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स्कूल शिक्षा के बाद अब ट्राइबल के शिक्षकों को खतरा:जनजातीय कार्य विभाग का आदेश; ट्राइबल के 65 हजार शिक्षकों को देनी होगी पात्रता परीक्षा

स्कूल शिक्षा विभाग के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के बाद अब ट्राइबल के 65 हजार शिक्षकों की नौकरी भी शिक्षक पात्रता परीक्षा के कारण खतरे में आ गई है। जनजातीय कार्य विभाग के कमिश्नर ने स्कूल शिक्षा विभाग की तर्ज पर ट्राइबल में पदस्थ शिक्षकों की परीक्षा के निर्देश जारी कर दिए हैं। जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त तरुण राठी द्वारा आज जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी संभागीय उपायुक्त, सहायक आयुक्त और जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग व अनुसूचित जाति विभाग इस परीक्षा की जानकारी ट्राइबल के शिक्षकों को देंगे। निर्देशों में कहा गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य है और इसे दो वर्षों में पास करना होगा। यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (सिविल अपील क्रमांक 1385/2025, 1386/2025 व अन्य याचिकाएं) के पालन में लिया गया है। साथ ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अंतर्गत यह व्यवस्था लागू की जा रही है। निर्देशों का कड़ाई से पालन करने पर जोर जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने कहा है कि आयुक्त लोक शिक्षण द्वारा 2 मार्च को जारी निर्देश में जुलाई-अगस्त 2026 में विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित कराने की योजना बनाई गई है। इसलिए विभाग के सभी संभागीय उपायुक्तों, सहायक आयुक्तों एवं जिला संयोजकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों की परीक्षा में भागीदारी तय कराएंं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि पात्रता परीक्षा में सभी अपात्र शिक्षक शामिल होकर नियमानुसार योग्यता प्राप्त कर सकें। सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की तैयारी दूसरी ओर ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगोर ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर रिव्यू पिटीशन दायर की जा रही है। इसके लिए आरएस झा रिटायर्ड हाईकोर्ट जस्टिस पंजाब और हरियाणा को संगठन की ओर से दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं। सिंगोर ने कहा कि ट्राइबल में 95 हजार शिक्षक हैं, जिसमें से 65 हजार शिक्षकों को परीक्षा देना होगी। सिंगोर ने कहा कि चूंकि हमारा एसोसिएशन वेलफेयर के रूप में काम करता है और आदिवासी बच्चों के हितों के लिए एक्टिव है। इसलिए कोर्ट में यह भी दलील दी जा रही है कि सरकार के निर्णय से ट्राइबल के स्कूल खाली हो जाएंगे। अनुभवी शिक्षक बाहर हो जाएंगे और अतिथि शिक्षकों के चलते शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होगी। सिंगोर ने कहा कि अगले तीन दिन के अवकाश खत्म होते ही पिटीशन दायर हो जाएगी।

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