खजुराहो अपने सुंदर मंदिरों के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन यहां का एक पुराना हनुमान मंदिर अपनी खास कहानी के लिए भी जाना जाता है। कहते हैं कि सिकंदर लोधी और महमूद गजनवी जैसे बड़े हमलावर भी इस मंदिर को कभी जीत नहीं पाए और हनुमान जी के तेज के आगे उन्हें हार माननी पड़ी। यह मंदिर मुख्य मंदिरों से थोड़ी दूर पुरानी बस्ती के रास्ते पर पड़ता है। इतिहासकारों और मंदिर के लेखों के मुताबिक, इस मंदिर को साल 922 में चंदेल राजा हर्ष सिंह ने बनवाया था। यानी यह मंदिर करीब 1100 साल पुराना है। यहां हनुमान जी की 3 मीटर ऊंची मूर्ति है। स्थानीय लोग इन्हें बड़े प्यार से ‘गैल के बब्बा जू’ कहते हैं, जिसका मतलब है ‘रास्ते वाले बाबा’, क्योंकि यह पुरानी बस्ती के मेन रोड पर स्थित है। जब भौरों ने खदेड़ी हमलावरों की सेना गाइड ब्रज गोपाल अवस्थी बताते हैं कि इस मंदिर से कई चमत्कारी किस्से जुड़े हैं। कहा जाता है कि जब विदेशी हमलावरों ने खजाने के लालच में यहां हमला किया, तो हनुमान जी की मूर्ति से भौरों का एक बहुत बड़ा झुंड निकला। इन भौरों ने हमलावर सेना को ऐसा खदेड़ा कि उन्हें भागना पड़ा। इसी वजह से इन्हें ‘भंवरवीर हनुमान’ भी कहा जाने लगा। आज भी लोग मानते हैं कि कोई इनकी आंखों में आंखें डालकर नहीं देख सकता। सिकंदर लोधी के हथियार भी पड़ गए थे फीके समाजसेवी परशुराम तिवारी का कहना है कि 15वीं सदी में जब सिकंदर लोधी ने यहां हमला किया, तो हनुमान जी की शक्ति के आगे उसके हथियार भी काम नहीं आए और उसे पीछे हटना पड़ा। खजुराहो के आसपास के इलाके में करीब 35 हनुमान मंदिर हैं, लेकिन इस मूर्ति को सबसे ज्यादा ताकतवर माना जाता है। लोगों का विश्वास है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। अब एएसआई करता है देखरेख पहले यह मूर्ति एक खुले चबूतरे पर थी, लेकिन अब इसकी सुरक्षा के लिए एएसआई (ASI) ने ऊपर टीनशेड लगवा दिया है। यहां का माहौल इतना शांत और जीवंत है कि हनुमान जयंती पर हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
