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मां खाने पर इंतजार करती रही, बेटे की मौत:प्रत्यक्षदर्शी बोला- आंखों के सामने कार सहित 20 फीट गहरी नहर में समा गए तीनों दोस्त

‘रात के 12 बजे थे। तेज रफ्तार कार आई और रेलिंग तोड़ते हुए 20 फीट गहरी नहर में समा गई। टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास मौजूद लोग चौंक गए।’ यह कहना है आकाश मसराम का। आकाश इटारसी में ढाबा कर्मचारी है। शुक्रवार रात पथरोटा नहर में जब कार गिरी, उस समय वह ढाबे में ही मौजूद था। हादसे में तीन दोस्तों लकी पटेल (30), अभय चौहान (19) और शिवम तिवारी (26) की मौत हो गई। शनिवार को तीनों का पोस्टमॉर्टम किया गया। पुलिस को आशंका है कि तेज रफ्तार में होने के कारण ढाबे के पास मौजूद स्पीड ब्रेकर से कार अनियंत्रित हुई। इसके बाद कार दूसरी ओर जाकर नहर में गिर गई। दैनिक भास्कर ने मौके पर पहुंचकर हादसे के प्रत्यक्षदर्शी आकाश मसराम से जानकारी ली। इसके बाद पोस्टमॉर्टम हाउस में तीनों मृतकों के परिजन से बात की। हादसे की आंखों देखी… पुराना हाईवे इटारसी से बैतूल की तरफ जाता है। करीब तीन किलोमीटर दूर पथरोटा बड़ी नहर है। नहर से होते हुए तवा डैम का पानी हरदा तक जाता है। नहर पर करीब 30 फीट चौड़ी पर 15 फीट चौड़ी पुलिया बनी है। दोनों के किनारे सीमेंट की रेलिंग लगी है। यहां से रोज हजारों वाहन गुजरते हैं। इसी नहर के पास दो ढाबे हैं। एक ढाबे पर आकाश मसराम काम करता है। कार को नहर में गिरते हुए आकाश ने ही देखा था। आकाश के मुताबिक, रोज की तरह शुक्रवार रात भी वह काम में लगा था। करीब 12 बजे अचानक तेज रफ्तार कार आई। रॉन्ग साइड की ओर नहर की रेलिंग से टकरा कर नहर में जा गिरी। टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास मौजूद लोग चौंक गए। आवाज सुनते ही वे नहर की ओर दौड़े, लेकिन तब तक कार नहर में समा चुकी थी। कार की हेडलाइट जल रही थी। कार सवार लोग विंडो ग्लास पीटते हुए चिल्ला रहे थे कि हमें बाहर निकालो। शायद कार लॉक हो गई थी, वे निकल नहीं पा रहे थे। उन्हें बचाने के लिए मैंने पानी में छलांग लगा दी। रात में अंधेरा और तेज बहाव था। कार का अंदाजा नहीं लग पाया तो मुझे वापस लौटना पड़ा। मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस का पॉइंट 100 मीटर दूर ही है। सूचना मिलते ही पुलिस पहुंच गई। नदी से कार निकालने के लिए क्रेन बुलाना पड़ी। इसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। ढाई घंटे बाद कार को निकाला जा सका। रात में खाने के लिए इंतजार करते रहे पोस्टमॉर्टम हाउस में अभय उर्फ अभि चौहान के पिता राकेश चौहान भी मौजूद थे। वे कहना तो बहुत कुछ चाहते थे, लेकिन क्या बोलें, समझ नहीं पा रहे। वे कहते हैं- मेरे माता-पिता और लकी की मम्मी तो वैष्णों देवी दर्शन के लिए गए हैं। रात में करीब 10 बजे अभि का फोन आया था। मैंने पूछा कि कब तक आओगे? उसने कहा- देर हो जाएगी, फिलहाल सिवनी मालवा में हैं। पूछा कि खाना खाया या नहीं। उसने मना करते हुए चावल बनवाने को कहा, तब मैंने कहा कि लकी को भी साथ ले आना। रात 12 बजे तक