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पीएम से बात करने वाले आयुष बिना मां के पले:घर की जिम्मेदारी संभाली, कहा- साढ़े 4 करोड़ स्टूडेंट्स में मेरा नाम आना सपने जैसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान देशभर के 12 विद्यार्थियों से सवाल-जवाब किए। शुक्रवार को इस कार्यक्रम का टेलीकास्ट हुआ। इन 12 छात्रों में मध्यप्रदेश से जबलपुर के आयुष तिवारी भी शामिल रहे। टेलीकास्ट के समय आयुष अपने पिता के साथ अपने स्कूल, मॉडल स्कूल में मौजूद थे। दैनिक भास्कर ने 11वीं कक्षा के छात्र आयुष तिवारी और उनके पिता भागीरथ तिवारी से विशेष बातचीत की है। पढ़ें ये खास रिपोर्ट… कई राउंड इंटरव्यू के बाद हुआ चयन आयुष ने बताया कि ‘परीक्षा पर चर्चा 2026’ कार्यक्रम का यह नौवां संस्करण था। इसमें शामिल होने के लिए देशभर से करीब साढ़े चार करोड़ छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। प्रतिभागियों को दो विषय दिए गए थे। एक आत्मनिर्भर भारत और दूसरा परीक्षा पर चर्चा पर आपके विचार। छात्रों से इनमें से किसी एक विषय पर एक मिनट का वीडियो बनाकर भेजने को कहा गया था। आयुष ने ‘परीक्षा पर चर्चा पर आपके विचार’ विषय पर एक मिनट का वीडियो तैयार किया और इसे अपने स्कूल की शिक्षिका को सौंपा। स्कूल स्तर से वीडियो आगे भेजा गया, जिसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने उनके वीडियो का चयन किया। मध्यप्रदेश से एक अन्य छात्र का भी चयन हुआ था। इसके बाद चयनित छात्रों के कई ऑनलाइन इंटरव्यू और डिस्कशन हुए। साथ ही एनसीआरटी, दिल्ली में भी आयुष का इंटरव्यू लिया गया। इन सभी चरणों के बाद पूरे मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए आयुष का चयन किया गया। इसके बाद वह दिल्ली पहुंचे और कार्यक्रम में हिस्सा लिया। 5 दिन चला अलग-अलग एक्टिविटीज का दौर आयुष ने बताया कि दिल्ली में उनका कार्यक्रम पांच दिन का था। पहले दिन सभी छात्रों को एनसीआरटी कैंपस ले जाया गया। यहां देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 36 छात्र पहुंचे थे। सभी छात्रों ने एक-दूसरे से बातचीत की, साथ तस्वीरें लीं, अलग-अलग राज्यों की संस्कृति को जाना और आपस में दोस्ती की। यह अनुभव उनके लिए बेहद यादगार रहा। दूसरे दिन छात्रों के लिए कई एक्टिविटी सेशंस आयोजित किए गए, जिनमें परिचय सत्र भी शामिल था। शाम के समय सभी को कुतुबमीनार घुमाने ले जाया गया। तीसरे दिन 36 छात्रों में से 12 छात्रों का चयन किया गया, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सीधे सवाल-जवाब करने का मौका मिलना था। इन 12 छात्रों में आयुष तिवारी का भी चयन हुआ। आयुष ने बताया कि उन्हें दूसरे नंबर पर प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछने का अवसर मिला, जो उनके लिए गर्व का पल था। पीएम ने नाश्ते के दौरान सभी को चौंकाया आयुष ने बताया कि यह सेशन पहली बार प्रधानमंत्री के आवास पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के चौथे दिन सभी 36 छात्रों को बस से पीएम रेजिडेंस ले जाया गया। वहां पहुंचते ही सभी बच्चों में अलग ही उत्साह था। हमें बताया गया था कि नाश्ते के बाद प्रधानमंत्री से बातचीत होगी, लेकिन पीएम मोदी ने सभी को अचानक सरप्राइज दे दिया। प्रधानमंत्री नाश्ते के समय ही बच्चों के बीच आ गए। उन्हें अपने सामने देखकर हम सभी चौंक गए। ऐसा लग रहा था जैसे कोई सपना सच हो रहा हो। पीएम मोदी ने सभी छात्रों के साथ नाश्ता किया और बातचीत की। इसके बाद प्रधानमंत्री ने बच्चों को असम के गमछे अपने हाथों से पहनाए। यहां करीब दो घंटे तक ‘परीक्षा पर चर्चा’ का कार्यक्रम चला। इस दौरान आयुष को भी प्रधानमंत्री से सवाल पूछने का मौका मिला। उन्होंने पूछा कि कई बार छात्र अपने शिक्षकों की पढ़ाने की गति से तालमेल नहीं बैठा पाते, जिससे सिलेबस पीछे रह जाता है और उसे कवर करने में आगे का पाठ्यक्रम छूट जाता है। ऐसी स्थिति में छात्रों को क्या करना चाहिए? इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने सहजता से जवाब देते हुए कहा कि छात्रों को