बांछड़ा समुदाय के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से आक्रोशित समाजजनों ने शनिवार दोपहर बड़ी संख्या में रतलाम जिले की माननखेड़ा पुलिस चौकी का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और जावरा एसडीओपी संदीप मालवीय को ज्ञापन सौंपा। दरअसल, 30 जनवरी को करणी सेना परिवार प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर अपने साथियों और पिपलिया जोधा के ग्रामीणों के साथ माननखेड़ा पुलिस चौकी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के विरोध में प्रदर्शन किया। आरोप है कि इसी दौरान जीवनसिंह शेरपुर ने बांछड़ा समुदाय के लोगों को देह व्यापार से जोड़ते हुए सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुईं।
रैली निकालकर पहुंचे समाजजन
शनिवार को बांछड़ा समाज के लोग महिलाओं और बच्चों के साथ हाथों में तख्तियां लेकर रैली के रूप में माननखेड़ा पुलिस चौकी पहुंचे। समाजजनों ने आरोप लगाया कि जीवनसिंह शेरपुर, बलवंत पाटीदार और उनके साथियों ने पूरे बांछड़ा समाज को देह व्यापार से जोड़कर अपमानित किया है, जो निंदनीय और अस्वीकार्य है। समाज के आकाश चौहान ने कहा कि बांछड़ा समुदाय में कई लोग शिक्षित हैं और शासकीय सेवाओं में कार्यरत हैं। कुछ व्यक्तियों के कथित कृत्यों के आधार पर पूरे समाज को बदनाम करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक मंच से की गई यह टिप्पणी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आती है। उन्होंने मांग की कि जीवनसिंह शेरपुर और उनके साथियों के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की जाए। समाजजनों ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं की गई तो नीमच एसपी कार्यालय से लेकर रतलाम एसपी कार्यालय तक पैदल मार्च किया जाएगा। पूर्व में दिया गया था ज्ञापन
उल्लेखनीय है कि 30 जनवरी को जीवनसिंह शेरपुर पिपलिया जोधा के ग्रामीणों के साथ माननखेड़ा चौकी पहुंचे थे और क्षेत्र में अवैध देह व्यापार व कच्ची शराब के निर्माण व बिक्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर एसपी के नाम ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में आरोप लगाया गया था कि पिपलिया जोधा क्षेत्र में बांछड़ा समुदाय से जुड़े कुछ व्यक्तियों द्वारा अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिसकी शिकायतें लंबे समय से की जा रही हैं। बांछड़ा समाज ने स्पष्ट किया कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पूरे समुदाय को अपमानित करना और गलत तरीके से बदनाम करना अस्वीकार्य है। समाज ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
