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25 हजार कलश, 1500 पुलिसकर्मी… फिर भी भगदड़:बहू बोली- सुबह से भीड़ थी, कलश बांटते वक्त बेकाबू हुई, सास की जान गई

ग्वालियर के डबरा में बने एशिया का सबसे बड़े नवग्रह मंदिर के स्थापना समारोह के पहले दिन बड़ा हादसा हो गया। एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। सात महिलाएं घायल हैं। ये सभी वे महिलाएं हैं जो कलश यात्रा में शामिल होने आई थी। प्रदेश पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा नवग्रह मंदिर के स्थापना समारोह के मुख्य यजमान हैं। जब हादसा हुआ तब वे मंदिर परिसर में ही मौजूद थे। पुलिस का दावा है कि 10 दिन तक चलने वाले स्थापना समारोह में करीब 15 लाख से ज्यादा लोग आएंगे। सुरक्षा-व्यवस्था में 1500 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके बाद भी हादसा हो गया। हादसे के बाद आनन-फानन में कलेक्टर रुचिका चौहान ने एसपी धर्मवीर सिंह यादव और आईजी अरविंद सक्सेना के साथ हाईलेवल मीटिंग की। लेकिन, मीटिंग में क्या हुआ इस बारे में प्रशासन और पुलिस चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि, हादसे की मुख्य वजह उन महिलाओं को बताया जा रहा है जिन्हें कलश यात्रा में शामिल नहीं होना था। दरअसल, आयोजन समिति ने 20 हजार महिलाओं का रजिस्ट्रेशन कर पीली साड़ी दी थीं। बताया जा रहा है जिन महिलाओं का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ और उनके पास पीली साड़ी थी वे भी कलश लेने पहुंच गईं। इसके चलते भीड़ बढ़ी और भगदड़ मच गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतका के परिजन को 4 लाख और गंभीर रूप से घायलों को 1-1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। हादसे से जुड़ी तस्वीरें देखिए… रति देवी की बहू बोली- अम्मा कई दिन से तैयारी में थी
मृतक रति देवी साहू का दोपहर में अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजन गुस्से में हैं। रति बाई बहू रीना साहू कहती हैं, अम्मा कई दिन से स्थापना के दौरान 10 दिन तक चलने वाले कार्यक्रमों में जाने की तैयारी कर रही थीं। वे कहती थी ऐसा मौका भगवान के आशीर्वाद और भाग्य से मिलता है। उन्होंने हर मंदिर आने के लिए अपनी उम्र की महिलाओं को भी तैयार कर लिया था। पंडित प्रदीप मिश्रा और पंडित धीरेंद्र शास्त्री कथा भी सुनने जाने का कहती थीं। हम लोग कहते थे टीवी पर भी आएगी, सुन लेना। वो कहती थीं, जब अपने यहां हो रही है तो टीवी पर क्यों सुनू। उनकी इच्छा अधूरी रह गई और वे हमें छोड़कर चली गईं। सुबह नौ बजे ही आ गए थे
हम लोग अपनी कॉलोनी की पांच-छह महिलाओं के साथ सुबह नौ बजे स्टेडियम पहुंच गए थे। स्टेडियम के गेट खुलने से पहले ही वहां हजारों महिलाए मौजूद थी। न तो कोई लाइन लगवा रहा था और न ही कोई कुछ बता रहा था। जिस स्थान पर कलश बांटे जा रहे थे वहां तो हालत और भी ज्यादा खराब थे। जैसे-तैसे मैं अम्मा का हाथ पकड़कर वहां तक पहुंची भीड़ और ज्यादा हो गई। कलश लेने के लिए धक्का-मुक्की होने लगी। इसी दौरान अम्मा गिर कर बेहोश हो गई। देखते ही देखते एक के ऊपर एक महिलाएं गिरना शुरू हो गई। बच्चे चीख रहे थे। थोड़ी देर बाद लोगों ने महिलाओं को उठाया। स्टेडियम ग्राउंड में ही जमीन पर लिटाकर पंखा किया। मैंने देखा की घायलों को लोग गोदी में लेकर दौड़े जा रहे थे। रीना का कहना था कि घटनास्थल पर पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं थी भगदड़ मची, लोग अस्पताल लेकर गए पर वहां ऑक्सीजन नहीं दी गई। अम्मा आधे घंटे तक तड़पती रही और उनकी मौत हो गई। 6 महीने से चल रही थी तैयारियां
