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शर्तों के साथ सदन में कवासी लखमा की एंट्री:पूर्व मंत्री को ‘नो स्पीच’ क्लॉज के साथ विधानसभा के बजट-सत्र में आने की मिली अनुमति

शराब घोटाला मामले में जेल में रहे पूर्व मंत्री कवासी लखमा को विधानसभा के बजट सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई है। उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कुछ शर्तों के आधार पर उन्हें सदन की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी है। विधानसभा अध्यक्ष ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी औपचारिक जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमति न्यायालय द्वारा दी गई अंतरिम जमानत और विधानसभा की प्रक्रियात्मक शर्तों के अनुरूप दी गई है। एक साल बाद सदन में वापसी शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा करीब एक साल तक जेल में रहे। इस दौरान वे विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सके। अब उच्च न्यायालय द्वारा 3 फरवरी को उन्हें अंतरिम जमानत दी गई है। अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि 7 फरवरी को कवासी लखमा से अभिमत मांगा गया था और वर्ष 2026 में उन्होंने अपना अभिमत व्यक्त किया। इसके बाद विधानसभा की ओर से विचार-विमर्श कर उन्हें कुछ शर्तों के आधार पर बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया जारी है और याचिकाकर्ता के संबंध में अंतिम फैसला जांच पूरी होने के बाद ही होगा। फिलहाल न्यायालय के आदेश और संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें सदन में उपस्थित रहने की अनुमति दी गई है। इन शर्तों का पालन करना होगा बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति कुछ स्पष्ट और सख्त शर्तों के साथ दी गई है। विधानसभा की ओर से यह अनुमति न्यायालय द्वारा मिली अंतरिम जमानत के बाद दी गई है, लेकिन उनके आचरण और गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। -आने-जाने की सूचना अनिवार्य
कवासी लखमा को विधानसभा आने और जाने की पूरी जानकारी विधानसभा सचिव को देनी होगी। -निवास क्षेत्र का दौरा नहीं करेंगे
सत्र के दौरान वे अपने निवास क्षेत्र का दौरा नहीं कर सकेंगे। -“नो स्पीच” का कड़ाई से पालन
उन्हें कड़ाई से अपनी “नो स्पीच” शर्त का पालन करना होगा। यानी सार्वजनिक बयानबाजी या केस से जुड़ी टिप्पणी नहीं कर सकेंगे। -उपस्थिति केवल सत्र तक सीमित
उनकी उपस्थिति केवल विधानसभा सत्र तक ही सीमित रहेगी। किसी अन्य गतिविधि या सार्वजनिक कार्यक्रम में भागीदारी की अनुमति नहीं होगी। -नियम उल्लंघन पर अनुमति रद्द
यदि उन्होंने तय नियमों का उल्लंघन किया तो उनकी अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी। -अन्य विषयों पर चर्चा की अनुमति
वे बजट सत्र के अन्य विषयों पर चर्चा में भाग ले सकते हैं, लेकिन अपने ऊपर चल रहे केस के संबंध में किसी भी प्रकार की चर्चा नहीं करेंगे। -मामला न्यायालय में, सदन में चर्चा नहीं
सदस्यों को इस संबंध में जानकारी दे दी गई है। चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस विषय पर सदन में भी कोई चर्चा नहीं की जाएगी। 23 फरवरी से शुरू होगा बजट सत्र छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगा। कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सत्र की विस्तृत रूपरेखा भी साझा की। राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत सत्र की शुरुआत सोमवार, 23 फरवरी 2026 को सुबह 11:05 बजे राज्यपाल रामेन डेका के अभिभाषण से होगी। राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा 25 फरवरी को निर्धारित की गई है। अभिभाषण का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और आकाशवाणी से किया जाएगा, ताकि आम लोग भी सत्र की शुरुआत देख सकें। 24 फरवरी को पेश होगा बजट वित्त मंत्री ओपी चौधरी 24 फरवरी 2026 को दोपहर 12:30 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 का आय-व्यय (बजट) प्रस्तुत करेंगे। बजट पेश होने के बाद 26 और 27 फरवरी को उस पर सामान्य चर्चा होगी। 9 से 17 मार्च तक अनुदान मांगों पर चर्चा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर सामान्य चर्चा के बाद 9 मार्च से 17 मार्च तक विभागवार अनुदान मांगों पर चर्चा निर्धारित की गई है। 17 मार्च को आय-व्यय की मांगों से संबंधित विनियोग विधेयक का पुन:स्थापन किया जाएगा। इसके बाद 18 मार्च को विनियोग विधेयक पर चर्चा और पारण (पास) की तिथि तय की गई है। इस तरह पूरा सत्र वित्तीय मामलों, नीतिगत घोषणाओं और विभागवार जवाबदेही पर केंद्रित रहेगा। दो महत्वपूर्ण विधेयक भी होंगे पेश विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि शासकीय विधि-विषयक कार्यों के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण विधेयकों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं— – छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 – छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक, 2026 इन दोनों विधेयकों को लेकर सत्र के दौरान राजनीतिक चर्चा और बहस की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष की ओर से इन पर सवाल उठाए जा सकते हैं, जबकि सरकार इन्हें जनहित और कानून-व्यवस्था से जुड़ा कदम बता सकती है। प्रश्नों और प्रस्तावों की बड़ी संख्या इस बजट सत्र के लिए अब तक कुल 2813 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें 1376 तारांकित प्रश्न शामिल हैं, जिनके उत्तर सदन में मौखिक रूप से दिए जाएंगे। इसके अलावा इस समय विधानसभा में कुल 61 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, नियम 139 के अंतर्गत अविलंबनीय लोक महत्व के विषय पर चर्चा के लिए 1 सूचना, 13 अशासकीय संकल्प, शून्यकाल में 9 सूचनाएं और 112 याचिकाएं भी प्राप्त हुई हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सत्र के दौरान सरकार से विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत जवाब मांगे जाएंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, रोजगार, अधोसंरचना और जनकल्याण योजनाएं चर्चा के केंद्र में रह सकती हैं। निधन उल्लेख भी होगा सत्र के दौरान अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्य दीनदयाल सिंह पोर्ते के निधन का उल्लेख भी किया जाएगा। सदन उनकी सेवाओं को याद करते हुए शोक प्रकट करेगा। अध्यक्ष ने जताई सार्थक बहस की उम्मीद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बजट सत्र में वित्तीय, विधायी और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न विषयों पर सार्थक बहस होगी, जिससे राज्य की नीतिगत दिशा तय होगी। राजनीतिक नजरें लखमा की मौजूदगी पर हालांकि, सत्र का एजेंडा व्यापक है, लेकिन राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मंत्री कवासी लखमा की मौजूदगी को लेकर हो रही है। एक साल बाद सदन में उनकी वापसी कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह उठाता है और सरकार की ओर से क्या रुख रहता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी। अध्यक्ष ने साफ किया है कि यह अनुमति पूरी तरह से न्यायालय के आदेश और विधानसभा की शर्तों के अनुरूप है। जांच जारी है और अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही होगा। 23 फरवरी से शुरू हो रहा यह बजट सत्र वित्तीय प्रावधानों के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सदन के भीतर होने वाली बहस राज्य की राजनीति और नीतियों की दिशा तय करेगी।

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