भोपाल रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज हादसे में रेलवे जिस दलील के सहारे जिम्मेदारी से बचना चाहता था, उसे जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने सख्ती से खारिज कर दिया है। रेलवे का तर्क था कि ट्रेन से उतरते ही यात्री की यात्रा समाप्त हो जाती है और स्टेशन की सुविधाएं निःशुल्क होती हैं, इसलिए उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि फुटओवर ब्रिज रेल यात्रियों के लिए अनिवार्य सुविधा है और उसका स्लैब गिरना सीधे तौर पर रेलवे की लापरवाही तथा सेवा में कमी का प्रमाण है। आयोग ने माना कि यात्रियों के उपयोग में आने वाले फुटओवर ब्रिज का न तो सही ढंग से निर्माण किया गया था और न ही समय-समय पर उसका रखरखाव किया गया। यही लापरवाही एक बड़े हादसे का कारण बनी। इस हादसे में गंभीर रूप से घायल परिवादी खालिद बेग की मृत्यु 19 नवंबर 2023 को हो चुकी है। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल ने यह फैसला सुनाया। रेलवे का तर्क: फुटओवर ब्रिज हमारी जिम्मेदारी नहीं रेलवे की ओर से प्रस्तुत लिखित कथन में कहा है कि परिवाद में दर्ज पीएनआर से संबंधित टिकट, एफआईआर और मेडिकल दस्तावेज रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, जिन पर पृथक से जवाब देने की आवश्यकता नहीं है। रेलवे ने भारतीय रेल अधिनियम की धारा 2(14) का हवाला देते हुए कहा कि किराया केवल यात्री को ट्रेन में यात्रा कराने के लिए लिया जाता है। रेलवे के अनुसार, जैसे ही यात्री अपने गंतव्य स्टेशन पर उतरता है, उसकी यात्रा समाप्त हो जाती है। इसके बाद स्टेशन पर उपलब्ध सभी सुविधाएं निःशुल्क होती हैं। इसी आधार पर रेलवे ने परिवाद को प्रचलन योग्य नहीं मानते हुए उसे खारिज करने की मांग की। रेलवे ने अपने पक्ष में पश्चिम मध्य रेलवे, भोपाल मंडल के मंडल वाणिज्य प्रबंधक आर.के. पाराशर का शपथपत्र भी प्रस्तुत किया।
आयोग की टिप्पणी- जिम्मेदारी से नहीं बच सकता रेलवे आयोग ने रेलवे के पूरे तर्क को अस्वीकार कर दिया। आदेश में कहा गया कि परिवादी रेलवे द्वारा संचालित ट्रेन से यात्रा कर रहा था और रेलवे द्वारा निर्मित फुटओवर ब्रिज से स्टेशन के बाहर निकल रहा था, तभी ब्रिज का स्लैब गिर गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि फुटओवर ब्रिज का उपयोग यात्रियों द्वारा एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तथा स्टेशन से बाहर निकलने के लिए अनिवार्य रूप से किया जाता है। ऐसे में इसका सुरक्षित निर्माण और समय-समय पर रखरखाव सुनिश्चित करना रेलवे का दायित्व है। आयोग ने तीखे शब्दों में कहा फुटओवर ब्रिज का स्लैब गिरना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि न तो ब्रिज का निर्माण उचित सामग्री से किया गया और न ही उसका समय-समय पर रखरखाव किया गया। इसलिए रेलवे अपनी उपेक्षा और दायित्व से मुक्त नहीं हो सकता। आयोग ने स्पष्ट रूप से माना कि यह मामला सेवा में कमी का है। यह थी घटना 13 फरवरी 2020 को संपर्क क्रांति एक्सप्रेस भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंची थी। स्टेशन पर बने फुटओवर ब्रिज से यात्रियों के गुजरने के दौरान अचानक लगभग 10×10 वर्गफुट का कंक्रीट स्लैब भरभराकर नीचे गिर गया। हादसे में 10 से 15 यात्री मलबे में दब गए। यात्रियों और पुलिस की मदद से घायलों को बाहर निकाला गया। घायलों में यात्री खालिद बेग भी शामिल थे। वे संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से काचीगुड़ा (हैदराबाद) से भोपाल पहुंचे थे और ट्रेन से उतरने के बाद परिजनों के साथ प्लेटफॉर्म नंबर-2 से बाहर निकल रहे थे। हादसा उस वक्त हुआ जब गुरुवार सुबह करीब 9:03 बजे संपर्क क्रांति एक्सप्रेस भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर आकर रुकी थी। यात्री उतर ही रहे थे कि अचानक जोरदार आवाज के साथ फुटओवर ब्रिज का रैंप टूटकर गिर गया। चीख-पुकार मच गई। कई यात्री मलबे में दब गए, कई लहूलुहान हो गए। चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के वक्त भी ब्रिज पर यात्रियों की भीड़ थी। आरपीएफ, जीआरपी और एनडीआरएफ ने तुरंत राहत-बचाव शुरू किया। एक ही परिवार के सात लोग घायल
