भोपाल में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का एक चिंताजनक सच सामने आया है। जिला स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित अस्पतालों में 23% डॉक्टरों के पद खाली हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि आज तक एक भी स्किन स्पेशलिस्ट की नियुक्ति नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि चर्म रोग से पीड़ित मरीजों को या तो अन्य विशेषज्ञों से इलाज कराना पड़ रहा है या फिर एम्स और हमीदिया जैसे बड़े अस्पतालों की लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ता है। विधानसभा 2026 के प्रश्नोत्तर में यह स्थिति उजागर हुई है। इस मामले में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि रिक्त पदों की पूर्ति एक निरंतर प्रक्रिया है और निश्चित समय सीमा बताना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हेल्थ सेंटर्स पर उपकरण, पैथोलॉजी लैब और दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था है। इसलिए जरूरी स्किन विशेषज्ञ भोपाल में हर साल स्किन से जुड़ी बीमारियों के 70 हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। ये आंकड़े हमीदिया अस्पताल और एम्स भोपाल के हैं। इसके बावजूद जिला स्वास्थ्य विभाग के अधीन किसी भी अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं है। साल 2025 में राज्य स्तरीय मानक के तहत जेपी अस्पताल में एक स्किन स्पेशलिस्ट का पद स्वीकृत किया गया, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हुई। वर्तमान में मरीजों का इलाज मेडिसिन विशेषज्ञ या मेडिकल ऑफिसर कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गलत या अधूरा इलाज होने से रोग लंबे समय तक बना रहता है और कई बार दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। इससे इलाज और कठिन हो जाता है। जेपी अस्पताल: 17 विशेषज्ञों के पद खाली राजधानी के प्रमुख जिला अस्पताल जेपी अस्पताल में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां 17 विशेषज्ञों के पद खाली हैं। पूरे अस्पताल का संचालन करने वाला सिविल सर्जन का पद भी खाली है। फिलहाल डॉ. संजय जैन को प्रभार दिया गया है। डॉ. जैन ही ईको जांच करते हैं। सिविल सर्जन का अतिरिक्त दायित्व मिलने के बाद ईको जांच कक्ष अक्सर बंद रहता है। गर्भवती और नवजात के लिए भी विशेषज्ञों की कमी कैलाशनाथ काटजू जच्चा-बच्चा अस्पताल में भी स्थिति बेहतर नहीं है। यहां मेडिसिन विशेषज्ञ के दोनों पद खाली हैं। एनएचएम के पूर्व संचाकल डॉ. पंकज शुक्ला के अनुसार, नवजात और गर्भवती महिलाओं के लिए बने इस अस्पताल में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाएं भी आती हैं। जिनके इलाज के लिए मेडिसिन स्पेशिलिस्ट का होना बेहद जरूरी है। बैरासिया: 6 साल से मेडिसिन विशेषज्ञ नहीं सिविल अस्पताल बैरासिया में मई 2020 से मेडिसिन विशेषज्ञ का पद खाली है। 2023 में सर्जरी और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के पद खाली हुए, जो अब तक नहीं भरे गए। 2024 में अस्थी रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ और 4 मेडिकल ऑफिसर के पद भी खाली हो गए। छह साल से विशेषज्ञ न होना ग्रामीण मरीजों के लिए बड़ी परेशानी है। उन्हें इलाज के लिए लंबा सफर कर हमीदिया, जेपी या एम्स भोपाल आना पड़ता है। जिन मरीजों को इमरजेंसी होती है, वे गोविंदपुरा और बैरागढ़ की स्थिति सिविल अस्पताल गोविंदपुरा में 2024 से अधीक्षक का पद खाली है। संचालन व्यवस्था प्रभावित है। यहां स्त्री रोग, मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपैडिक, रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट समेत 2 मेडिकल ऑफिसर के पद खाली हैं। सिविल अस्पताल बैरागढ़ में स्त्री रोग और अस्थी रोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं, जिससे हड्डी रोगियों को अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी खाली विशेषज्ञों की कमी से मरीजों को यह परेशानी
