नर्मदापुरम में महिला एवं बाल विकास विभाग के सहायक संचालक संजय जैन लगातार विवादों में घिरे हुए हैं। संजय जैन पर अब बिल पास करने के बदले 50 फीसदी कमीशन के आरोप लगे हैं। विभागीय आयुक्त निधि निवेदिता ने जैन को नोटिस जारी किया है। 15 दिनों में जवाब भी देने को कहा गया है। इसके पहले विभाग की एक महिला की कमर पकड़ने आरोप में उन पर छेड़छाड़ और SC-ST एक्ट के तहत FIR दर्ज हो चुकी है। हालांकि संजय जैन का कहना है कि यह उनके खिलाफ साजिश है। दैनिक भास्कर ने जैन से जुड़े चार बड़े मामलों की पड़ताल की है। दैनिक भास्कर ने जैन से जुड़े विवादों को देखा और उसने भी इसे लेकर बात की। पढ़िए रिपोर्ट… केस- 1: 50 फीसदी राशि की मांग
12 जनवरी 2026 को पिपरिया परियोजना अधिकारी अनिल कुमार चौधरी, माखननगर परियोजना अधिकारी सुषमा चौरसिया और जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 अमित कौर ने लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में सहायक संचालक पर राशि की अनुचित मांग और दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए गए। शिकायत के अनुसार, 20 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 तक जब जिला कार्यक्रम अधिकारी का प्रभार सहायक संचालक के पास था। इस दौरान केंद्र सरकार की योजना ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के तहत आवंटित बजट में से 50 प्रतिशत राशि देने के लिए दबाव बनाया। आरोपों के अनुसार, राशि नहीं देने पर कार्रवाई की धमकी दी गई। अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल कर डराया-धमकाया गया। यह भी आरोप है कि 50 प्रतिशत राशि वसूलने के लिए जिला कार्यालय में पदस्थ लिपिकीय स्टाफ पर भी दबाव बनाया गया। व्हाट्सएप कॉल के जरिए कार्रवाई की चेतावनी दी गई। केस- 2 : महिलाकर्मी से अश्लील हरकत करने के आरोप
संजय जैन के खिलाफ 20 दिन पहले छेड़छाड़ और SC/ST एक्ट का केस दर्ज किया गया था। उसी डिपार्टमेंट में काम करने वाली एक 42 साल की महिला ने शिकायत की। महिला ने बताया कि जब भी वह जैन के केबिन में जाती थी, तो वह उसे घूरता था। अक्सर उसका हाथ पकड़ लेता था। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि अगर वह मना करती तो उसे नौकरी से निकालने की धमकी देता था। 1 दिसंबर को दोपहर 2:30 बजे वह लंच के समय ऑफिस की छत पर टहल रही थी। जैन छत पर आया और उसकी कमर पकड़ी। छेड़छाड़ करने लगा। डर की वजह से किसी को नहीं बताया। इसका फायदा उठाकर जैन लगातार परेशान करने लगा। तंग आकर महिला ने 12 जनवरी को जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) ललित डहेरिया से शिकायत की। उन्होंने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। बोली- मैंने चिल्लाने की कोशिश की तो मुंह दबाया
महिला ने पुलिस को बताया- अक्टूबर 2025 में सहायक संचालक संजय कुमार जैन ने पद संभाला। उपस्थिति रजिस्टर को अपने केबिन में रखवा लिया। मैं इसमें साइन करने या किसी काम के सिलसिले में जैन के केबिन जाती थी, वह मुझे घूरता रहता था। कहता था कि तेरा नौकरी करना मुश्किल कर दूंगा। मैं उसकी हरकतों को नजरअंदाज करती रही। 1 दिसंबर 2025 को दोपहर में ऑफिस की छत पर घूम रही थी, तभी संजय जैन आया और पीछे से मेरी कमर पकड़ ली। छाती पर हाथ लगाया। चिल्लाने की कोशिश की तो उसने मेरा मुंह दबा दिया। धमकाते हुए बोला कि अगर किसी को बताया तो नौकरी नहीं करने दूंगा। जान से खत्म करने की धमकी भी दी। डर के कारण मैं चुप रही, लेकिन उसने और अधिक परेशान करना शुरू कर दिया। वह अलग-अलग तरीके से परेशान करता है। पिछले तीन महीने से प्रताड़ना सह रही हूं। परेशान होकर परिवार की सहमति से जिला कार्यक्रम अधिकारी से लिखित शिकायत करने का फैसला लिया, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। सहायक संचालक बोले- अगले दिन ऑफिस नहीं पहुंचे
