केंद्रीय बजट में घोषित किए गए तीन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (आयुर्वेदिक एम्स) को लेकर मप्र आयुष विभाग ने केंद्र सरकार को भोपाल का प्रस्ताव भेज दिया है। केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव में राज्य में आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी के लिए राज्य की ओर से भोपाल या उज्जैन में सभी संसाधन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सोमवार को केंद्रीय बजट और मप्र विधानसभा के आगामी सत्र की तैयारियों को लेकर सभी विभागों की समीक्षा की। सीएस ने निर्देश दिए कि केंद्रीय बजट के अनुरुप मप्र में सिटी इकोनॉमिक रीजन, डेडीकेटेड केमिकल एवं पेट्रोकेमिकल पार्क, मेगा टेक्सटाइल पार्क और फार्मास्युटिकल रिसर्च सेंटर के प्रस्ताव तैयार कर जल्द से जल्द भारत सरकार को भेजे जाएं। डेडिकेटेड केमिकल एवं पेट्रोकेमिकल पार्क के लिए रतलाम का प्रस्ताव भेजने पर सहमति बनी है। वहीं फार्मास्युटिकल रिसर्च सेंटर के लिए उज्जैन का प्रस्ताव भेजा जाएगा। सीएस ने सभी विभागों के एसीएस, पीएस और सचिवों को निर्देश दिए कि केंद्रीय बजट के प्रावधानों को विभागवार बारीकी से अध्ययन करें और बजट प्रावधानों के अनुरूप राज्य के हित में प्रोजेक्ट तैयार कर केंद्र को भिजवाएं। बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए नॉलेज व एजुकेशन सिटी, मेडिकल हब, स्कूल-कॉलेजों की लैब, सी-मार्ट, हॉस्टल, स्किल डेवलपमेंट, पशुपालन और एमएसएमई ग्रोथ फंड जैसे क्षेत्रों में बजट प्रावधान किए गए हैं। संबंधित विभाग जल्द ही इनके भी प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजे और हर महीने में कम से कम एक बार केंद्र सरकार के संबंधित विभाग के संयुक्त सचिव से समन्वय करें। उन्हें पूर्व से लंबित परियोजनाओं की जानकारी दें, और उनके सभी पत्रों और उनके जबाव अनिवार्य रूप से मप्र के आवासीय आयुक्त को भेजें। अफसरों को निर्देश- सवालों के निराकरण पहले करें इस समीक्षा बैठक में मप्र सरकार के आगामी बजट की तैयारियों, मौजूदा वित्तीय वर्ष के लक्ष्यों की पूर्ति और केबिनेट के फैसलों के पालन की भी समीक्षा की गई। सीएस ने बजट सत्र को लेकर अफसरों को निर्देश दिए कि पिछले सत्रों के शून्यकाल सूचनाओं, अपूर्ण उत्तर वाले प्रश्नों, आश्वासनों तथा लोक लेखा समिति की अनुशंसाओं से संबंधित लंबित मामलों का निराकरण जल्द किया जाए। विभागीय परामर्शदात्री समितियों की बैठक आयोजित की जाएं। विधानसभा को विभागीय प्रशासकीय प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध कराए। खर्च ही नहीं हो पाए सिंहस्थ मद के ~2300 करोड़ सीएस ने सभी विभागों के निर्देश दिए कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में जिसके पास भी पूंजीगत मद (केपिटल एक्सपेंडिचर) की राशि बची हुई है, उसके अगले दो माह में खर्च कर लें। इसके लिए साप्ताहिक कार्ययोजना बनाकर काम कराएं। हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार पूंजीगत व्यय की प्रगति बेहतर हुई है। प्रदेश में पूंजीगत व्यय की सर्वाधिक 2300 करोड़ रुपए की राशि सिंहस्थ मद में बची हुई है। सीएस ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के एसीएस संजय दुबे को निर्देश दिए कि इसकी तत्काल विभागीय स्तर पर समीक्षा कर काम में तेजी लाएं।
