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‘प्रवासी आयोग बना, कामकाज को हिसाब नहीं’:भोपाल में मंत्री प्रहलाद पटेल बोले- 3 साल आयोग रहा, कुछ तो बता दो, एक भी पन्ना नहीं है

राज्य में प्रवासियों मजदूरों के लिए एक्ट भी था और आयोग भी था लेकिन तीन साल तक रहे इस आयोग की कोई रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। इसके लिए बने पोर्टल पर किसी पंचायत के प्रवासी मजदूर का नाम नहीं है। नाम तो कहीं नहीं लिखे लेकिन संख्या जरूर लिखी है। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने ये बातें रविवार को कहीं। वे भोपाल में 2 दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला सूचना शिक्षा और संचार के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री पटेल ने कहा कि प्रवासी आयोग की रिपोर्ट में एक भी पन्ना नहीं है, दो लाइनें नहीं लिखी हैं। मैंने मंत्री बनने के बाद पूछा कि 3 साल आयोग रहा, कुछ तो बता दो। जिस पर मैं कुछ कह सकूं। आयोग के कामकाज का कोई हिसाब किताब कुछ नहीं है। कम से कम नाम पता तो हो कि कहां गए थे लेकिन कुछ भी नहीं है। पटेल ने कहा कि प्रवासी मजदूरों की बड़ी चुनौतियां हैं। यह आश्चर्य की बात है कि इसको लेकर राज्य सरकार के पंचायत विभाग में सर्कुलर भी जारी किया था लेकिन काम नहीं हुआ। पंचायत से अगर कोई बाहर जा रहा है तो सिर्फ वही बस प्रवासी नहीं है बल्कि कोई बाहर से आकर हमारे यहां श्रम कर रहा है तो वह भी प्रवासी ही है। जनपद सीईओ से आग्रह है कि इसको लेकर काम करें। लोगों के माइग्रेट करने पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है क्योंकि वह भी साथ जाते हैं इसके बारे में हमें सोचना होगा। सीईओ की कम मौजूदगी पर जताई नाराजगी कार्यशाला के समापन कार्यक्रम में मंत्री पटेल ने जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की कार्यशाला में कम मौजूदगी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वे लिखित में इसका कारण लेंगे कि आखिर क्यों नहीं आए? कलेक्टर ने नहीं आने दिया तो उसका लिखित जवाब देना होगा। डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर या ब्लॉक कोऑर्डिनेटर बैठक में नहीं आए तो बताना होगा। ग्राम सभा के खाते में सीधे पैसा कैसे जाए मंत्री पटेल ने कहा कि सरकार की ओर से पंचायत के विकास के लिए दिया जाने वाला पैसा सीधे ग्राम सभा के खाते में पहुंचना चाहिए। जनपद सीईओ को इस बात का विकल्प देखना चाहिए कि क्या ऐसा हो सकता है कि सीधे ग्राम सभा के खाते में रकम जाए और उसका भुगतान संबंधित व्यक्ति को हो जाए। स्टाम्प ड्यूटी, मनरेगा, वित्त आयोग का पैसा ग्राम पंचायत को जाता है तो हमारी चुनौती यह है कि यदि रोजगार करना चाहते तो फंड कहां से आएगा। राज्यपाल की बैठक में भी य़ह मुद्दा उठ चुका है। मंत्री पटेल ने कहा कि संचालक पंचायत ने ग्राम सभाओं के खातों को एक्टिवेट करने के लिए ₹1 डालकर यह चेक किया है कि खाता एक्टिवेट है या नहीं। मंत्री पटेल ने कहा कि सरपंच के खाते से ग्राम सभा के खाते में पैसा पहुंचाने के मेकैनिज्म के बारे में सोचना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मोबिलाइजर की जिम्मेदारी है कि वह हर महीने गांव में जाएं और बैठक लें, अगर ऐसा नहीं करते तो उनके काम पर भी सवाल उठते हैं। पेसा पंचायत में एक माह में ग्राम सभा होना जरूरी है, इसको लेकर जल्दी ही निर्देश जारी जारी किए जाएंगे। मजदूरों के बच्चों की जिम्मेदारी हमारी मंत्री पटेल ने कहा कि यह कहा जाता है कि हमारे राज्य में बंधुआ मजदूर नहीं है लेकिन कुछ स्थानों पर मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाने की शिकायत आई है। यह ठीक नहीं है, बाल श्रमिकों के मामले में हम इतनी गंभीर नहीं है यह हमें स्वीकार करना पड़ेगा। हमने डेटा कलेक्शन कराया है कि ऐसे कितने बच्चे हैं जो 12वीं के बाद फाइनेंशियल लिंकेज की स्थिति में नहीं है और उनके माता-पिता उनके जन्म के समय से ही उनके पास नहीं है तो उसकी रिपोर्ट कीजिए। हम उनकी क्या मदद कर सकते हैं जब तक ऐसे बच्चों का प्लेसमेंट नहीं हो जाए तब तक उन्हें हम झेलेंगे।

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