हालांकि, असिस्टेंट डायरेक्टर संजय जैन ने आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि महिला लगातार गैरहाजिर रहती है। फरवरी 2025 में, वह 11 दिनों के लिए गैरहाजिर थी। DPO ने 11 महीनों में फरवरी, मार्च, सितंबर और अक्टूबर 2025 में चार नोटिस जारी किए। ऑफिस के काम में रुकावट के कारण मैंने दिसंबर 2025 में कंपनी को दूसरे कर्मचारी को भर्ती करने के लिए लिखा था। इसी वजह से वह मुझ पर झूठे आरोप लगा रही है। मेरे चैंबर में ट्रांसपेरेंट कांच लगा है, जिससे हर हरकत बाहर से दिखाई देती है। इस बीच FIR दर्ज होने के अगले दिन संजय जैन महिला एवं बाल विकास विभाग के ऑफिस में नहीं आए। उन्होंने इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोपों से इनकार किया। केस – 3: विधानसभा को गुमराह किया, सस्पेंड हुए
संजय जैन जब भिंड जिले में जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) के पद पर पदस्थ थे, तब उन्हें सस्पेंड किया जा चुका है। उन पर आरोप था कि उन्होंने विधानसभा में आंगनवाड़ी केंद्रों और स्व-सहायता समूहों को सामग्री वितरण व परिवहन से जुड़ी गलत जानकारी दी थी। भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह और गोहद विधायक केशव देसाई ने विधानसभा में सवाल पूछा था। तारांकित प्रश्न के जवाब में बताया गया कि भिंड जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों को सामग्री देने के लिए कोई निविदा जारी नहीं की गई। बाद में 10 मार्च 2025 को संशोधित उत्तर भेजा गया, जिसमें लिखा गया कि टेक होम राशन के परिवहन के लिए निविदा जारी की गई थी। इस तरह एक ही प्रश्न पर दो अलग-अलग जवाब भेजे गए, जिससे शासन को गलत जानकारी मिली। इसी तरह, आंगनवाड़ी केंद्रों तक टेक होम राशन पहुंचाने के लिए 25 अक्टूबर 2024 को एमपी टेंडर पोर्टल पर निविदा जारी की गई थी। तीन से कम निविदाएं मिलने पर 5 फरवरी 2025 को पत्र जारी कर निविदा निरस्त कर दी गई। लेकिन इसकी सूचना टेंडर पोर्टल पर 11 मार्च 2025 को अपलोड की गई, जबकि संशोधित जवाब 10 मार्च 2025 को विधानसभा में भेजा जा चुका था। निविदा निरस्तीकरण की सूचना समय पर अपलोड नहीं करने से भ्रम की स्थिति बनी और शासन व निविदाकारों को गुमराह किया गया। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि तथ्यों को सही समय पर सार्वजनिक नहीं किया गया। हालांकि संजय जैन के अनुसार, उन्होंने सस्पेंड की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। कोर्ट ने सस्पेंड आदेश को अनुचित मानते हुए बहाली के आदेश दिए। केस- 4 : अनियमितता मामले में कार्रवाई लंबित
