इंदौर की बढ़ती प्यास बुझाने व शहर में 24 घंटे, सातों दिन जल सप्लाय के लिए नर्मदा के चौथे चरण का भूमिपूजन हो चुका है, लेकिन 2500 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को अब 2029 तक जमीन पर उतारना बड़ी चुनौती है। 30 महीने में 1500 किमी लंबी वितरण पाइपलाइन व 57 किमी की फीडर लाइन डालने का टारगेट है। ऐसे में असल काम के लिए करीब 28 महीने यानी लगभग 840 दिन ही बचेंगे। यानी रोजाना 1.8 किमी पानी की डिस्ट्रीब्यूशन लाइनें और 70 मीटर फीडर लाइन बिछाने का काम करना होगा। वहीं 40 नई टंकियां बनना हैं। एक टंकी के निर्माण में करीब में 18 महीने का समय लगेगा। इसलिए सभी टंकियों का काम एकसाथ शुरू करना होगा। 2500 करोड़ के प्रोजेक्ट में से 800 करोड़ रुपए सरकार देगी तो 1700 करोड़ रुपए निगम को लोन लेना होगा। इसके लिए भोपाल से मंजूरी लेना होगी। टेंडर और वर्कऑर्डर जारी हो चुके हैं। प्रोजेक्ट के तहत शहर को नर्मदा से 450 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलेगा। इसके लिए वांचू पॉइंट से इंदौर तक 38.85 किमी लंबी ग्रेविटी मेन लाइन, टनल, नई टंकियां, फीडर लाइन और पूरे शहर में बड़ा वितरण नेटवर्क तैयार किया जाना है। वांचू पॉइंट पर नया इंटकवेल भी बनेगा। निगम ने काम को चार पैकेज में बांटा है, जिनमें से मुख्य फील्ड वर्क अभी शुरुआती तैयारी के दौर में है। हालांकि शहर के भीतर बड़े स्तर पर काम शुरू होने में अभी करीब दो महीने और लग सकते हैं। साफ है कि अगर काम एक साथ कई मोर्चों पर समानांतर नहीं चला तो 2029 की डेडलाइन सिर्फ कागजों में सिमट सकती है। इधर, अमृत-1 प्रोजेक्ट का काम करने में सात साल लग गए थे। सरकार से 800 करोड़, बाकी लोन… यानी पानी के साथ बढ़ेगा निगम पर कर्ज का बोझ इस पूरी योजना का सबसे अहम और संवेदनशील हिस्सा इसका फाइनेंशियल मॉडल है। कुल 2500 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में से करीब 800 करोड़ रुपए राज्य सरकार से मिलने हैं, जबकि बाकी राशि नगर निगम को लोन लेकर जुटानी होगी। 450 एमएलडी अतिरिक्त पानी तो मिलेगा, लेकिन चुनौती उसे शहर के हर हिस्से तक पहुंचाने की निगम का दावा है कि नर्मदा के चौथे चरण के बाद इंदौर को 450 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलेगा। यह बढ़ोतरी शहर के भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर की जा रही है, क्योंकि अभी भी शहर के कई हिस्सों में नर्मदा का पानी नियमित नहीं पहुंच पा रहा है। बायपास, राऊ, सुपर कॉरिडोर और बाहरी विस्तार वाले क्षेत्रों में तेजी से कॉलोनियां बसी हैं। इनमें से 250 से ज्यादा कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां अब तक जलापूर्ति या तो अधूरी है या कमजोर है। ऐसे में चौथा चरण सिर्फ अतिरिक्त पानी लाने का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पूरे शहर के जल वितरण ढांचे को दोबारा व्यवस्थित करने की योजना है। अभी शहर में 105 पानी की टंकियां हैं। इनके साथ 40 नई टंकियां और जुड़ेंगी, यानी कुल 145 टंकियां करीब 276 वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करेंगी। इसके अलावा इस चरण में करीब 2.47 लाख नए घरेलू कनेक्शन भी दिए जाएंगे। पुरानी लाइनें बदलना भी जरूरी, वरना 24 घंटे पानी का सपना फिर अटक जाएगा निगम इस प्रोजेक्ट को 24×7 जलापूर्ति की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है। योजना में सिर्फ नई लाइनें बिछाना ही नहीं, बल्कि करीब 550 किमी पुरानी पाइपलाइन बदलना, डीएमए सिस्टम, एनआरडब्ल्यू कंट्रोल और लाइन लॉस कम करना भी शामिल है। अभी अनुमान है कि शहर में करीब 20 फीसदी पानी लाइन लॉस में चला जाता है। नया नेटवर्क इस नुकसान को कम करने के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन इस दावे के साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है। क्योंकि अमृत-1 योजना में 900 किमी लाइन बदलने का काम सात साल में भी पूरा नहीं हो पाया। नर्मदा चौथे चरण का कहीं बड़ा और ज्यादा जटिल नेटवर्क ढाई-तीन साल में पूरा करने के लिए हर रोज काम का हिसाब-किताब करना होगा। इन इलाकों में पहली बार पहुंचेगा नर्मदा का पानी
