बोत्सवाना से आठ चीतों की खेप शनिवार को मध्यप्रदेश आएगी। केंद्रीय वन मंत्री चीतों को कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में रिलीज करेंगे। इनमें 6 मादा और दो नर शामिल हैं। इसके साथ ही भारत में चीतों की संख्या 39 से बढ़कर 47 हो जाएगी। इसे लेकर कूनो में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केन्द्रीय मंत्री सुबह 7.30 बजे नई दिल्ली से विशेष विमान से रवाना होकर प्रातः 8.30 बजे ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयरपोर्ट पहुंचेगे। यहां से 8.50 बजे ग्वालियर से हेलिकॉप्टर की मदद से कूनो नेशनल पार्क के लिए प्रस्थान करेंगे। प्रातः 9.20 बजे कूनो स्थित हेलिपेड पहुंचेंगे। यहां बोत्सवाना से लाए जा रहे चीतों को कूनो पार्क मे छोड़ेंगे। इसके बाद वन मंत्री सुबह 10 बजे ग्वालियर के लिए प्रस्थान करेंगे। वर्तमान में भारत में 39 चीते वर्तमान में भारत में 39 चीते हैं। इनमें 36 कूनो नेशनल पार्क में और तीन गांधी सागर अभयारण्य में हैं। 17 सितंबर 2022 को लाए गए 8 नामीबियाई चीतों में से 3 स्थापित हैं। उनके 17 भारतीय जन्मे शावकों समेत नामीबियाई मूल की आबादी 20 हो गई है। वहीं, 18 फरवरी 2023 को लाए गए 12 दक्षिण अफ्रीकी चीतों में से 8 स्थापित हैं। उनके 11 भारतीय जन्मे शावकों समेत कुल दक्षिण अफ्रीकी मूल की आबादी 19 हो गई है। इनमें से 16 कूनो में व 3 गांधीसागर में हैं। बता दें कि नौ दिन पहले नामीबियाई मादा चीता गामिनी ने तीन शावकों को जन्म दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। प्रोजेक्ट को करीब साढ़े तीन साल हो चुके हैं। कूनो का जंगल चीतों के प्रजनन के लिए अनुकूल साबित हुआ है। 2010 में हुआ कूनो का चुनाव भारत में वर्ष 1952 में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद से ही चीतों को फिर से स्थापित करने की योजना चल रही थी। इसी उद्देश्य से सितंबर 2009 में राजस्थान के गजनेर में चीता विशेषज्ञों की एक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में चीता संरक्षण कोष के डॉ. लोरी मार्कर, स्टीफन जेओ ब्रायन और अन्य विशेषज्ञों ने दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की सिफारिश की थी। पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर वर्ष 2010 में भारतीय वन्यजीव संस्थान (वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट) ने भारत में चीता पुनर्स्थापना के लिए संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया था, जिसमें कूनो को सबसे अनुकूल पाया गया। जिसमें 10 स्थलों के सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के नौरादेही अभयारण्य, कूनो पालपुर अभ्यारण एवं राजस्थान के शाहगढ़ को उपयुक्त पाया गया, इन तीनों में से भी कूनो अभ्यारण्य जो वर्तमान में कूनो राष्ट्रीय उद्यान है, सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया। गाइडलाइन और प्रोटोकॉल का पालन
भारत में चीतों को बसाने के लिए कूनो नेशनल पार्क में निर्धारित प्रोटोकॉल और गाइडलाइन के अनुसार कार्य किया जा रहा है। परियोजना के एकीकृत प्रबंधन में कूनो के राष्ट्रीय उद्यान के 750 वर्ग किलोमीटर में चीतों के रहवास के लिए उपयुक्त है। इसके अतिरिक्त करीब 3 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र दो जिलों श्योपुर और शिवपुरी में चीतों के स्वंच्छद वितरण के लिए उपयुक्त हैं। कूनो राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से लगे हुए ग्रामों के लोगों को चीता मित्र बनाया गया है। यहां चीतों के रहवास के लिए अनुकूल परिस्थितियों का विकास किया गया है। पानी की व्यवस्था के साथ आवश्यक सिविल कार्य भी किए गए हैं। कूनो में शिकार का घनत्व चीतों के लिए पर्याप्त है।