इस ट्रेन से हैदराबाद से एक ही परिवार के 34 लोग शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। हादसे में इसी परिवार के 7 लोग घायल हो गए। सभी पुराने शहर के निवासी बताए गए। घायलों में मंगलवारा छावनी निवासी खालिद बेग भी शामिल थे, जिन्हें रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी। लंबा इलाज, फिर मौत
आयोग ने माना कि रेलवे की उपेक्षा और लापरवाही से हुई दुर्घटना में परिवादी को शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं और रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर हुआ। वह लंबे समय तक इलाजरत रहा। हादसे से पहले खालिद बेग मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाते थे, लेकिन दुर्घटना के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। हाल ही में उनकी मौत हो चुकी है, जिसने इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट, लंबा और महंगा इलाज
हादसे में खालिद बेग के पैर और घुटने के साथ रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर हुआ। उन्हें भोपाल के चिरायु अस्पताल सहित कई निजी और सरकारी अस्पतालों में लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा। आयोग ने माना कि रीढ़ की हड्डी की चोटें अत्यंत गंभीर थीं और इलाज में कम से कम 5 लाख रुपए का खर्च प्रमाणित है। हादसे से पहले खालिद बेग फर्नीचर का काम कर हर माह 30 से 40 हजार रुपए की आय अर्जित करते थे, लेकिन दुर्घटना के बाद उनकी शारीरिक क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो गई। पांच साल तक चली सुनवाई
अधिवक्ता अरुण सिंह राणा ने बताया कि उस दिन खालिद संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से यात्रा कर भोपाल स्टेशन पहुंचे यात्रियों पर प्लेटफॉर्म का छज्जा रेलवे की लापरवाही से गिर गया। हादसे में खालिद बेग अपने पांच रिश्तेदारों के साथ गंभीर रूप से घायल हुए। शुरुआत में रेलवे और रेलवे अस्पताल ने इलाज कराया, लेकिन बाद में हाथ खड़े कर दिए। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो न्यायालय की शरण ली गई। करीब पांच साल चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने रेलवे की लापरवाही मानते हुए 6.25 लाख रुपए और ब्याज देने का आदेश दिया। साथ ही ऐसे मामलों में रेलवे की असंवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए। रेलवे को मुआवजा देने का आदेश
आयोग ने रेलवे को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 6 लाख 35 हजार रुपए मुआवजा और 3 हजार रुपए परिवाद व्यय अदा करने का आदेश दिया है। तय समय में भुगतान नहीं होने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थायी विकलांगता का प्रमाण पत्र न होने के कारण भविष्य की आय-क्षति का अलग से आकलन नहीं किया जा सका। यह हुए थे उस दिन घायल
हादसे में यह हुए घायल आरिफ नगर निवासी नाहिदा जहां (40) पत्नी अजहर खान, उनका बेटा अयान (15), अमान (19) जेल रोड निवासी सलीमउर्रहमान (40), खलीलुर्रहमान (38), मंगलबारा छावनी निवासी खालिद बेग (38), विदिशा, अहीर मोहल्ला निवासी मरियम (20) पत्नी एजाज और विदिशा निवासी अनुपम शर्मा (31) शामिल हैं। इनके अलावा एक और व्यक्ति मामूली घायल हुआ था।
