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जबलपुर में जज से एक लाख 7 हजार की ठगी:चारधाम की यात्रा के लिए की थी बुकिंग, कार-हेलीकॉप्टर से यात्रा का दिया झांसा

जबलपुर में साइबर ठगों ने एक जज के साथ एक लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी कर दी।न्यायाधीश ने चारधाम यात्रा कराने के लिए बुकिंग की थी। आरोपियों ने कार और हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर 1 लाख 7 हजार 793 रुपए हड़प लिए। जब आरोपियों ने दोबारा राशि मांगने के लिए कॉल किया, तो जज को संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने गुरुवार को गोरखपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। दरअसल, कुछ दिन पहले जज ने मोबाइल पर चारधाम यात्रा से संबंधित ट्रिपलांजा कंपनी का विज्ञापन देखा था। इसमें यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर टिकट बुकिंग शुरू होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद उन्होंने परिजनों के साथ चारधाम यात्रा पर जाने की योजना बनाई थी। जज प्रमेंद्र सिंह जबलपुर के कटंगा के रहने वाले हैं और जिला न्यायालय में बतौर विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस पदस्थ हैं। इंटरनेट पर विज्ञापन देखकर किया संपर्क जज ने इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित विज्ञापन में दिए गए फोन नंबर पर संपर्क किया। सामने वाले व्यक्ति ने खुद को टूर कंपनी का संचालक बताया। उसने कार और हेलीकॉप्टर से चारधाम यात्रा कराने का भरोसा दिलाकर बुकिंग कन्फर्म करने के लिए एक लाख रुपए से अधिक की अग्रिम राशि ऑनलाइन जमा करवा ली। कुछ दिनों बाद फिर जज के मोबाइल पर कॉल आया और अतिरिक्त राशि मांगी गई। पूछताछ करने पर उन्हें धोखाधड़ी का अहसास हुआ। इसके बाद गोरखपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस फोन नंबर और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के आधार पर आरोपियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। कार और हेलीकॉप्टर से यात्रा का दिया पैकेज जानकारी के अनुसार, आरोपी ने टूर संचालक बनकर जज से फोन पर बातचीत की थी। उसने हरिद्वार से कार और हेलीकॉप्टर के जरिए चारधाम यात्रा का पैकेज ऑफर किया। बातचीत के दौरान प्रति व्यक्ति 25,500 रुपए शुल्क तय किया गया। बुकिंग कन्फर्म करने के लिए आरोपी ने अग्रिम भुगतान मांगा। 17 मार्च को 45,900 रुपए और 20 मार्च को 61,893 रुपए हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर ट्रांसफर करा लिए। टूर कंपनी के नाम से जाली बिल भी भेजा आरोपियों ने जज को बुकिंग प्रक्रिया समझाई और इंटरनेट मीडिया के जरिए यात्रियों के आधार कार्ड, फोटो और अन्य दस्तावेज मांगे। जज ने उनकी बातों में आकर जरूरी जानकारी साझा कर दी। इसके बाद आरोपियों ने टूर कंपनी के नाम से जाली बिल और उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड का फर्जी पंजीयन पत्र भेजकर भरोसा दिलाया। संपर्क करने पर नहीं मिला जवाब राशि भेजने के कुछ दिन बाद जब जज ने संपर्क किया, तो संबंधित मोबाइल नंबर से कोई जवाब नहीं मिला। संदेह होने पर उन्होंने इंटरनेट पर ट्रिपलांजा कंपनी की वेबसाइट खोजी और वहां दिए गए नंबर पर संपर्क किया। कंपनी ने बताया कि उनका मुख्यालय देहरादून में है और उनकी कोई अन्य शाखा या एजेंट नहीं है। साथ ही, इंटरनेट पर दिए गए नंबर को फर्जी बताया। फिलहाल पुलिस ने जज की शिकायत पर अज्ञात साइबर ठगों की तलाश शुरू कर दी है।

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