प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां छह महीने पहले से चल रही थीं। कलश यात्रा में 20 हजार महिलाओं के लाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए 25 हजार कलश मंगाए गए थे। 5 फरवरी से समिति के सदस्य शहर के 30 वार्डों जाकर कलश यात्रा के महिलाओं का रजिस्ट्रेशन कर रहे थे। रजिस्ट्रेशन के साथ कलश यात्रा के लिए पीली साड़ी दे रहे थे। सुबह 11 बजे से कलश वितरण होना था। लेकिन महिलाएं सुबह 9 बजे ही पहुंच गईं। 11 बजे जैसे ही कलश बांटना शुरू हुए महिलाएं बेकाबू हो गईं। ऐसे रोका जा सकता था हादसा आखिर हादसा कैसे हुआ? आईजी अरविंद सक्सेना कहते हैं कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम यहां किए गए हैं। हादसे की वजह कलश लेने में महिलाओं की आतुरता है। लेकिन, हादसे वाली जगह पुलिस के न होने का कोई जवाब उन्होंने नहीं दिया। दैनिक भास्कर की टीम ने तथ्यों की छानबीन की तो सामने आया कि स्टेडियम में क्राउड मैनेजमेंट की कोई व्यवस्था नहीं थी। जबकि समिति को पता था कि 20 हजार से अधिक महिलाएं आने वाली हैं। आयोजन समिति ने 30 वार्डों में पहले ही साड़ियों का वितरण कर दिया था। समिति अगर कलश भी साड़ी के साथ दे देती तो भीड़ जमा नहीं होती। घर से ही कलश के साथ यात्रा में शामिल होने कहा जाना चाहिए था। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा हैं यजमान बता दें कि डबरा में नवग्रह शक्तिपीठ का दस दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा समारोह मंगलवार से शुरू हुआ है, जो 20 फरवरी तक चलेगा। इस आयोजन के मुख्य यजमान पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा हैं। कार्यक्रम के दौरान तीन-तीन दिन तक पंडित प्रदीप मिश्रा, पंडित धीरेन्द्र शास्त्री और कवि कुमार विश्वास के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन प्रस्तावित हैं, जबकि दाती महाराज द्वारा 10 दिनों तक रात्रिकालीन विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। अद्भुत नवग्रह मंदिर के बारे में जानिए एशिया का सबसे बड़ा और अद्भुत नवग्रह मंदिर ग्वालियर के डबरा में बना है। इसे अद्भुत इसलिए कहा जा रहा है कि एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां नवग्रह के साथ उनकी पत्नियां भी विराजमान हैं। 12 एकड़ जमीन पर सिर्फ मंदिर बना है। यह मंदिर सनातन धर्म परंपरा, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र आधार पर 108 खंभों पर स्थापित किया है। हिंदू धर्म में 108 अंक का विशेष महत्व है। 27 तारामंडल, जिनको नक्षत्र भी कहा जाता है। हर नक्षत्र की चार-चार दिशाएं होती हैं, जिनका योग 108 होता है। मंदिर में नवग्रह की स्थापना बहुत अध्ययन के बाद की गई है। हर मंदिर और ग्रह को ऐसे स्थान दिया है कि कभी वह एक-दूसरे के सामने न आ सके। सूर्य मंदिर की स्थापना के साथ उनके तेज को नियंत्रित करने पानी का तालाब, नालियां व झरोखे बनाए गए हैं। यह खबरें भी पढ़ें डबरा में कलश बांटते वक्त भगदड़…VIDEO:महिला की मौत, बच्ची समेत 8 घायल मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा में नवग्रह मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में कलश यात्रा शुरू होने से पहले भगदड़ मच गई। इसमें 70 वर्षीय महिला रति साहू की मौत हो गई। बच्ची समेत 8 लोग घायल हो गए हैं। इनमें से एक की हालत गंभीर है। ग्वालियर रेफर किया गया है। पढ़ें पूरी खबर देश का सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर: 12 एकड़ जमीन पर सिर्फ मंदिर बना एशिया का सबसे बड़ा और अद्भुत नवग्रह मंदिर ग्वालियर के डबरा में बना है। वैदिक धर्म ग्रंथों एवं शास्त्रों में बताया गया है कि संपूर्ण ब्रह्मांड में कुल 27 तारामंडल हैं। इन तारामंडलों की चार दिशाएं हैं। यदि हम 27 को 4 से गुणा करते हैं, तो कुल 108 संख्या आती है।जिसका अर्थ यह है कि संपूर्ण ब्रह्मांड का स्वरूप 108 अंक है। पढ़ें पूरी खबर…

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