फोरलेन हाइवे किनारे की 150 करोड़ से ज्यादा कीमत की सरकारी जमीन नायब तहसीलदार, बाबू और पटवारियों ने खुर्दबुर्द कर दी। करैरा तहसील के जरगवां गांव में दो जमीनों के फर्जीवाड़े में नायब तहसीलदार सहित 4 बाबू और दो पटवारियों के खिलाफ तहसीलदार ने जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव, बाबू जीवनलाल तिवारी (सेवानिवृत), बाबू प्रताप पुरी (तत्कालीन शिवपुरी रिकॉर्ड शाखा प्रभारी), नायब तहसीलदार के रीडर बाबू लोकेंद्र श्रीवास्तव, बाबू लालाराम वर्मा (मृत), हल्का पटवारी बृजेश यादव, पटवारी मुकेश चौधरी (मृत) के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। करैरा तहसील में दिनारा वृत्त के जरगवां अव्वल गांव में सरकारी सर्वे नंबर 247 की जमीन के बटे (हिस्से) कर नए नंबर जनरेट कर दिए। यह सरकारी जमीन लोगों के नाम दर्ज कर निजी कर दी। वहीं खसरा नंबर 101 में पट्टे की जमीन के रिकॉर्ड से विक्रय वर्जित ही हटा दिया। इससे पूर्व बीएमओ की पत्नी ने जमीन खरीद ली। यह जमीन दूसरे को बेची। फिर विक्रय से वर्जित बताकर क्रेता का नामांतरण बदल दिया। कलेक्टर ने इसकी जांच कराई थी। करैरा के जरगवां गांव में दो जमीनों में ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा पहला केस – राजस्व रिकॉर्ड से ‘विक्रय से वर्जित’ टीप हटाई जरगवां में जमीन पूर्व बीएमओ की पत्नी श्वेता शर्मा ने खरीद ली। नकल शाखा से प्रमाणित प्रति में जमीन विक्रय से वर्जित नहीं थी। श्वेता ने यही जमीन उमेश गुप्ता को बेच दी। फिर विक्रय से वर्जित जमीन बताकर नए आदेश से उमेश का नाम हटाकर श्वेता का नाम दर्ज कर दिया गया। ऐसे में उमेश ने एफआईआर करा दी। दूसरा केस – सरकारी जमीन के बटे कर नए सर्वे नंबर दिए जरगवां का सर्वे नंबर 247 पुराने राजस्व रिकॉर्ड में पूरा सरकारी दर्ज था। इसमें फर्जी आदेशों से प्रविष्टियां दर्ज कर दी गईं। जिन प्रकरण नंबरों से हेराफेरी की गई, दायरा पंजियों के आधार पर वे प्रकरण दूसरी जमीनों के निकले। साल 2023-24 में उक्त सरकारी सर्वे नंबर के बटे कर दिए। जानिए… जमीन फर्जीवाड़े में किसकी क्या भूमिका अशोक श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार इन्होंने जरगवां में विक्रय से वर्जित जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण कर दिया। दूसरी रजिस्ट्री पर भी नामांतरण किया। फिर बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के क्रेता का नाम हटा दिया। फर्जी आदेश से सरकारी सर्वे नंबर 247 के बटे कर निजी लोगों के नाम जमीन दर्ज कर दी। जीवनलाल तिवारी, बाबू (सहायक ग्रेड-2) करैरा तहसील में तत्कालीन ऑफिस कानूनगो रहे। रिकॉर्ड शाखा का भी प्रभार रहा है। साल 2012 से 2014 के बीच राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी के लिए जिम्मेदार हैं। करीब 7 साल पहले रिटायर हो गए। करैरा में ही रहते हैं। प्रताप पुरी, बाबू (सहायक ग्रेड-3) रिकॉर्ड शाखा शिवपुरी के तत्कालीन प्रभारी रहे। करैरा से आया साल 2014 का रिकॉर्ड जमा हुआ। उस दौरान रिकॉर्ड का मिलान नहीं किया। उस रिकॉर्ड में पेज फटे हुए थे। वर्तमान में जावक शाखा में पदस्थ हैं। मुकेश चौधरी, पटवारी इनका निधन हो चुका है। जरगवां हल्के के तत्कालीन पटवारी रहे। इन्हीं के समय साल 2012-2014 में पट्टे की जमीन से विक्रय वर्जित एंट्री विलोपित हुई। फर्जी प्रकरण बने। एंट्री भी की गईं। “जांच रिपोर्ट के आधार पर करैरा तहसीलदार को भेजकर दिनारा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। जिले में कहीं से भी फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आती है तो जांच कराएंगे। जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।”
– रवींद्र कुमार चौधरी, कलेक्टर, शिवपुरी