शिक्षकों से दो कदम आगे चलने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि वे आने वाले सिलेबस का पहले से स्वाध्याय करें, ताकि पढ़ाई में तालमेल बना रहे। आयुष ने बताया कि प्रधानमंत्री से मिलते ही उन्होंने सबसे पहले ‘नर्मदे हर’ का अभिवादन किया। इस पर पीएम ने मुस्कुराते हुए पूछा, “नर्मदापुरम से हो?” आयुष ने जवाब दिया, “नहीं सर, संस्कारधानी जबलपुर से।” इसके बाद प्रधानमंत्री ने सभी बच्चों से ‘”नर्मदे हर” के जयकारे भी लगवाए। दिल्ली में शूट किया गया यह कार्यक्रम शुक्रवार को देशभर में लाइव टेलीकास्ट हुआ। आयुष ने कहा कि वह इस दिन का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। आज पूरे देश ने यह कार्यक्रम देखा और जबलपुर का नाम रोशन हुआ। बेटे के साथ स्कूल में मौजूद रहे पिता टेलीकास्ट के दौरान आयुष के पिता भागीरथ तिवारी अपने बेटे के साथ स्कूल में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। यह उसकी मेहनत और लगन का परिणाम है। उन्होंने कहा, “मुझे अपने बेटे पर बेहद गर्व है।” भागीरथ तिवारी ने बताया कि जब आयुष ने एक दिन पहले दिल्ली जाने की बात कही तो उन्हें यकीन नहीं हुआ। पहले तो उन्होंने मना कर दिया, लेकिन जब बेटे ने आधिकारिक पत्र दिखाया, तब जाकर उन्हें विश्वास हुआ। संघर्षों से भरी है पिता की कहानी भागीरथ तिवारी पेशे से अतिथि शिक्षक हैं और वर्तमान में जबलपुर के पास कटंगी में उनकी पोस्टिंग है। उन्होंने बताया कि बेटे को पालने और पढ़ाने के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। शुरुआती वर्षों में उन्होंने 8 से 10 साल मुंबई में काम किया। वर्ष 2008 में 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान वह वहीं मौजूद थे। उस घटना से सुरक्षित लौटने के बाद वे अपने गृह जिले दमोह वापस आ गए। मुंबई से लौटने के बाद उन्होंने पढ़ाई दोबारा शुरू की और ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ डीएड किया। इसके बाद उन्होंने अतिथि शिक्षक के रूप में अध्यापन कार्य शुरू किया। पिता के साथ अकेले रहते हैं आयुष भागीरथ तिवारी ने बताया कि साल 2013 में, जब आयुष सिर्फ 4 साल का था, तब उनका पत्नी से तलाक हो गया। उस समय आर्थिक हालात भी ठीक नहीं थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। आयुष ने बिना मां के सहारे कई कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए पढ़ाई की। आयुष ने पांचवीं कक्षा तक दमोह के सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद वह जबलपुर में अपने चाचा के यहां रहकर आठवीं तक पढ़ा। आठवीं कक्षा में उसने नवोदय विद्यालय और मॉडल स्कूल दोनों की प्रवेश परीक्षाएं दीं। मॉडल स्कूल जबलपुर में चयन होने के बाद से वह वहीं पढ़ाई कर रहा है, जहां हॉस्टल समेत सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। IAS बनने का सपना पिता ने बताया कि आयुष शुरू से ही मेहनती और प्रतिभाशाली रहा है। “हमने जो भी सिखाया, उसने उसे पूरे मन से सीखा और उसमें निपुणता हासिल की,” उन्होंने कहा। वर्तमान में आयुष आईएएस की तैयारी पर भी फोकस कर रहा है और उसका सपना एक दिन आईएएस अधिकारी बनने का है। स्कूल के बाद घर की जिम्मेदारी भी संभाली आयुष ने बताया कि जब वह 4 साल का था, तब से उसकी मां उसके साथ नहीं थीं। ऐसे में कम उम्र से ही उसे जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। उस समय दमोह में उसके पिता प्राइवेट टीचर थे और आयुष ने वहीं से स्कूल जाना शुरू किया। आयुष ने कहा कि स्कूल से लौटने के बाद वह घर का काम भी करता था। वह खुद के लिए और पिता के लिए खाना बनाता था। मुझे खिचड़ी अच्छे से बनाना आता था। घर के सारे काम पापा और मैं मिलकर करते थे और साथ ही पढ़ाई भी जारी रखी। मॉडल स्कूल में एडमिशन के बाद आयुष ने बताया कि पिछले साल उसी स्कूल के एक सीनियर छात्र का चयन ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के लिए हुआ था। उस पल को देखकर उसने तय कर लिया था कि वह भी एक दिन इस कार्यक्रम का हिस्सा जरूर बनेगा।

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