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1 अप्रैल से महंगे होंगे ब्रेड, बिस्किट और जूते-चप्पल:रोजमर्रा की चीजों पर 25% तक की बढ़ोतरी संभव, ₹30 का ब्रेड पैकेट 35 में मिलेगा

ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध अब आम जनता की जेब पर सीधा असर डाल रहा है। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे पेट्रोकेमिकल से बनने वाले बायप्रोडक्ट भी महंगे हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन बाधित होने से रॉ मटेरियल की उपलब्धता भी कम हो गई है। ऐसे में 1 अप्रैल से दैनिक उपयोग की कई वस्तुओं के दाम बढ़ जाएंगे। मध्यप्रदेश एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों और उद्योगपतियों का कहना है कि दैनिक उपयोग में आने वाले सामान पर 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने वाली है। जिन वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी, उनमें ब्रेड, बिस्किट, जूते-चप्पल, प्लास्टिक उत्पाद सहित अन्य वस्तुएं शामिल हैं। अधिकांश कंपनियां नए रेट पर काम शुरू करने जा रही हैं। अब तक जो बिस्किट का पैकेट 5 रुपए का आता था, वह 6 रुपए का मिलेगा। 30 रुपए का ब्रेड का पैकेट 35 रुपए, 100 रुपए की चप्पल 120 रुपए और 1 किलो सर्फ की थैली पर 15 से 20 रुपए की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। उद्योगों की लागत और संचालन व्यवस्था प्रभावित एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष योगेश मेहता ने बताया कि एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने से कई उद्योगों पर इसका जबरदस्त असर पड़ा है। क्रूड ऑयल से बनने वाले कई केमिकल और रॉ मटेरियल के दाम आसमान छू रहे हैं। पेट्रोकेमिकल से बनने वाले रॉ मटेरियल की कीमत 200% से 300% तक बढ़ चुकी है, जिससे उद्योगों की लागत और संचालन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। उद्योगों के पास जो पुराना स्टॉक, पुराने सौदे और पुराना माल है, वह लगभग मार्च महीने तक चलेगा। इसके बाद नए रेट की सूची 1 अप्रैल से बाजार में लागू होने की तैयारी है। अप्रैल से जूते-चप्पल, प्लास्टिक उत्पाद, केमिकल उत्पाद, सर्फ, सोडा, साबुन और दैनिक जीवन की अन्य वस्तुएं महंगी होना शुरू हो जाएंगी। ब्रेड का पैकेट 3 से लेकर 6 रुपए तक महंगा होगा उद्योगपति हरीश भाटिया ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच वॉर शुरू होने से पहले जो 90 से 95 रुपए प्रति किलो का पीपी प्रोडक्ट आता था, वह आज 170 से 172 रुपए प्रति किलो हो गया है। इससे फिनिश प्रोडक्ट महंगा हो गया है। अप्रैल से 400 ग्राम का ब्रेड का पैकेट 5 से 6 रुपए तक महंगा हो जाएगा। 400 ग्राम से कम वजन वाले ब्रेड के पैकेट 3 से 4 रुपए तक महंगे हो जाएंगे। यह बढ़ी हुई कीमतें अप्रैल से असर में आ जाएंगी। वैसे तो कई जिलों में रेट बढ़ना शुरू हो गए हैं। हालांकि, अधिकांश कंपनियों में यह रेट अप्रैल के बाद ही बढ़ेंगे। इसकी वजह यह है कि कई कंपनियों के पास अभी पुराना स्टॉक है, जिसे पहले क्लियर किया जाएगा। इसके बाद ही नए स्टॉक पर रेट बढ़ाएंगे।
