यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई मारे गए हैं। सोशल मीडिया ट्रुथ पर एक पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा- इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक, खामेनेई मारा गया है। यह न केवल ईरान की जनता के लिए न्याय है, बल्कि दुनिया के उन देशों के लोगों के साथ हुआ न्याय है, जिन्हें खामेनेई और उसके खूनी गिरोह ने मार डाला था। इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति वॉर रूम में बैठकर पर ईरान पर हुई एयरस्ट्राइक की मॉनीटरिंग कर रहे थे। इजराइल ने ईरान पर हमलों का कोडनेम शेर की दहाड़ (लायन रोर) रखा है। जबकि अमेरिका ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया है। ईरान की सेना ने जवाबी हमलों को खत्म-ए-तूफान नाम दिया है। रॉयटर्स ने भी इजराइली अधिकारियों के हवाले से ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत का दावा किया है। बयान के मुताबिक खामेनेई का शव एयर स्ट्राइक से बचे मलबे के नीचे मिला है। हालांकि ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने पुष्टि की है कि ईरान के खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू इजराइली हमलों में मारे गए हैं। इससे पहले इजराइली PM बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा था कि खामेनेई के मारे जाने के संकेत हैं। हालांकि उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया। दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि सुप्रीम लीडर जिंदा हैं। वे सुरक्षित जगह पर हैं। ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने बताया है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कई दिनों से सामने नहीं आए खामेनेई 86 साल के खामेनेई ईरान के कमांडर-इन-चीफ हैं। सभी पॉलिटिकल और धार्मिक मामलों में खामेनेई का ही फैसला आखिरी होता है। ईरान की पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड, जो इस्लामिक रिपब्लिक की सुरक्षा करती है, सीधे उनके सामने जवाब देती है। 1989 में, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के फाउंडर रूहोल्लाह खुमैनी की मौत के बाद खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर बने। 1979 की क्रांति में शाह मोहम्मद रजा पहलवी को हटाने वाले मूवमेंट में खामेनेई का अहम रोल था। शनिवार को हुए हमलों में से एक खामेनेई के ऑफिस के पास हुआ था। हालांकि यह तुरंत साफ नहीं हो पाया कि उस समय खामेनेई कहां थे, उन्हें कई दिनों से नहीं देखा गया है। ईरानी स्कूल पर हमले में 85 छात्राओं की मौत ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 घायल हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजराइली हमले मे ईरानी रक्षामंत्री अमीर नासिरजादेह और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपोर की मौत हो गई। इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के 10 शहरों पर एयरस्ट्राइक की है। हमले के बाद ट्रम्प ने वीडियो जारी कर कहा कि ईरान पर यह हमला अमेरिकी नागरिकों की रक्षा के लिए किया गया है। जवाब में ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं और कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। ईरान और इजराइल के हमले की तस्वीरें… अमेरिका और इजराइल का जॉइंट मिलिट्री एक्शन इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने नए अभियान का नाम ‘लियोनस् रोर’ (शेर की दहाड़) रखा है। ये हमला ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को लेकर चल रही बातचीत के बीच हुआ है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने हाल ही में ईरान पर हमले की धमकी दी थी। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइलों को तबाह करने और उसके मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने की कोशिश कर रही है। ईरान-अमेरिका के बीच बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद चल रहा था ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। इजराइल के ईरान पर हमले से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
