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भोजशाला विवाद- हाईकोर्ट में हुई सुनवाई:वक्फ बोर्ड और राम मंदिर की जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कोर्ट के सामने रखा

इंदौर में भोजशाला मंदिर से जुड़े मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के दूसरे दिन मंगलवार को भी बहस जारी रही। इस दौरान क्रमवार सबसे पहले हिंदू पक्षकार को सुना गया। हिन्दू पक्षकार की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने तर्कों के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज और ऐतिहासिक संदर्भ कोर्ट के सामने रखे। हिंदू पक्ष ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए कोर्ट में कहा कि “Once a temple, always a temple”, यानी एक बार मंदिर रहा स्थल हमेशा मंदिर ही माना जाएगा। इस तर्क के समर्थन में विभिन्न न्यायिक फैसलों और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख किया गया। जबकि मुस्लिम पक्ष ने भोजशाला को वक्फ की संपत्ति बताते हुए अपना दावा पेश किया। इसके जवाब में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने 2025 के वक्फ कानून का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि किन-किन परिस्थितियों में कोई संपत्ति वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आ सकती है। हिंदू पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि पुराने इतिहास की किताबों में भोजशाला को राजा भोज के समय संस्कृत पाठशाला बताया गया है, जिसके प्रमाण भी कोर्ट में पेश किए गए। यह तर्क भी रखा गया कि धार भोजशाला से जुड़ी सरस्वती माता की मूर्ति लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में संरक्षित है, जो इस स्थान के मंदिर होने का एक महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है। कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत बहस जारी रही और कई ऐतिहासिक व कानूनी पहलुओं पर चर्चा हुई। वही जैन बंधु को ओर से भी याचिका पर भी क्रम वार सुनवाई की जाएगी । मामले की अगली सुनवाई बुधवार दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक तय की गई है, जिसमें बहस आगे बढ़ेगी। बता दें इस मामले में कुल 5 याचिकाएं दायर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- हाईकोर्ट देगा फैसला मामले में पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कि भोजशाला विवाद का अंतिम निर्णय अब हाईकोर्ट ही करेगा। कोर्ट ने कहा था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और पक्षकारों की आपत्तियों पर हाईकोर्ट अंतिम सुनवाई में विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी पक्षों को ASI की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा चुकी है और उस पर दर्ज आपत्तियों के साथ-साथ वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी से जुड़े बिंदुओं पर भी हाईकोर्ट गंभीरता से विचार करेगा। यदि नई आपत्तियां सामने आती हैं, तो उन पर भी सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा। साथ ही, शीर्ष अदालत ने यह निर्देश भी बरकरार रखा कि भोजशाला परिसर के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और 7 अप्रैल 2003 को ASI द्वारा जारी आदेश का पालन जारी रहेगा। जानिए…ASI की सर्वे रिपोर्ट में क्या सामने आया धार स्थित भोजशाला को लेकर ASI की सर्वेक्षण रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जा चुकी है। रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य और शिलालेखों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन द्वारा कराए गए निर्माण और सांस्कृतिक कार्यों के प्रमाण मिले हैं। पूरे परिसर में कुल 106 स्तंभ पाए गए हैं, जिन पर अलग-अलग प्रकार की नक्काशी और डिजाइन मौजूद हैं। इसके अलावा 32 शिलालेख भी मिले हैं। इन शिलालेखों में राजा भोज के काल के लेखन के साथ-साथ अर्जुन वर्मन के राजगुरु मदन द्वारा रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के अंशों का उल्लेख है। कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी में मालवा में मुस्लिम आगमन और शासन स्थापना का भी उल्लेख है। 1389 ईस्वी में दिलावर खान (मूल नाम हुसैन) को दिल्ली से मालवा का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। बाद में उन्होंने धार को राजधानी बनाकर 1401 ईस्वी में स्वतंत्र शासन स्थापित किया। रिपोर्ट में दर्ज इन तथ्यों के आधार पर आगे ऐतिहासिक और कानूनी बहस की संभावना जताई जा रही है।

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