भिंड जिले में बहने वाली सिंध नदी की धारा के नीचे अवैध रेत खनन चल रहा है। रात होते ही तेज शोर के साथ मशीनें नदी में उतरती हैं और पनडुब्बियों के जरिए गहराई से रेत खींचकर बाहर फेंकने का काम शुरू हो जाता है। यह सबकुछ कभी-कभार नहीं, बल्कि रोज होता है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन और माइनिंग विभाग कहीं खनन न हो, इसकी निगरानी करता है। दैनिक भास्कर टीम की अवैध रेत खनन की जानकारी मिलने पर सिंध नदी के किनारों पर कई किमी तक घूमा। पढ़िए रिपोर्ट… तीन तस्वीरें देखिए… 37 रेत खदानों पर चल रहा खनन जिले में अमायन से लेकर नयागांव थाना क्षेत्र तक बहने वाली सिंध नदी में फिलहाल 37 रेत खदानों पर खनन चल रहा है। इन खदानों का टेंडर आरएसआई स्टोन वर्ल्ड प्रा.लि. और नर्मदा माइनिंग एंड मिनरल्स को संयुक्त रूप से दिया गया है। पड़ताल में सामने आया कि जिन खदानों को टेंडर के जरिए लिया गया है, वहां बड़े पैमाने पर पनडुब्बियां डालकर रेत निकाली जा रही है। यह एनजीटी के नियमों का सीधा उल्लंघन है। टीम ने अपनी पड़ताल में पाया कि 50 से ज्यादा पनडुब्बियां रोज सैकड़ों डंपर रेत निकाल रही हैं। नदी के भीतर कई जगह 200-200 फीट तक गहरे गड्ढे बन चुके हैं। नदी के किनारों पर मशीनों की आवाज, पाइपों से बहती रेत और आसपास सक्रिय लोगों की कड़ी निगरानी… इस अवैध कारोबार की खुद पोल खोल रहा है। कई जगह दबंगों का सीधा नियंत्रण दिखाई दिया, जबकि कुछ खदानों पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों से काम कराया जाना भी पाया गया। सिंध नदी में रेत खनन के खेल को तीन केस से समझिए केस-1 : बिलाव रेत खदान – टीम सबसे पहले बिलाव रेत खदान पर पहुंची। दोपहर की तेज धूप में रेत के टीलों के बीच शांत बहती सिंध नदी ऊपर से सामान्य दिखाई दे रही थी, लेकिन नदी के भीतर अवैध खनन की गतिविधियां तेजी से चल रही थीं। दो पनडुब्बियों के जरिए यहां रेत का खेल चल रहा था। हालांकि मुख्य रूप से रात के अंधेरे में यह खेत और तेजी से चलता है। नदी के अंदर जहां-जहां पनडुब्बी डाली गई है, वहां बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई जगह इन गड्ढों की गहराई 200 फीट तक पहुंच गई है। पनडुब्बियों के जरिए नदी की गहराई से रेत खींचकर पाइपों के माध्यम से सीधे किनारे पर फेंकी जाती है, जहां से उसे डंपरों में भरकर बाहर भेज दिया जाता है। केस-2 : इंदुर्खी रेत खदान – यहां खदान पर स्थिति और भी गंभीर दिखाई दी। यहां पांच से छह पनडुब्बियां अलग-अलग स्थानों पर लगभग 100-100 मीटर की दूरी पर लगी हुई हैं। इसी खदान से जुड़ी बिरौना रेत खदान पर भी तीन से चार पनडुब्बियां सक्रिय दिखीं। यह क्षेत्र रेत कारोबारियों का मजबूत ठिकाना बन चुका है। यहां बाहरी लोगों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। रेत खनन से जुड़े लोग आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखते हैं। ग्रामीणों का कहना था कि यहां फोटो या वीडियो लेना जोखिम भरा है। लोगों में इतना डर दिखा कि कैमरा देखकर कुछ कहे बिना ही वहां से चलते बने। केस-3 : खैरा-श्यामपुरा रेत खदान – रेत खदान मेहदा पुल से साफ दिखाई देती है। पुल पर खड़े होकर देखने पर सिंध नदी में दो पनडुब्बियां लगी हुई नजर आती हैं, जिनमें से एक लगातार सक्रिय थी। यहां स्थानीय दबंगों का दबदबा बताया जाता है। पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि रेत खनन का टेंडर लेने वाली कंपनी के अधिकारियों ने इन लोगों से समझौता कर रखा है। ये लोग नदी में पनडुब्बियां डालकर रेत निकालते हैं और कंपनी उनकी बेची जाने वाली रेत की रॉयल्टी जमा कर देती है। इस तरह एनजीटी के नियमों को दरकिनार कर अवैध खनन का खेल चल रहा है। जिले की 72 में से 37 खदानों में ऐसा ही हाल भिंड जिले में कुल 72 रेत खदानें हैं। इनमें से दो ग्रुप की 37 खदानों को सक्रिय बताया गया है, जबकि एक ग्रुप की 35 खदानें कोर्ट केस और एग्रीमेंट से जुड़े विवादों के कारण बंद हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि सक्रिय खदानों में से अधिकांश पर पनडुब्बियों के जरिए रेत निकाली जा रही है। यूपी के जालौन, हमीरपुर से लाते हैं पनडुब्बियां रेत खनन में इस्तेमाल होने वाली ये पनडुब्बियां मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के जालौन और हमीरपुर जिलों से लाई जाती हैं। कुछ साल पहले भिंड जिले के लहार कस्बे में मंडी क्षेत्र और श्यामपुरा गांव के पास भी पनडुब्बियां बनाई जाती थीं, लेकिन फिलहाल वहां यह काम बंद हो चुका है। अब अधिकतर पनडुब्बियां हमीरपुर से मंगाई जा रही हैं। चोरी या कबाड़ ट्रकों के इंजन से बनती है पनडुब्बी पनडुब्बियों को चलाने के लिए भारी शक्ति वाले इंजन की जरूरत होती है। इसके लिए अक्सर पुराने या चोरी के ट्रकों के इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। इन इंजनों को नाव पर कसकर लगाया जाता है और उनसे दो बड़े पाइप जोड़े जाते हैं। पहला पाइप नदी के बीच में डाला जाता है, जो पानी के साथ रेत को खींचता है। दूसरा पाइप इंजन के दूसरे सिरे से जुड़ा होता है, जिससे कई पाइप जोड़कर रेत को तेज दबाव के साथ किनारे पर फेंका जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए एक पनडुब्बी एक घंटे में करीब एक डंपर यानी लगभग एक हजार घन फीट रेत निकाल देती है। रात भर में निकल जाती है सैकड़ों डंपर रेत स्थानीय लोगों के अनुसार एक पनडुब्बी करीब 12 घंटे तक लगातार चलती है और करीब दस हजार घन फीट रेत निकाल देती है। अगर सिंध नदी में सक्रिय 50 पनडुब्बियां एक रात में 8 से 12 घंटे तक चलती हैं तो अनुमान के मुताबिक करीब 200 डंपर रेत नदी से निकाल ली जाती है। भास्कर ने पनडुब्बी निर्माता से फोन पर किया सौदा दैनिक भास्कर टीम ने इस कारोबार से जुड़े हुए अलग-अलग लोगों से बातचीत की। ज्यादातर लोग कैमरे के सामने आने से कतराते रहे। तभी एक पनडुब्बी बनाने वाले मिस्त्री का फोन नंबर (63********80) मिला। रिपोर्टर ने रेत कारोबारी बनकर बातचीत की। पढ़िए बातचीत के अंश… रिपोर्टर- नमस्कार, मैं भिंड से बोल रहा हूं। मिस्त्री- आदेश दीजिए। रिपोर्टर- मुझे पनडुब्बी चाहिए। मिस्त्री- कब चाहिए। रिपोर्टर- 15 दिन में दे दीजिए। मिस्त्री- 15 दिन में तो नहीं हो पाएगी। रिपोर्टर- ठीक है। महीने भर में दे दीजिए। मेरे यहां अप्रैल महीने में रेत खदान शुरू हो रही है। नेताजी से बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि आप काम शुरू करो। मैं बैठा हूं, तो आप दे दो। मिस्त्री- ठीक है, कितने पाइप की चाहिए। रिपोर्टर- मैं इस क्षेत्र में नया हूं। आप ही बताओ कितने पाइप की ठीक रहेगी। कितनी कीमत में तैयार होगी। मिस्त्री- देखिए, पांच पाइप की पनडुब्बी 5 लाख 75 हजार की रहेगी। 