साबुन-सोडे पर भी पड़ रहा असर केमिकल फैक्ट्री की संचालक कांता यादव ने बताया कि डिटर्जेंट निर्माण में एसिड स्लरी सबसे अहम कच्चा माल है। एक किलो वॉशिंग पाउडर में औसतन 300 ग्राम तक स्लरी का उपयोग होता है। यह कच्चे तेल से बनने वाला उत्पाद है। खाड़ी देशों में हालात बिगड़ते ही इसकी उपलब्धता और कीमत दोनों प्रभावित हुई हैं। फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि पहले मांग के अनुसार सप्लाई मिल जाती थी, अब जरूरत के मुकाबले काफी कम माल मिल रहा है। इंदौर में करीब 200 से ज्यादा यूनिट्स हैं और इनका सालाना टर्नओवर करीब 4,000 करोड़ से ज्यादा का है। एसिड स्लरी के नहीं मिलने और पैकिंग मटेरियल के महंगा होने से 1 किलो सर्फ की कीमत में 15 से 20 रुपए की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। रॉ मटेरियल 50 प्रतिशत तक महंगा हो चुका एसोसिएशन ऑफ फुटवियर के प्रेसीडेंट गिरीश पंजाबी ने बताया कि एमपी में आर्टिफिशियल लेदर की फुटवियर इंडस्ट्री है। इसमें लेदर का उपयोग नहीं होता है और इसके सारे रॉ मटेरियल पेट्रोकेमिकल बेस्ड हैं। इसके कारण फुटवियर इंडस्ट्री के फिनिश गुड्स पर कम से कम 20 से 25% की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। फुटवियर इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले रॉ मटेरियल के रेट 50% तक बढ़ चुके हैं। 100 वाली चीज 150 से लेकर 180 तक पहुंच गई है। रेट बढ़ाने के साथ वजन होगा कम कंपनियां मार्जिन बचाने और ग्राहकों की मांग के बीच संतुलन बनाने के लिए दाम बढ़ाने के साथ पैकेट का वजन कम कर रही हैं। उदाहरण के लिए 1 रुपए की चॉकलेट का रेट कंपनी बढ़ाकर 1.25 या 1.50 रुपए नहीं कर सकती, इसलिए कंपनियां अब 1 रुपए की चॉकलेट का वजन कम कर रही हैं। जैसे पहले 10 ग्राम चॉकलेट 1 रुपए की आती थी, अब 1 रुपए में 8 या 7 ग्राम चॉकलेट मिलेगी। उद्योगपति दीपक दर्यानी ने बताया कि पहले जो बिस्किट का पैकेट 5 रुपए का आता था, वह अब 6 रुपए का मिलेगा। यह रेट 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे। ईरान युद्ध से सप्लाई चेन में रुकावट का असर होमोपॉलिमर पॉलीप्रोपाइलीन (PPH) की कीमत में करीब 4,000 रुपए प्रति टन और कोपॉलिमर की कीमत में 7,000 रुपए प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा पॉलीइथिलीन (PE) का दाम भी करीब 7,000 रुपए प्रति टन बढ़ाया गया है। इस महीने कई बार इनकी कीमतों में तेजी देखने को मिली है। पीवीसी की कीमतों में भी इस महीने लगभग 13,000 रुपए प्रति टन की वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, प्लास्टिक की इनपुट लागत में हाल के हफ्तों में भारी वृद्धि हुई है। यह इजाफा कच्चे माल की बढ़ती लागत और मिडिल ईस्ट में तनाव से जुड़ा हुआ है। इससे पेट्रोकेमिकल सप्लाई और लॉजिस्टिक्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्लास्टिक उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इसका असर अब घरेलू पॉलिमर की कीमतों पर भी पड़ रहा है। यह खबर भी पढ़ें… 10-15% उद्योगों में एक ही शिफ्ट में काम इजराइल-ईरान युद्ध का असर अब मध्य प्रदेश के उद्योगों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की कीमतें 20 से 30 फीसदी तक बढ़ गई हैं। वहीं, लॉजिस्टिक लागत भी 5 गुना महंगी हो गई है। इसका सीधा असर उत्पादन और सप्लाई पर पड़ रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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