पालतू कुत्तों में आंखों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि अब इनके इलाज के लिए अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं। मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, ड्राई आई (KCS) और कॉर्नियल डैमेज जैसी समस्याओं का सफल उपचार संभव हो रहा है। यह जानकारी मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) से आए सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. चार्ल्स कुन्त्ज़ ने ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 17वीं FSAPAI इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के पहले दिन दी। यह कॉन्फ्रेंस फेडरेशन ऑफ स्मॉल एनिमल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FSAPAI) और यूनाइटेड स्मॉल एनिमल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में है जिसमें देश-विदेश से करीब सैकडों एक्सपर्ट्स शामिल हुए। कुत्तों की आंखों के आधुनिक उपचार ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. नरेंद्र चौहान के अनुसार, छोटी नस्लों (विशेषकर उभरी हुई आंखों वाली ब्रीड्स) में कॉर्नियल बीमारियां और इंजरी काफी आम हो गई हैं। ऐसे मामलों में कॉर्नियल सर्जरी की आवश्यकता अधिक पड़ती है। कॉन्फ्रेंस में शामिल देश-विदेश के वेटनरी एक्सपर्ट्स ने आधुनिक इलाज और तकनीकों के बारे में जानकारी साझा की। प्रमुख आधुनिक तकनीकें एक्सपर्टस के मुताबिक डायबिटीड की बीमारी से पीड़ित हर 10 में से 5 कुत्तों में मोतियाबिंद भी पाया जा रहा है। लाइफस्टाइल डिजीज और डायबिटीज के मामलों में वृद्धि भी आंखों की समस्याओं को बढ़ा रही है। अब आधुनिक इलाज के तहत कार्निया ट्रांसप्लांट आसान हो गया है। इसकी शुरुआत भी इंदौर से हुई थी। कॉन्फ्रेंस में कुत्तों के कैंसर और किडनी रोगों के आधुनिक इलाज पर भी चर्चा हुई। डॉग कैंसर के नए इलाज किडनी रोग के एडवांस इलाज रोबोटिक सर्जरी और AI का बढ़ता उपयोग डॉ. चार्ल्स कुन्त्ज़ ने बताया कि अब इंसानों की तरह पालतू पशुओं की सर्जरी में भी रोबोटिक तकनीक और डायग्नोस्टिक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ रहा है। हालांकि भारत में एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी एक गंभीर समस्या है। इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में हैंड्स-ऑन वर्कशॉप, केस डिस्कशन और इंटरएक्टिव सेमिनार के जरिए युवा वेटनरी सर्जनों को प्रेक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई जिससे वे नई तकनीकों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
