विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन प्रश्नकाल में कई अहम मुद्दों की गूंज सुनाई दी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों का मामला उठाते हुए सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब देते हुए बताया कि प्रदेश में 665 खतरनाक अपशिष्ट पैदा करने वाले उद्योग संचालित हैं। उन्होंने कहा कि 19 उद्योगों में ऑनलाइन एमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है और यह व्यवस्था उद्योगों के अपने खर्च पर होती है। इसके बाद भाजपा विधायक सुनील सोनी ने छातिम वृक्ष से होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस वृक्ष के रोपण पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और न ही हटाने की कोई योजना है। वहीं विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कर्मचारियों के एनपीएस से ओपीएस चयन का मुद्दा उठाया। मंत्री ने बताया कि करीब 2.91 लाख कर्मचारियों ने ओपीएस चुना है और पेंशन व्यवस्था नियमों के तहत संचालित हो रही है। मुद्दों पर सवाल-जवाब के दौरान सदन में हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, हालांकि स्थिति को संभाल लिया गया और कार्यवाही आगे बढ़ी। पहले ये तस्वीरें देखिए…
प्रश्नकाल में विपक्ष के सवाल, पक्ष का जवाब अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों का मुद्दा सवाल (डॉ. चरणदास महंत): प्रदेश में खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली कितनी औद्योगिक इकाइयां हैं और उनके नियंत्रण की क्या व्यवस्था है? जवाब (मंत्री ओपी चौधरी): प्रदेश में 665 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। 19 उद्योगों में ऑनलाइन एमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित है, जिसे उद्योग अपने खर्च पर लगाते हैं और नियमित निगरानी की जाती है। इस मुद्दे पर सदन में हल्की बहस भी हुई। छातिम वृक्ष को लेकर सवाल सवाल (सुनील सोनी): क्या छातिम वृक्ष के दुष्प्रभाव को देखते हुए इसके रोपण पर रोक लगाई गई है या हटाने की कोई योजना है? जवाब (मंत्री ओपी चौधरी): छातिम वृक्ष के रोपण पर कोई रोक नहीं लगाई गई है और न ही इसे हटाने की कोई कार्ययोजना फिलहाल प्रस्तावित है। एनपीएस से ओपीएस चयन पर सवाल सवाल (पुन्नूलाल मोहले): प्रदेश में कितने कर्मचारियों ने एनपीएस से ओपीएस का चयन किया है और पेंशन व्यवस्था कैसे संचालित हो रही है? जवाब (मंत्री ओपी चौधरी): कुल 2,91,797 अधिकारी-कर्मचारियों ने ओपीएस का चयन किया है और पेंशन योजना का संचालन निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा रहा है। छातिम वृक्ष के बारे में जानिए छातिम का वृक्ष (सप्तपर्णी या Alstonia scholaris) एक लंबा, सदाबहार पेड़ है, जो अपनी घनी छाया और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। यह अक्टूबर में फूलता है और इससे निकलने वाली तेज गंध और परागकण (Pollen) के कारण यह एलर्जी, अस्थमा और सांस संबंधी समस्याओं का कारण बनता है। इसके जहरीले दूधिया रस के कारण इसे डेविल ट्री भी कहा जाता है। छातिम के वृक्ष के नुकसान: एलर्जी और अस्थमा: इसके फूलों से निकलने वाली तीखी गंध और परागकण सांस लेने में कठिनाई, अस्थमा, दमा और एलर्जी का कारण बनते हैं। विषाक्तता: इसके पत्ते और छाल से निकलने वाला दूधिया पदार्थ जहरीला होता है, जो मनुष्यों और पशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है। पर्यावरणीय प्रभाव: इन पेड़ों के कारण भूजल स्तर में गिरावट भी देखी गई है। प्रतिबंध: इसके स्वास्थ्य संबंधी नकारात्मक प्रभावों के कारण, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में इसके रोपण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। औषधीय महत्व: इन नुकसानों के बावजूद, आयुर्वेद में इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी छाल (जिसे ‘डिटा बार्क’ कहते हैं) का उपयोग मलेरिया, दस्त, त्वचा रोगों और सांप के काटने के उपचार के रूप में किया जाता है। इसे त्वचा के संक्रमण और पेट की बीमारियों के इलाज में भी इस्तेमाल किया जाता है। ……………………….. बजट सत्र से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… छत्तीसगढ़ में अब धर्मांतरण कराने पर उम्रकैद: विधानसभा में धर्म स्वतंत्रता बिल पास, 25 लाख जुर्माना लगेगा, मददगारों को भी होगी जेल छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पास हो गया है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर…
