मध्य प्रदेश में नदियों से अवैध रेत खनन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। अब यह मुद्दा लोकसभा में भी उठाया गया। सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान भिंड से बीजेपी सांसद संध्या राय ने सिंध नदी में हो रहे अवैध रेत खनन का मामला उठाया। संध्या राय ने कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र के भिंड और दतिया जिले सिंध नदी से जुड़े हैं, और नदी के किनारे का बड़ा हिस्सा वन विभाग के अंतर्गत आता है। उन्होंने बताया कि सरकार वन और नदियों के संरक्षण के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन कुछ आपराधिक तत्व वन क्षेत्र के जरिए अवैध रेत खनन कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने सरकार से इस पर ठोस कदम उठाने की मांग की। इस पर वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार वन और पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने माना कि संबंधित क्षेत्र में नदी किनारे जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि यह गंभीर विषय है और ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रदेश सरकार के पास पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, जिनके जरिए रेत और वन माफियाओं पर कार्रवाई की जा सकती है। वीडी शर्मा ने पूछा- NIT जैसे संस्थान की मांग खजुराहो सांसद वीडी शर्मा ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान बुंदेलखंड में उच्च शिक्षा संस्थान स्थापित करने की मांग उठाई। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से अपने संसदीय क्षेत्र सहित बुंदेलखंड के युवाओं के बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा के विस्तार को लेकर सवाल किया। उन्होंने ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT)’ जैसे संस्थान की स्थापना के संबंध में केंद्र सरकार की योजना के बारे में जानकारी मांगी। सतना सांसद ने स्कूलों के बजट का मुद्दा उठाया लोकसभा में प्रश्नकाल में ही सतना सांसद गणेश सिंह ने स्कूलों के बजट का मामला उठाया। मप्र में सतना संसदीय क्षेत्र में समग्र शिक्षा योजना के तहत स्कूलों के नए भवन और बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जब मंत्री से जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि बजट के आवंटन की कमी है। क्या मंत्री जी राज्य के साथ बैठकर कोई इस तरह की समीक्षा करेंगे? मंत्री ने कहा- जो निवेश हो सकता था, शायद नहीं हो पाया शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा- सांसद जी ने कहा है कि बजट की कमी के कारण आधारभूत संरचना में जो निवेश मध्य प्रदेश में हो सकता था वो शायद नहीं हो पाया। ऐसी जानकारी की मैं सदन में पुष्टि नहीं कर सकता। समग्र शिक्षा में जो भी प्रस्ताव होते हैं वो राज्य सरकार अपनी प्राथमिकता के अनुरुप यूडाइस प्लस में जो जहां गैप दिखता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर में जो कमी यूडाइस पर दिखती है केंद्र सरकार आंकडे़ देखकर पीएबी प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड में राज्य की सुनवाई होती है और समन्वय बनाकर बातचीत करके तय करते हैं और उसी के हिसाब से बजट आवंटन होता है।
