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बैतूल स्कूल भवन तोड़ने का मामला राज्यसभा में उठा:इमरान प्रतापगढ़ी बोले- मुसलमान स्कूल बनाए तो घर गिरा दिया जाता है

बैतूल जिले के भैंसदेही तहसील के ढाबा गांव में एक मुस्लिम युवक अब्दुल नईम द्वारा बनाए जा रहे स्कूल भवन को प्रशासन द्वारा तोड़े जाने का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाया, जिसके बाद यह विवाद राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। इमरान प्रतापगढ़ी ने यह मामला गुरुवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान उठाया। उस समय उपसभापति हरिवंश सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे थे। प्रतापगढ़ी को इस मुद्दे पर बोलने के लिए तीन मिनट का समय मिला था। बोले- नफरत फैलाने वालों को संरक्षण मिल रहा
प्रतापगढ़ी ने अपने भाषण की शुरुआत एक शेर से की, जिसमें उन्होंने कहा कि “बात दलीलों से तो रद्द होती है, उनके होंठों की खामोशी भी सनद होती है। कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़े सुखन, ज़ुल्म सहने से भी जालिम की मदद होती है।” उन्होंने आगे कहा कि यह देश ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां अमन और मोहब्बत की बात करने वालों पर कार्रवाई होती है, जबकि नफरत फैलाने वालों को संरक्षण मिलता है। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि यह ‘नया भारत’ है, जहां असम के मुख्यमंत्री मुसलमानों को राज्य छोड़ने पर मजबूर करने की बात करते हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नीट परीक्षा पास करने वाले 50 में से 42 मुस्लिम बच्चों के बाद मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने का भी जिक्र किया। बैतूल के मामले को ‘नया भारत’ बताया
प्रतापगढ़ी ने बैतूल के मोहम्मद नईम के मामले को भी ‘नए भारत’ का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि नईम बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल बनवा रहा था, लेकिन उसका भवन इसलिए गिरा दिया गया क्योंकि वह मुसलमान था और शिक्षा देना चाहता था। इस मामले की जानकारी देते हुए बताया गया कि ढाबा गांव निवासी अब्दुल नईम ने अपनी व्यावसायिक डायवर्शन वाली जमीन पर लगभग 20 लाख रुपये की लागत से एक स्कूल भवन का निर्माण कराया था। उनका उद्देश्य गांव के बच्चों को नर्सरी से आठवीं तक की शिक्षा प्रदान करना था। नईम ने इस स्कूल के लिए पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मांगा था। उन्होंने 30 दिसंबर को माध्यमिक शिक्षा मंडल और स्कूल शिक्षा विभाग में भी अनुमति के लिए आवेदन जमा किया था। लेकिन जनवरी में पंचायत ने बिना अनुमति निर्माण का हवाला देते हुए नोटिस जारी किया और एसडीएम अजीत मरावी की मौजूदगी में भवन को अतिक्रमण बताते हुए जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। इस घटना के बाद नईम ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कहा था कि अगर उनका भवन तोड़ा गया तो वे परिवार सहित आत्मदाह कर लेंगे।
ओवैसी, श्रीनेत भी कार्रवाई की निंदा कर चुके
यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से फैल गया। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने ट्वीट कर इस कार्रवाई की निंदा की थी। ओवैसी ने कहा था कि “नईम की गलती सिर्फ ये है कि वो भारतीय मुसलमान हैं।” अब यह विवाद संसद तक पहुंच चुका है। राज्यसभा में यह मुद्दा उठने के बाद बैतूल प्रशासन और सरकार पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। वहीं, बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी का कहना था कि यह कार्रवाई पंचायत अधिनियम की धारा 55 के तहत की गई और निर्माण अवैधथा।

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