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भोपाल के होम्योपैथी वैलनेस सेंटर को राष्ट्रीय सम्मान:लकवा समेत जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के सवा लाख मरीजों का हुआ सफल इलाज

भोपाल स्थित आयुष परिसर के शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय चिकित्सालय के होम्योपैथी वैलनेस सेंटर को आयुष और इंटीग्रेटिव मेडिसिन के क्षेत्र में नवाचार के लिए ‘आयुष एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन इनोवेशन सम्मान-2026’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उत्तराखंड शासन के सेतु आयोग द्वारा दिया जा रहा है। सम्मान समारोह 19 मार्च 2026 को देहरादून में आयोजित होगा। देशभर में नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिए जाने वाले इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए भोपाल का यह केंद्र चुना गया है। खास बात यह है कि यह देश का एकमात्र शासकीय संस्थान है। जिसे आयुष और इंटीग्रेटिव मेडिसिन के क्षेत्र में यह सम्मान प्राप्त हो रहा है। यह सम्मान इसलिए दिया जा रहा है, क्योंकि सेंटर में अब तक सवा लाख से अधिक मरीजों को उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं दी जा चुकी हैं। जिसमें हड्डी और जोड़ों की समस्याएं, लकवा (पक्षाघात), मोटापा, हाइपोथायरायडिज्म, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के सफल उपचार शामिल हैं। 2016 से संचालित हो रहा वैलनेस सेंटर भोपाल के आयुष परिसर में स्थित यह होम्योपैथी वैलनेस सेंटर वर्ष 2016 से संचालित हो रहा है। वर्ष 2024 में इसे एक नए और आधुनिक भवन में स्थापित किया गया। इस केंद्र की स्थापना में प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह केंद्र केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद, भारत सरकार के सहयोग से संचालित किया जाता है। यहां होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा और योग के माध्यम से रोगियों के उपचार के साथ-साथ स्वस्थ लोगों को भी स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। सवा लाख से अधिक लोगों को मिल चुकी सेवाएं होम्योपैथी वैलनेस सेंटर में अब तक सवा लाख से अधिक मरीजों को उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं दी जा चुकी हैं। यहां मध्यप्रदेश शासन और आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। इन विशेषज्ञों का उद्देश्य विभिन्न बीमारियों की समय पर पहचान कर उनका प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर रोगों को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके। कई जीवनशैली संबंधी रोगों में मिल रहा लाभ संस्था के प्रधानाचार्य डॉ. एस.के. मिश्रा ने बताया कि कई कठिनाइयों के बावजूद होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में इस केंद्र की स्थापना की गई। केंद्र सरकार के सहयोग और विशेषज्ञों के लगातार प्रयासों से यह केंद्र अब बड़ी संख्या में मरीजों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। यहां हड्डी और जोड़ों की समस्याएं, लकवा (पक्षाघात), मोटापा, हाइपोथायरायडिज्म, डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के सफल उपचार शामिल हैं। रिसर्च के लिए भी बना अहम केंद्र इस केंद्र में मिल रहे बेहतर परिणामों के कारण भारत सरकार की विभिन्न अनुसंधान परिषदों द्वारा यहां व्यापक और विस्तृत शोध कार्य भी किए जा रहे हैं। वर्तमान में पक्षाघात और थायराइड जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या यहां अधिक है, जिन्हें उपचार से लाभ मिल रहा है। देश के लिए बन रहा मॉडल केंद्र की नोडल अधिकारी डॉ. जूही गुप्ता ने बताया कि यह केंद्र होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा का एक अनूठा संगम है, जिसका पहले कोई उदाहरण नहीं था। आयुष मंत्रालय और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से यह केंद्र अब पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन गया है। देश के कई होम्योपैथिक और प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय यहां की कार्यप्रणाली का अध्ययन कर इसी तरह के केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। होम्योपैथी वैलनेस सेंटर से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति दूरभाष क्रमांक 0755-2992970 पर संपर्क कर सकते हैं।

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