भी जब वो नहीं आया तो चिंता हुई। पहले अभि को फोन लगाया। इसके बाद लकी को। दोनों के मोबाइल नहीं लग रहे थे। मैं और अभि की मां रातभर सोफे पर बैठे रहे। कहीं से कोई खबर नहीं लग रही थी। उसके जिस भी दोस्त या रिश्तेदार को फोन लगा रहे थे। सभी कह रहे थे। हमें कुछ पता नहीं। सुबह मेरे रिश्तेदार सोनू का फोन आया। उनसे अभि के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि इसलिए ही तो फोन किया है। आप अस्पताल आ जाइए। लकी यहां अस्पताल में है। मैं जिस हालत में था, उसी में अस्पताल पहुंचा। सोचा बच्चे कार से थे। एक्सीडेंट हो गया, इसलिए फोन नहीं उठा रहे थे। मेरे रिश्तेदार अस्पताल के गेट पर ही मिल गए। उनसे पूछा, कहां भर्ती हैं- वो मेरा हाथ पकड़कर यहां ले आए। पहले तो समझ नहीं आया, क्या हो रहा है। चक्कर सा आ गया। फिर किसी ने कहा- अभि हमारे बीच नहीं रहा। मेरी तो सांस सी रुक गई। इतनी सर्दी में ये लोग मेरे ऊपर हवा कर रहे थे। सामने अंधेरा सा छा गया। उसी हालत में लकी के बारे में पूछा तो किसी ने कहा, वह भी उसके साथ चला गया। मेरे तो एक बेटा और एक बेटी थी। वो मुझे छोड़कर हमेशा के लिए चला गया। सबकुछ खत्म हो गया। घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था लकी राकेश चौहान से थोड़ी दूरी पर पेड़ के नीचे मृतक लकी पटेल के चाचा रो रहे थे। उनके पास पहुंचा तो वे आंसू पोछते हुए खड़े हो गए। कहने लगे, लकी की मां तो अभि के दादा-दादी के साथ वैष्णों देवी गई हैं। समझ नहीं आ रहा कि उन्हें क्या कहेंगे। लकी घर का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। वह अभि के साथ एयर कंडीशन और इलेक्ट्रिक फिटिंग का काम करता था। परिवार की तो एक पीढ़ी ही खत्म हो गई। लकी के पिता नहीं हैं। उसके बड़े भाई की 12 साल पहले नर्मदा में डूबने से मौत हो चुकी। उस समय लकी छोटा था। अब लकी भी चला गया। उसकी दो बहनें हैं। बड़ी की शादी हो चुकी है। बेटे की चिंता थी, इसलिए इटारसी बुला लिया तीसरे मृतक शिवम के पिता महेश तिवारी के बोल नहीं फूट रहे। वे कहते हैं- शिवम अपने दोस्तों के साथ अकसर जाता था। जाने से पहले उसने बताया था कि वह लकी और अभि के साथ है। आने में देर हो जाएगी। दोनों बच्चों के परिवारों से पारिवारिक संबंध हैं, तो कोई चिंता नहीं थी। शिवम दिल्ली में जॉब करता था। मुझे उसकी चिंता लगी रहती थी। मैं चाहता था कि वह यहीं रहकर कुछ करे। मेरे कहने पर वह दिल्ली से इटारसी आ गया। यहां एसबीआई की क्रेडिट कार्ड ब्रांच में काम करने लगा। मैं परिवार के बाकी सदस्यों के साथ रात में शादी समारोह में गया था। वहां लोगों से मिलने-मिलाने व्यस्त रहा। शिवम से पहले ही बात हो गई थी। वापस आने के बाद फोन नहीं लगाया और सो गया। सुबह छह बजे हादसे की खबर लगी। हादसा कैसे और क्यों हुआ, ये सब तो नहीं पता। सच्चाई यह है कि मेरा बड़ा बेटा हमेशा के लिए छोड़कर चला गया। शिवम के छोटे भाई वरुण तिवारी फोटोग्राफर हैं। वे कहते हैं- शाम को भाई से मिला था। सुबह चला गया। सोचा था शाम को फिर मिलेंगे, लेकिन अब… कभी नहीं।

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