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नौरादेही की तर्ज पर NH 30 में बनाए रेड बॉक्स:वार्निंग भी लिखी, सड़क पर बैठे जानवरों को बचाने की पहल; जबलपुर में प्रदेश का पहला ट्रायल

नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने नेशनल हाईवे 30 पर एक नए तरह की पहल शुरू की है। जिस तरह NHAI ने नौरादेही टाइगर रिजर्व के पास से गुजर रहे नेशनल हाईवे 45 पर जानवरों को वाहनों की टक्कर से बचाने के लिए रेड टेबल टॉप मार्किंग (लाल निशान) की है। उसी तर्ज पर नेशनल हाईवे 30 पर दुर्घटनाओं से जानवरों और इंसानों को जान बचाने के लिए रेड टेबल टॉप मार्किंग की है। इस मार्किंग के बड़े अक्षरों में चेतावनी भी लिखी गई है। हालांकि नौरादेही से गुजरने वाले नेशनल हाईवे 45 पर 2 किमी के संवेदनशील और घाट वाले हिस्से पर लगातार यह मार्किंग की गई है, लेकिन नेशनल हाईवे 30 पर इसे टुकड़ों में किया गया है। एनएच 30 पर करीब 150 किमी के एरिया में दोनों तरफ मिलाकर 100 से ज्यादा जगह यह मार्किंग की गई है। यह मार्किंग एक साथ नहीं है। चार-चार मार्क ऐसी ऐसी जगहों को आइडेंटिफाई कर बनाए गए हैं जहां सड़कों पर मवेशी बैठते हैं। रेड मार्किंग वाली जगह पर हिंदी और अंग्रेजी भाषा में बड़े अक्षरों में लिखा है – चेतावनी: मवेशी बाहुल्य क्षेत्र। Warning: Cattle Prone Area. साथ ही इस मार्किंग के किनारे ट्रैफिक साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं। दैनिक भास्कर की टीम में ग्राउंड पर पहुंचकर ये मार्किंग देखीं। ये भी देखा कि आखिर इस मार्किंग का वाहनों की स्पीड पर कोई असर पर रहा है या नहीं। हम सड़क किनारे करीब 3 घंटे तक मौजूद रहे। यहां हमें ट्रक से लेकर छोटी बाइक तक एक भी वाहन ये चेतावनी पढ़कर स्पीड कम करते हुए नहीं दिखा। हालांकि जब हमने एक ट्रक पर चढ़कर देखा कि वहां से ये रेड मार्किंग और चेतावनी कैसी दिखती है तो हमें यह कम स्पीड में साफ दिखाई दी। ट्रक ड्राइवर कमल सिंह ने बातचीत में बताया कि इससे दुर्घटनाओं में काफी मदद मिलेगी, रात के वक्त भी सफेद अक्षरों के लिखी चेतावनी लाइट पड़ने पर दिखाई देती है। हालांकि स्पीड उन्होंने हमारे कहने पर ही कम की थी। ढाबा संचालक बोले- जानवर आते हैं दुर्घटना हो जाती है
सड़क किनारे ढाबा संचालक आशीष सक्सेना ने कहा कि इस रेड मार्किंग से कोई खास फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। ये हाईवे बेहद खतरनाक हैं। यहां वाहन कितनी स्पीड से निकल रहे हैं। तेज स्पीड से निकलने वाले ट्रक ड्राइवरों को ऊपर से मार्किंग नहीं दिखती। जानवर अचानक रोड पर आते हैं और हाइवे पर एक्सीडेंट हो जाते हैं। हमने यहां दिन के कई बार डायल 112 घूमती दिखती है। हर दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर बोले- पहला एक्सपेरिमेंट
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने कहा कि बारिश के दिनों में अक्सर ये शिकायतें मिलती हैं कि नेशनल हाईवे पर बहुत सारे मवेशी बैठे रहते हैं। उन्हें हटाने का प्रयास लगातार किया जाता है। वहां चालकों को एडवांस वार्निंग मिल जाए इसलिए साइन बोर्ड लगा रहे हैं। कुछ जगहें चिन्हित की हैं जहां अक्सर मवेशी बैठते हैं, वहां साइन बोर्ड के साथ रेड मार्किंग कर वाहनों को अलर्ट करने के लिए संदेश लिखे जा रहे हैं। मकसद है कि वहां चालक ये वार्निंग पर्दाकर अपनी गति धीमी करें। रोड पर जो रेड ब्लॉक बनाए गए हैं उनका साइज 2 बाय 3 मीटर है। ये थर्मोप्लास्टिक रोड मार्किंग के जरिए किया गया है। ये ब्लॉक नौरादेही के तर्ज पर बनाए गए हैं। इन मार्किंग में छोटी से बड़ी गाड़ियों में कोई फिसलन नहीं होती। वाहन अगर ज्यादा स्पीड पर चल रहे हैं तो वार्निंग नहीं दिखेगी, लेकिन उन्हें एक अलर्ट तो मिलेगा कि कुछ रेड बॉक्स बना हुआ है। बॉक्स में रिफ्लेक्टिविटी वाली कोड मार्किंग है जैसे ही वाहन की लाइट पड़ेगी तो अक्षर दिखाई देंगे। हाल की एनएचएआई ने NHAI वेलकम्स यू, NHAI थैंक्स यू जैसे इनोवेटिव काम किए हैं। अभी कई जगह पर काम चल रहा है। ताकि लोग ये डिफरेंशियट कर पाएं कि ये नेशनल हाईवे का सेक्शन है या दूसरे डिपार्टमेंट का सेक्शन है। ये इनीशिएटिव भी इसी तरह का है। हमने कुल 25 लोकेशन पर बॉक्सेस बनाए हैं। हर लोकेशन पर चार बॉक्स बनाए गए हैं। दो रोड के इस तरफ और दो रोड के उस तरफ। करीब 200 किमी की रेंज में हमने 100 से ज्यादा बॉक्स बनाए हैं। ये खबर भी पढ़ें… नौरादेही अभयारण्य में NHAI का अनोखा प्रयोग जंगल क्षेत्रों में बढ़ते सड़क हादसों और वन्य जीवों की मौत को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक अनूठी तकनीक अपनाई है। जबलपुर–भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नौरादेही अभयारण्य के 12 किलोमीटर लंबे डेंजर जोन को सुरक्षित बनाने के लिए हाईवे को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।पूरी खबर पढ़ें

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