मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इंदौर नगर निगम में कर्मचारियों की स्थिति को लेकर विधानसभा में दिए गए उनके जवाब में कई गलतियां मिली हैं। इसको लेकर कांग्रेस ने तो उन्हें कटघरे में खड़ा किया ही है, उनकी खुद की पार्टी बीजेपी भी असहज नजर आ रही है। मंत्री विजयवर्गीय ने इंदौर नगर निगम में सफाई संरक्षक के 3900 स्वीकृत पदों को पूरी तरह खाली बताते हुए विधानसभा में कहा था कि निगम में एक भी ऐसा कर्मचारी नहीं है। हकीकत में 1200 से अधिक संरक्षक और 2400 से ज्यादा विनियमित कर्मचारी इंदौर में सफाई का जिम्मा संभाल रहे हैं। बीजेपी विधायक हार्डिया ने ही किया था सवाल दरअसल, इंदौर- 5 सीट से बीजेपी विधायक महेंद्र हार्डिया ने विधानसभा में तारांकित प्रश्न लगाकर इंदौर नगर निगम में स्वीकृत और रिक्त पदों और कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी मांगी थी। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या कर्मचारियों की कमी के कारण एक ही अधिकारी को कई विभागों का प्रभार सौंपा गया है? इसके जवाब में विधानसभा में 20 फरवरी को मंत्री विजयवर्गीय ने निगम की सीमा विस्तार का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिए गए हैं, क्योंकि अमले की कमी है। उन्होंने वादा किया कि पर्याप्त भर्ती होने पर प्रभार वापस ले लिए जाएंगे। लेकिन इस जवाब के साथ दिए आंकड़ों पर सवाल उठने लगे हैं। विजयवर्गीय के अनुसार, इंदौर नगर निगम में 6312 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 1493 भरे हुए हैं और 4819 रिक्त हैं। खासकर सफाई संरक्षकों के 3900 पदों को विजयवर्गीय ने पूरी तरह खाली बताया। वहीं, निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक 1200 से ज्यादा सफाई संरक्षक नियमित रूप से काम कर रहे हैं जबकि 2400 से अधिक विनियमित सफाई मित्र शहर की सफाई व्यवस्था चला रहे हैं। मुख्य पद भरे बताए, हकीकत में महीनों से खाली मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने न केवल सफाई कर्मचारियों पर गलत डेटा दिया बल्कि महत्वपूर्ण पदों को लेकर भी गलत जानकारी दी। मुख्य स्वच्छता अधिकारी का पद उन्होंने भरा बताया जबकि हाईकोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि इस पद पर केवल एमबीबीएस डिग्री वाले डॉक्टर की ही नियुक्ति हो सकती है। इंदौर निगम में ऐसा कोई योग्य अधिकारी उपलब्ध नहीं है और यह पद महीनों से खाली पड़ा है। इसी तरह उन्होंने मुख्य नगर निवेशक का पद भी भरा बता दिया, जबकि यह लंबे समय से रिक्त है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों के आंकड़े भी गलत दिए राजस्व विभाग के पदों पर भी मंत्री के आंकड़े गलत साबित हो रहे हैं। उन्होंने 24 राजस्व निरीक्षकों के पदों में से 8 भरे और 16 रिक्त बताए, लेकिन निगम में एक भी स्थायी राजस्व निरीक्षक नहीं है। सभी प्रभारियों के तौर पर विनियमित कर्मचारी काम कर रहे हैं। मंत्री ने उप राजस्व निरीक्षकों के 49 पदों में 5 भरे बताए, जबकि सभी पद प्रभार के रूप में दूसरे अधिकारी संभाल रहे हैं। सहायक राजस्व निरीक्षकों के 195 पदों में से 115 भरे बताए गए, लेकिन यहां भी विनियमित और मस्टर रोल के कर्मचारी ही प्रभार संभाल रहे हैं। निगम के पास 1200 गाड़ियां और सिर्फ 3 ड्राइवर आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, निगम के पास 1200 से अधिक वाहन हैं। इनमें डंपर, ट्रक, जेसीबी, पोकलेन और छोटे वाहन शामिल हैं। विजयवर्गीय ने विधानसभा में कहा कि निगम में केवल 3 ड्राइवर हैं, वो भी हल्के वाहनों के लिए। ड्राइवरों के 20 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 17 लंबे समय से खाली हैं। सिंघार ने लिखा- मंत्री जी के आंकड़े तो खाली ही निकले कांग्रेस ने मंत्री विजयवर्गीय के बयान को ‘झूठ का पुलिंदा’ बताते हुए विधानसभा में हंगामा किया था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा था कि इंदौर की सफाई विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन मंत्री जी के आंकड़े तो ‘खाली’ ही निकले। हालांकि, निगम अधिकारियों ने बताया कि सीमा विस्तार के बाद स्टाफ की कमी तो है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। खबर पर आप अपनी राय यहां दे सकते हैं… ये खबर भी पढ़ें… नेता प्रतिपक्ष से विजयवर्गीय बोले-औकात में रहो मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को अदाणी को लेकर चर्चा छिड़ी तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार बिजली खरीद के नाम पर 25 साल में एक से सवा लाख करोड़ रुपए देने की तैयारी में है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सबूत मांगे। बहस तेज हुई और इसी दौरान “औकात में रहो” टिप्पणी ने आग भड़का दी। पढ़ें पूरी खबर…
