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भावनगर में वकील और डिस्ट्रिक्ट जज के बीच बहस:विजय जुलूस में शोर सुनकर जज पहुंचे, वकील ने कहा- आप जाकर अपनी कुर्सी संभालिए

गुजरात में भावनगर जिला कोर्ट में बुधवार सुबह विजय जुलूस निकाल रहे वकील और डिस्ट्रिक्ट जज के बीच तीखी बहस हो गई। आवेश में आकर वकील ने जज से यहां तक कह दिया कि आप कौन हैं? क्या आप मुझे जानते हैं? आप जाकर अपनी कुर्सी संभालिए। इसी दौरान कुछ वकील जज को शांत कराकर कोर्ट रूम में ले गए तीसरी बार चुनाव जीते थे वकील
यह विजय जुलूस गुजरात बार एसोसिएशन के सदस्य के रूप में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने वाले जाने-माने वकील अनिरुद्धसिंह झाला के स्वागत में निकल रहा था। ढोल-नगाड़े पर समर्थक वकील नाच रहे थे। इसी समय अदालत की कार्यवाही भी चल रही थी। इसलिए जज ने इस शोर पर आपत्ति जताई तो वकील अनिरुद्धसिंह उन पर भड़क उठे। वकील ने जज पर इस तरह टिप्पणी की…
माहौल उमंग भरा था, शायद इसीलिए ऊंची आवाज में बात हो गई: वकील
बाद णें अधिवक्ता अनिरुद्ध सिंह झाला ने कहा- मैंने बार काउंसिल चुनाव जीतकर हैट्रिक बनाई है। इसीलिए भावनगर के मेरे सभी वकील बहुत उत्साहित थे। उन लोगों ने कहा- सर, हमें आपका विजय जुलूस निकालना है। इसीलिए आज सुबह 10:30 बजे रूपम चौक से कोर्ट गेट तक मेरा विजय जुलूस निकाला गया। इसीलिए हम ढोल-नगाड़े बजा रहे थे और पटाखे फोड़ रहे थे। डिस्ट्रिक्ट जज सड़क पर आकर हमें ढोल बजाना बंद करने को कहने लगे। मैंने उनसे कहा- महोदय, आज ढोल बजाना ही हमारा त्योहार है। माहौल इतना उमंग भरा था। इसीलिए उनसे ऊंची आवाज में बात हो गई होगी। इसके अलावा और कोई मामला नहीं था। वकील के खिलाफ कार्रवाई की मांग
गुजरात न्यायिक सेवा संघ ने वकील अनिरुद्धसिंह झाला के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए हाईकोर्ट और गुजरात बार काउंसिल को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि भावनगर में गुजरात बार काउंसिल चुनाव में विजयी उम्मीदवार अधिवक्ता अनिरुद्धसिंह झाला की विजय यात्रा के दौरान डिस्ट्रिक्ट जज ने अदालत की कार्यवाही में बाधा डाली गई। इस दौरान अनिरुद्धसिंह झाला ने प्रधान जिला न्यायाधीश के साथ अभद्र व्यवहार भी किया। गुजरात न्यायिक सेवा संघ ने मांग की है कि गुजरात उच्च न्यायालय अधिवक्ता अनिरुद्धसिंह झाला के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही करे और बार काउंसिल अनिरुद्धसिंह झाला के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। प्रधान जिला न्यायाधीश के प्रति अशोभनीय व्यवहार न्यायिक गरिमा का अपमान है। यह वकीलों की युवा पीढ़ी को गलत संदेश देता है। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि न्यायाधीश भयमुक्त वातावरण में कार्य कर सकें। गुजरात न्यायिक सेवा संघ ने भावनगर के प्रधान जिला न्यायाधीश के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है। —————–

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