोले- ऐसे स्कूल को बंद कर दें इस मामले में पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा था कि, कोई स्कूल इसलिए बच्चे का एडमिशन नहीं ले रहा, क्योंकि वह सरगुजिहा बोली में बात करता है, तो ऐसे स्कूल को बंद कर देना चाहिए। शिक्षा विभाग को इसकी तत्काल जांच करनी चाहिए। NSUI ने जताया विरोध, पंजीयन रद्द करने की मांग इस मामले में NSUI ने सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। बच्चे का एडमिशन नहीं लेने वाले स्कूल का पंजीयन रद्द करने की मांग की है। NSUI ने कहा कि, यह स्थानीय बोली का अपमान है, जबकि सरकारी स्कूलों की नौकरी के लिए स्थानीय बोली के ज्ञान होने की अनिवार्यता होती है। बचपन प्ले स्कूल में फ्री एडमिशन अब मामला सामने आने के बाद AICC सदस्य आदितेश्वर सिंहदेव की पहल पर बचपन प्ले स्कूल ने बच्चे को फ्री एडमिशन दिया है। जिससे वो अच्छे से पढ़ाई कर सके। स्थानीय बोली के अलावा हिंदी भाषा भी सीख सके। स्कूल के संचालक प्रतीक दीक्षित ने कहा कि, शिक्षा समेत बाकी सेवाओं में भाषाई आधार पर भेदभाव अनुचित है। वे बच्चे को फ्री एडमिशन दे रहे हैं। स्वरंग किड्स एकेडमी स्कूल को नोटिस, डीईओ ने मंगाए दस्तावेज सरगुजा डीईओ दिनेश झा ने प्री-प्राइमरी स्कूल स्वरंग किड्स एकेडमी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मान्यता के दस्तावेजों समेत कार्यालय में तलब भी किया। नोटिस कहा गया कि, आपका यह कृत्य नवीन शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों का उल्लंघन है। क्यों न आपकी संस्था को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाए। ………………….. छत्तीसगढ़ की ये खबर भी पढ़ें… होमवर्क नहीं करने पर स्टूडेंट को पेड़ से लटकाया…VIDEO: परिजनों का हंगामा, संचालक बोला-सिर्फ डराने के लिए सजा दी, टीचर रोते हुए बोली-गलती हो गई छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में एक प्राइवेट स्कूल में केजी-टू के छात्र (5) को होमवर्क न करने पर टीचर ने घंटों पेड़ से लटकाए रखा। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पेरेंट्स का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में परिजनों ने स्कूल के बाहर हंगामा कर दिया। पढ़ें पूरी खबर

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