10 पाइप की पनडुब्बी की कीमत सवा छह लाख हो जाएगी। रिपोर्टर- एक नई टेक्नोलॉजी की पनडुब्बी हमारे यहां है, जिनमें एक चैम्बर होता है, जिन्हें खोलने पर वह पानी में डूब जाती है। जब माइनिंग आती है तो पकड़े जाने का डर नहीं होता है। मिस्त्री- हां, मैंने ही आपके क्षेत्र में ऐसी पनडुब्बी दी है। इसमें कुछ नहीं होता नट बोल्ट होते हैं। मैं ऐसी ही तैयार करके दूंगा। रिपोर्टर- श्रीमानजी अपना नाम बताएं, जिससे मैं नंबर सेव कर लूं। आकर मिलूंगा। मिस्त्री- मेरा नाम मुन्ना सिंह है। आप आकर बात करना। मैं अभी ड्राइव कर रहा हूं। दरअसल, भिंड में इन दिनों रेत निकलाने के लिए नए तकनीकी की पनडुब्बी आ रही है। ये पनडुब्बी में एक चैम्बर दिया जाता है, जिसके नटबोल्ट खोलने पर नाव में पानी भर जाता है। 30 मिनट में ये गहरे पानी में डूब जाती है। जब कोई छापमारी होती है तो पनडुब्बी नजर न आने पर अधिकारियों की टीम वापस लौट जाती है। टीम के जाते ही रेत का गलत तरीके से खनन करने वाले माफिया एक्टिव होते हैं और नदी में डूबी हुई पनडुब्बी को बाहर निकालते हैं। इंजन ऑयल बदलकर पनडुब्बी चालू कर लेते हैं। सिंध नदी की प्राकृतिक संरचना बदल रही लोगों का कहना है कि पनडुब्बियों से बड़े पैमाने पर रेत निकाले जाने से सिंध नदी की प्राकृतिक संरचना बदल रही है। कई स्थानों पर 200 फीट तक गहरे गड्ढे बन चुके हैं। इन गड्ढों में कई बार ग्रामीण और मवेशी डूब चुके हैं। नदी की धारा भी कई जगह बदलने लगी है, जिससे भूमि का कटाव बढ़ रहा है और आसपास की जमीन बीहड़ों में बदलती जा रही है। सिंध नदी में बड़ी संख्या में सीप, मछलियां और कछुए पाए जाते हैं। पनडुब्बियों के जरिए खनन होने से ये जलीय जीव तेजी से नष्ट हो रहे हैं। कई बार मगरमच्छों को भी मार दिया जाता है, ताकि खनन में बाधा न आए। खदानों पर कई बार चल चुकी है गोली रेत खदानों तक रास्ता बनाने के लिए कई बार किसानों की फसलें भी बर्बाद कर दी जाती हैं। जब किसान विरोध करते हैं तो दबंगों से गोली तक चलवा दी जाती है। हाल ही में मेहदा और खैरा-श्यामपुरा गांव के दो गुटों के बीच नदी में पनडुब्बी डालने को लेकर विवाद हुआ था। मामला थाने तक पहुंचा और पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की। खनिज अधिकारी बोले- कार्रवाई करते हैं जिला खनिज अधिकारी पंकज ध्वज मिश्रा का कहना है कि जब भी नदी में पनडुब्बी होने की सूचना मिलती है, माइनिंग विभाग की टीम ने कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों मेहरा और रेमजा रेत खदान पर पनडुब्बियां मिलने पर कार्रवाई की गई थी। पनडुब्बियों के चलने की शिकायत मिली है स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन के एमडी फ्रैंक नोबल ए का कहना है कि भिंड में सिंध नदी में पनडुब्बियों के चलने की जो शिकायत आ रही हैं, इसका परीक्षण करवाएंगे। कलेक्टर को भी निर्देशित करके जांच करेंगे। खनन कंपनी सहित जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ये खबर भी पढ़ें… माफिया पर छापा, 1.65 करोड़ की रेत नष्ट मुरैना के चंबल राजघाट पर अवैध रेत उत्खनन को लेकर दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन एक्शन मोड में आ गया। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देश पर सोमवार सुबह 6 बजे टास्क फोर्स ने राजघाट में बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। पढ़ें पूरी खबर…