सहायक संचालक संजय जैन महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ आदिम जाति कल्याण विभाग में भी प्रभारी जिला संयोजक के रूप में पदस्थ रहे हैं। अनुसूचित जाति/जनजाति कार्य विभाग में सामग्री खरीदी में अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई थीं, जिनकी जांच कराई गई। इस मामले में लोकायुक्त ने मध्यप्रदेश शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग के उप सचिव को पत्र लिखा था। इसके आधार पर उप सचिव माधवी नागेन्द्र ने 1 दिसंबर को भिंड कलेक्टर और जनजातीय कार्य विभाग के उप सचिव को पत्र भेजा। पत्र में जांच समिति की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए बताया गया कि शिकायत के बिंदु क्रमांक 1, 3 और 6 सही पाए गए, जबकि बिंदु 2, 5, 7 और 8 गलत पाए गए। बिंदु क्रमांक 4 आंशिक रूप से सही पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर संजय जैन, जो उस समय आदिम जाति कल्याण विभाग भिंड में प्रभारी जिला संयोजक थे (मूल विभाग महिला एवं बाल विकास), के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही गई है। संजय जैन 25 फरवरी 2024 से 6 जनवरी 2025 तक महिला एवं बाल विकास विभाग भिंड में प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी और आदिम जाति कल्याण विभाग में अतिरिक्त प्रभार पर रहे। जांच रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के आधार पर कार्रवाई से पहले उनसे स्पष्ट अभिमत और संबंधित दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। अब तक इस मामले में कार्रवाई लंबित है। सहायक संचालक बोले- सारे आरोप निराधार
सहायक संचालक संजय जैन ऑन कैमरा कुछ भी कहने से बचे। उनका कहना है कि विभागीय स्तर पर जांच चल रही है। इसलिए कैमरे पर कुछ नहीं कहना। महिला ने जो आरोप लगाए हैं, वो निराधार हैं। महिला लगातार ऑफिस में अनुपस्थित रहती है। सार्थक एप पर वो उपस्थिति नहीं लगाती थीं। फरवरी 2025 में 11 दिन अनुपस्थित थीं। डीपीओ ललित डहेरिया ने 11 महीने में फरवरी, सितंबर, अक्टूबर, नवंबर 2025 में उन्हें कई नोटिस दिए। दफ्तर का काम प्रभावित होने से उन्हें हटाने के लिए डीपीओ ने आयुक्त को पत्र लिखा था। 19 दिसंबर से 4 जनवरी के बीच जब ललित डहेरिया अवकाश पर थे, तब डीपीओ का प्रभार मेरे पास था। उसी दौरान महिला कर्मी की जगह दूसरे कर्मचारी की भर्ती के लिए कंपनी को पत्र लिखा। इसी कारण वे मुझ पर झूठे आरोप लगा रही है। घटना की तारीख और समय पर, मैं अपने बच्चों को ऑफिस से लेने चक्कर रोड गया था। इसकी पुष्टि मेरे मोबाइल लोकेशन और चौराहे के CCTV फुटेज से हो सकती है। अगर कमीशन मांगे जाने का कोई सबूत हो तो बताएं उन्होंने ने कहा कि 9 CDPO में से सिर्फ दो ने ही 50% कमीशन मांगने के आरोप लगाए हैं। अगर उनके पास इस बारे में कोई ठोस सबूत है, तो बताएं। उनकी WhatsApp कॉलिंग हिस्ट्री की जांच होनी चाहिए। अधिकारियों के जरिए विधानसभा में जवाब भेजा विधानसभा में सवालों के जवाब भेजने के मामले में उनका कहना है कि उन्होंने जो जवाब भेजे थे, वे कमिश्नर, डिप्टी सेक्रेटरी और ACS के जरिए भेजे गए थे। गलत जवाब देने पर सस्पेंशन के मामले में हाई कोर्ट ने मुझे राहत दी थी। सस्पेंशन ऑर्डर को गलत बताया था। मुझे बहाल करने का आदेश दिया था। जनजातीय कार्य विभाग के जिला अधिकारी के तौर पर मेरे कार्यकाल के दौरान हुए मामले के बारे में, भिंड के तत्कालीन कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव पहले ही अपनी राय दे चुके हैं। नोटिस दिया, जांच चल रही है जिला कार्यक्रम अधिकारी ललित डहेरिया ने बताया- संजय जैन पर लगे आरोपों की बिंदुवार जांच की जा रही है। सीडीपीओ ने रुपए डिमांड करने के आरोप लगाए हैं। आयुक्त ने नोटिस जारी किया है। बयान लेकर जांच की जा रही है।
