मध्यप्रदेश की सियासत में हलचल मचाने वाले विजयपुर विधानसभा सीट के अयोग्यता मामले की गूंज अब देश की सबसे बड़ी अदालत में सुनाई देगी। सुप्रीम कोर्ट 19 मार्च को विधायक मुकेश मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई करेगा। मुकेश मल्होत्रा ने भास्कर को फोन पर बताया कि सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस महोदय इस मामले की सुनवाई करेंगे। गौरतलब है कि ग्वालियर हाईकोर्ट ने क्रिमिनल केस छिपाने के चलते मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित करते हुए भाजपा नेता रामनिवास रावत को विजेता माना था। 4 दिन का बचेगा वक्त 9 मार्च को हाईकोर्ट ने विजयपुर विधायक मामले में सुनवाई करते हुए मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य करने के बाद 15 दिन का समय सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए दिया था। 24 मार्च को यह 15 दिनों की समयसीमा पूरी हो रही है। ऐसे में 19 मार्च को होने वाली सुनवाई अहम होगी। हाईकोर्ट का कड़ा रुख: 6 में से 2 केस छिपाना पड़ा भारी 9 मार्च को ग्वालियर बेंच के जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन रद्द कर दिया था। कोर्ट ने पाया कि मल्होत्रा ने 2024 के उपचुनाव नामांकन में केवल 4 क्रिमिनल केस की जानकारी दी थी। असल में उनके खिलाफ 6 मामले दर्ज थे। 2 केस की जानकारी छिपाना चुनावी नियमों का उल्लंघन माना गया। याचिकाकर्ता रामनिवास रावत (दूसरे नंबर के उम्मीदवार) को कोर्ट ने विजयपुर का नया विधायक घोषित करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए दिया था 15 दिन का वक्त
हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने जैसे ही मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित करते हुए निकटतम प्रतिद्धंदी रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था। उसके तुरंत बाद मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में ही एक आवेदन देकर अपील करने के लिए समय मांगा था। इसके बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए 15 दिन का समय है। इसका तकनीकी मतलब यह है कि अगले 15 दिनों तक रामनिवास रावत को विधायक के रूप में शपथ नहीं दिलाई जा सकती। मुकेश मल्होत्रा को अपनी विधायकी बचाने के लिए 20 मार्च तक सुप्रीम कोर्ट से ‘स्टे’ (Stay Order) लाना अनिवार्य होगा। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा देता है, तो मल्होत्रा विधायक बने रहेंगे। मुकेश और रामनिवास दोनों ने बदली थी पार्टी पूर्व राज्यमंत्री और आदिवासी नेता मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को कांग्रेस जॉइन की थी। उन्होंने मुरैना जिले में आयोजित प्रियंका गांधी की चुनावी सभा में सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव–2023 में मुकेश मल्होत्रा विजयपुर सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे थे, तब पूरे क्षेत्र के आदिवासियों ने उनका साथ दिया था। उन्हें 45 हजार वोट मिले थे। मुकेश विजयपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पहले में बीजेपी में थे, तब सरकार ने उन्हें सहारिया प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया था। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बनाया था। विधानभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने 2023 के चुनाव से पहले भाजपा का साथ छोड़ दिया था। दरअसल, विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में सहारिया आदिवासी समाज के 70 हजार से ज्यादा वोट हैं। कांग्रेस ने आदिवासी वोटों को ध्यान में रखकर मुकेश को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, पूर्व वन मंत्री राम निवास रावत ने ग्वालियर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें श्योपुर के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा के झूठा हलफनामा दाखिल करने को चुनौती दी गई थी। पूर्व मंत्री राम निवास रावत ने ग्वालियर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के सामने एक याचिका दायर की थी, जिसमें कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा पर उपचुनाव के लिए अपने हलफनामे में अपने खिलाफ क्रिमिनल केस की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। ग्वालियर हाईकोर्ट ने उम्मीदवारों को जारी किया था नोटिस पूर्व मंत्री राम निवास रावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट ने उपचुनाव लड़ रहे 11 उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया था, जिसमें विजयपुर से कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा भी शामिल थे। सभी उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया था।
