छिंदवाड़ा जिले के तामिया के पास स्थित छातीआम गांव में बाघ की हत्या के मामले में अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जिस खेत में एसटीआर के बाघ को यूरिया देकर मारा गया था, वहीं पर चोरी-छिपे अफीम की खेती भी की जा रही है। मौके पर बड़ी संख्या में अफीम के पौधे पाए गए, जिन्हें देखकर वन विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। वन विभाग ने इसकी सूचना तामिया थाने को भी दी, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। इस मामले में वन विभाग की मॉनिटरिंग टीम की लापरवाही भी सामने आई है। बाघ के रेडियो कॉलर से 3 मार्च से कोई हलचल नहीं मिल रही थी, लेकिन टीम 23 दिन बाद लोकेशन के आधार पर जांच के लिए पहुंची, तब जाकर शिकार का मामला सामने आया। अफीम की खेती के खुलासे के बाद क्या कर रहा प्रशासन…? पौधों में डोडा आ चुके हैं, जिनमें चीरा लगे हैं खेत में करीब एक एकड़ में 700 से ज्यादा अफीम के पौधे मिले हैं। पौधों में डोडा आ चुके हैं, जिनमें चीरा लगे हैं। संभवतः अफीम निकलनी शुरू हो गई है। कुछ दिन बाद पौधे खसखस निकलने की स्थिति में पहुंच जाएंगे। इसकी अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपए तक हो सकती है। अफीम की खेती के सबूत खत्म होने की आशंका खुलासे के बाद भी अधिकारियों के बयान स्पष्ट नहीं हैं। छिंदवाड़ा डीएफओ साहिल गर्ग का कहना है कि जानकारी पुलिस को दी जा रही है। वहीं, छिंदवाड़ा एसपी अजय पांडे ने बताया कि फॉरेस्ट विभाग से जानकारी मिली है, इसमें टीम मौके पर जाकर जांच कराई जाएगी। जांच में जो बिंदु सामने आएंगे उसे पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आशंका है कि देरी के कारण अफीम की खेती के सबूत मिटाए जा सकते हैं। मामले में नारकोटिक्स विभाग को भी सूचना देने की जरूरत बताई जा रही है। अब जानिए बाघ शिकार कांड, जिससे अफीम खेती का खुलासा हुआ बाघ पहले मवेशी का शिकार भी कर चुका था बताया जा रहा है कि यह बाघ एसटीआर के देनवा बफर और छिंदवाड़ा पश्चिम वनमंडल के सांगाखेड़ा क्षेत्र में घूमता था। छातीआम के रहने वाले आरोपी उदेसिंग (50) के खेत में बाघ पहले मवेशी का शिकार भी कर चुका था। ऐसे में आशंका है कि बाघ के बार-बार खेत में आने से किसान को हमले का डर होगा। पौधों से अफीम निकालने में अड़चन आ रही होगी। इसलिए उसने बाघ को मारा होगा। हालांकि आरोपियों ने पूछताछ में मवेशियों के मरने से नाराजगी के चलते बाघ को यूरिया देकर हत्या करने की बात स्वीकार की है। डेढ़ साल पहले बांधवगढ़ से लाया गया बाघ मृत मिला एसटीआर क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने बताया कि बाघ की उम्र करीब 4 साल थी और उसे डेढ़ साल पहले बांधवगढ़ से लाकर यहां छोड़ा गया था। वह लंबे समय से इसी इलाके में रह रहा था। एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बाघ कॉलर आईडी निकालने के लिए विभाग को पत्र लिखा था। बाघ की आखिरी लोकेशन के आधार पर 26 मार्च को टीम छातीआम गांव पहुंची। जांच के दौरान एक मृत बैल मिला, जिससे शक बढ़ा। सर्चिंग के दौरान डॉग स्क्वॉड आरोपी के घर जाकर रुका इसके बाद डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई। एसटीआर की डॉग अपोलो और छिंदवाड़ा फॉरेस्ट से डॉग स्कूबी को बुलाया। सर्चिंग के दौरान टीम आरोपी उदेसिंग के घर तक पहुंची, जहां पूछताछ में उसने शिकार की बात कबूल कर ली। जंगल में करीब 200 मीटर दूर एक गड्ढे से बाघ का शव बरामद किया गया, जिसे मारकर दफनाया गया था। पोस्टमॉर्टम में जहर से मौत की पुष्टि हुई है। इस मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपी उदेसिंग के अलावा बिसनलाल, मनोहर सिंह, कैलाल और मनक सिंह को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। बाघ की मॉनिटरिंग में लापरवाही, जांच कर कार्रवाई की मांग वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने केंद्रीय वन मंत्रालय, राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण, वाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो और प्रमुख सचिव वन मप्र शासन को पत्र लिखा है। इसमें कॉलर आईडी वाले बाघ के शिकार मामले में मॉनिटरिंग को लेकर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। साथ ही उच्च स्तरीय फोरेंसिक जांच की मांग की गई है। 3 साल में 5 बाघों का शिकार
